Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian पहुंचे New York, UNGA में उठाएंगे क्षेत्रीय दमन का मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क जाते समय, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने क्षेत्रीय दमन के खिलाफ़ वैश्विक जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय शांति की वकालत करते हुए कड़े बयान दिए। वैश्विक एकजुटता की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा दुनिया के लोगों को इस क्षेत्र में हो रहे दमनकारी व्यवहार के बारे में पता होना चाहिए; 'भरोसा' (Trust) के नारे वाली इस सभा को दुनिया में भरोसा बहाल करना चाहिए और युद्ध व खून-खराबे को खत्म करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं से पहले क्षेत्र की खास शिकायतों पर रोशनी डालते हुए उन्होंने आगे कहा हम मिनाब और लामेर्द के बच्चों पर हो रहे ज़ुल्म की आवाज़ उठाएंगे।
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति मंगलवार सुबह इस राजनयिक मिशन पर रवाना हुए। उन्हें पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ़, सुप्रीम लीडर के कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी होज्जतोलइस्लाम वालमोस्लेमिन मोहसेन कोमी और कैबिनेट सदस्यों के एक समूह ने आधिकारिक विदाई दी।
रवाना होने से पहले अपने एजेंडे के बारे में विस्तार से बताते हुए राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान का पक्ष मज़बूती से रखेंगे। संयुक्त राष्ट्र में हम जो मुद्दे उठाएंगे, उनमें ईरानी राष्ट्र की दबी-कुचली स्थिति, हुए अपराध और पैदा हुए अविश्वास को ज़ाहिर करना शामिल है। हम कई बार बातचीत की मेज़ पर गए और समझौतों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन अफ़सोस की बात है कि पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे वादे पूरे नहीं किए गए और समझौतों को पैरों तले रौंद दिया गया।
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उनका बुधवार, 23 सितंबर को सुबह के सत्र के दौरान महासभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। तेहरान का पक्ष रखने के अलावा, वह वहां मौजूद राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और साथ ही अमेरिका में रहने वाले पढ़े-लिखे ईरानियों, अमेरिकी विशिष्ट लोगों और थिंक टैंक के साथ अलग-अलग बातचीत भी करेंगे।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची सोमवार को स्थानीय समयानुसार न्यूयॉर्क पहुँचे। IRNA के अनुसार, अपनी यात्रा शुरू करते समय पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्री अरागची ने ज़ोर दिया कि यह उच्च-स्तरीय बैठक इस बात पर चर्चा करने के लिए एक अहम मंच है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था में भरोसा कैसे कम हुआ है और इसे कैसे बहाल किया जा सकता है।
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विदेश मंत्री अरागची ने कहा, "यह स्वाभाविक है कि जो संगठन इन देशों के प्रभाव में हो, उस पर कोई भरोसा नहीं रह जाता। इसलिए, भरोसा बहाल करना एक अहम मुद्दा है, और यह दुनिया से इस बारे में बात करने का एक अच्छा मौका है कि संयुक्त राष्ट्र पर से भरोसा कैसे खत्म हुआ और इसे कैसे फिर से कायम किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करना प्रतिनिधिमंडल का सबसे मुख्य मकसद है। उन्होंने कहा, "यह दौरा अमेरिका और ज़ायोनी शासन द्वारा हमारे खिलाफ छेड़े गए अमानवीय युद्ध और उसके बाद हुई घटनाओं के बाद हो रहा है; असल में, हालात अभी भी युद्ध जैसे ही बने हुए हैं। और सबसे पहली बात, यह स्वाभाविक है कि हमारा सबसे अहम मकसद संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूद रहकर ईरान के लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है।
7 दिन में खोल देंगे होर्मुज, लेकिन...ईरान ने अमेरिका के सामने रख दी कौन सी शर्त! क्या ट्रंप होंगे राजी?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे और नाकेबंदी हटा ले, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए तैयार है। इस प्रस्ताव के ज़रिए ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की है। खबरों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचाया गया है। तेहरान की योजना है कि वह न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस पहल पर चर्चा करे। क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाक़ात की संभावना को खारिज कर दिया, लेकिन कहा कि "किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है, बशर्ते वॉशिंगटन गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखाए।
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ईरान चाहता है कि अमेरिका सैन्य अभियान रोके
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का असर एनर्जी मार्केट और ग्लोबल शिपिंग पर पड़ा है, खासकर उस समुद्री रास्ते पर जो रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। ईरान यह भी चाहता है कि अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते से जुड़ी अपनी सैन्य गतिविधियां रोक दे। इसके बदले में तेहरान का कहना है कि वह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को फिर से खोल देगा और बातचीत शुरू करेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों की वजह से कच्चे तेल के एक्सपोर्ट और होर्मुज से होने वाले समुद्री ट्रैफिक पर असर पड़ा है। तेहरान ने बातचीत फिर से शुरू करने के लिए पहले सात शर्तें रखी थीं, जिनमें बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को बहाल करना शामिल था।
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तेल की कीमतों में गिरावट
इसके अलावा, तेल की कीमतें $99 प्रति बैरल से नीचे आ गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऐसी खबरें आईं कि ईरान जल्द ही उस समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, जिससे ग्लोबल क्रूड सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत सेशन के उच्चतम स्तर से 3.5% से ज़्यादा गिर गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 2.25% की गिरावट आई। ईरान का यह प्रस्ताव कि वह उस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, इस शर्त पर है कि अमेरिका अपना मिलिट्री दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए कदम उठाए। यह नई पहल ऐसे समय में हुई है जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) के टूटने के बाद से मिलिट्री तनाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध तब शुरू हुआ जब फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर मिलकर हमले किए।
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