Patna में SLBC Bihar की 98वीं बैठक में KCC, MSME और कृषि ऋण प्रवाह की हुई समीक्षा
आज पटना में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), बिहार की 98वीं बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की। बैठक में माननीय मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, श्री श्रवण कुमार तथा माननीय मंत्री, कृषि विभाग, श्री विजय कुमार सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक में राज्य के वरिष्ठ अधिकारीगण- बिहार के विकास आयुक्त, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, कृषि विभाग के प्रधान सचिव, वित्त विभाग की सचिव (व्यय), सहकारिता विभाग के सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव तथा जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
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बैठक के दौरान राज्य में वित्तीय प्रगति, ऋण प्रवाह तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा एवं निर्णय लिए गए:
SLBC बिहार की 96वीं और 97वीं संयुक्त त्रैमासिक बैठक के कार्यवृत्त का अंगीकरण किया गया तथा उनके आलोक में तय किए गए कार्य बिंदुओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही तक वार्षिक साख योजना (ACP) के तहत उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही प्राथमिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण, सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं (PMEGP, PMFME, मुद्रा योजना, PM-स्वनिधि, PM विश्वकर्मा एवं PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना), MSME तथा कृषि क्षेत्र (KCC फसल ऋण, डिजिटल KCC और कृषि अवसंरचना कोष) के वित्त पोषण का जायजा लिया गया। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए KCC ऋण तथा जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के बैंक लिंकेज एवं व्यक्तिगत वित्तपोषण की प्रगति पर विशेष जोर दिया गया।
बैंकों में NPAs, नीलाम-पत्र वादों तथा SARFAESI अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन एवं रिकवरी से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य के जिलों के साख-जमा अनुपात (CD Ratio) की समीक्षा करते हुए ऋण ग्राह्यता क्षमता बढ़ाने के उपाय, बिना बैंकिंग सुविधा वाले रेवेन्यू केंद्रों (URCs) में नए आउटलेट खोलने, महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BCs) की भागीदारी बढ़ाने तथा BCs के सामने आ रही operational चुनौतियों के समाधान पर बात की गई।
राज्य में PoS मशीनों और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के विस्तार तथा FLCs/CFLs और स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से डिजिटल वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर बल दिया गया।PMJDY (पुनः KYC सहित), PMJJBY, PMSBY, अटल पेंशन योजना (APY), ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के वित्तीय समावेशन, स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी तथा अनक्लेम्ड ऐसेट्स के त्वरित निपटान संबंधी विषयों पर समीक्षा की गई।
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मुख्यमंत्री सचिवालय के ई-कंपलायन्स डैशबोर्ड, सहयोग पोर्टल (RTMS) और CP GRAMS Portal के माध्यम से प्राप्त बैंकिंग शिकायतों के अनुपालन तथा बिहार राज्य CSR पोर्टल पर नोडल अधिकारियों के पंजीकरण और गतिविधियों को अपलोड करने के निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में राज्य में कौशल विकास (RSETI व NSDC के माध्यम से), व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन तथा प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ऋण पुनर्गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
भारत पर बड़ा खुलासा देख चौंके रूस-चीन के लोग, घूम गया अमेरिका का दिमाग!
आने वाले दिनों में आप भारत के खिलाफ एक बहुत बड़ी इंफॉर्मेशन वॉर होते देखेंगे क्योंकि भारत पर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसे देखकर रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप के लोग भी चौंक गए हैं। यह खुलासा भारत के लिए तो एक वरदान है, लेकिन भारत के दुश्मनों के लिए श्राप है। इस धमाकेदार खबर की चर्चा अब रूसी और अमेरिकी मीडिया तक में होने लगी है। दरअसल भारत ने उल्टी गंगा बहने लगी कहावत को शत प्रतिशत सच कर दिखाया है। भारत अब एक तरफ चीन को ही मैन्युफैक्चरर्ड गुड्स बेच रहा है। तो दूसरी तरफ दुनिया के कई देशों को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भी ज्यादा पेट्रोल और डीजल बेच रहा है। यह दोनों चमत्कार इतिहास में पहली बार हुए हैं। बता दें कि चीन अभी भी भारत को ज्यादा सामान बेचता है। लेकिन भारत ने हाल फिलहाल में जो किया है वह इतिहास में कभी नहीं हुआ।
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पिछले वित्त वर्ष में चीन को भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात तीन गुना बढ़कर $3.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और इस साल भी इसमें 15% से ज्यादा की लगातार बढ़ोतरी जारी है। इसमें मुख्य रूप से स्मार्टफोन, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, डिस्प्ले, मॉड्यूल और टेलीकॉम उपकरण शामिल हैं। भारत से चीन भेजे जाने वाले इंजीनियरिंग सामानों जैसे ऑटो कंपोनेंट्स, मशीनरी पार्ट्स और हैंड टूल्स में भी 21% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह पहली बार हो रहा है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में चीन के ही घरेलू बाजार में अपनी पैठ बना चुका है। जो चीन कभी पूरी दुनिया को इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान बेचता था, आज वही चीन भारत में बने कंपोनेंट्स खरीद रहा है। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की एक बहुत बड़ी जीत है। इस साल अप्रैल अगस्त के दौरान ब्रिक्स देशों को भारत का एक्सपोर्ट 34% बढ़कर 19.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह एक्सपोर्ट्स चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस को किए जा रहे हैं।
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भारत की तरफ से चीन को होने वाले एक्सपोर्ट्स में 39% और दक्षिण अफ्रीका को होने वाले एक्सपोर्ट्स में 58% की वृद्धि दर्ज की गई है। अब आप इन चौंकाने वाले आंकड़ों पर एक नजर डालिए। इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत ने अमेरिका में भी तहलका मचा दिया। इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्मार्टफोनस ने निभाई है। आपको बता दें कि 2015 में भारत ने अमेरिका को $6 बिलियन के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बेचे थे। जो अब 2025 में 38 बिलियन तक पहुंच गए हैं। इन 38 बिलियन में 25 बिलियन के तो सिर्फ स्मार्टफोंस हैं। 2024 में अमेरिका ने चीन से 11 करोड़ स्मार्टफोनस खरीदे थे और भारत से सिर्फ $.5 करोड़। मगर 2025 में जनवरी से मई का डाटा बताता है कि चीन ने अमेरिका को 2.94 करोड़ स्मार्टफोंस बेचे। जबकि इसी दौरान भारत ने 2.13 करोड़ स्मार्टफोनस अमेरिका को बेच दिए। यानी अमेरिका के बाजार में भी भारत चीन से आगे निकलने वाला है। बहरहाल इसी कड़ी में तेल के बाजार में भी भारत ने बहुत बड़ा खेल कर दिया है।
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