तालिबान के सफेद विमान ने मचाया तहलका, चौंके करोड़ों भारतीय!
अफगानिस्तान के काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक अजीब और विशाल सफेद एयरक्राफ्ट उतरा। इस सफेद विमान को देखकर पाकिस्तान में बवाल मच गया है क्योंकि इसके पीछे जो खेल है उसमें तालिबान, भारत और कुछ हद तक संयुक्त अरब अमीरात शामिल है। इस विमान की मालिक है संयुक्त अरब अमीरात की एक कंपनी। विमान का किराएदार यानी विमान को रेंट पर लेने वाली है अफगानिस्तान की सरकारी एयरलाइंस आरियाना अफगान और इस विमान का सबसे बड़ा मुनाफा भारत को होगा। भारत को परेशान करने के लिए ज्यादा समझदारी दिखाने वाले पाकिस्तान को अफगानिस्तान ने इस सफेद विमान से रौंद दिया है। यह है एक विशाल मालवाहक विमान जो मुख्य रूप से काबुल और दिल्ली के बीच उड़ान भरेगा। प्रति उड़ान यह विमान लगभग 17 मेट्रिक टन सामान लाने और ले जाने की क्षमता रखता है। यहां पर सबसे बड़ा खेल ले जाने शब्द में है।
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दरअसल पाकिस्तान लगातार इस कोशिश में है कि भारत अफगानिस्तान की मदद के लिए जो सामान भेजता है वो सामान किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान ना पहुंचे। क्योंकि मदद के इस सामान की वजह से अफगानिस्तान की भारत पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। अफगानिस्तान के लोग भारत के दीवाने हो गए हैं। अफगानिस्तान कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भारत पर निर्भर हो चुका है। इसके अलावा अफगानिस्तान के लोग आज पाकिस्तान पर थूक रहे हैं। पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान इस इलाके में सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। भारत के इसी सामान को रोकने के लिए पाकिस्तान अपनी हैसियत के हिसाब से मक्कारी करता आया है। आप जानते हैं कि पाकिस्तान ने भारत के लिए अपना एयर स्पेस बंद कर रखा है। भारत को बहुत ही लंबा रूट लेकर खाना, दवाई और बाकी जरूरी सामान अफगानिस्तान पहुंचाना पड़ता है। कूटनीति के लिए यह करना भी जरूरी है।
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लेकिन पाकिस्तान चाहता है कि अगर सामान काबुल पहुंचता है तो इस मानवता के काम में भी भारत को लंबा रूट लेना पड़े और इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़े। लेकिन यहीं पर अफगानिस्तान के इस विमान ने पूरा खेल पलट दिया। अब भारत को बड़ी मात्रा में कोई सामान अफगानिस्तान पहुंचाने के लिए लंबा रूट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि भारत अफगानिस्तान के इस विमान का इस्तेमाल कर सकता है। एक तरफ अफगानिस्तान इस विमान के जरिए भारत तक अपने ड्राई फ्रूट्स, फल, केसर, कालीन और औषधियां आराम से भारत पहुंचा सकता है और दूसरी तरफ वापसी में इसी विमान के अंदर भारत की मदद ले जा सकता है। लेकिन अब आपके मन में सवाल आएगा कि इस विमान को भी तो लंबा रूट लेना पड़ेगा। लेकिन सारा ट्विस्ट यहीं है। पाकिस्तान की एयर स्पेस में भारत के रजिस्टर्ड या भारत की कंपनियों द्वारा संचालित विमानों पर ही प्रतिबंध लगा है। लेकिन यह विमान तो अफगानिस्तान का है। अफगानिस्तान जब चाहे जितनी बार चाहे वो पाकिस्तान के ऊपर से उड़कर भारत आएगा। अपना सामान भारत तक पहुंचाएगा और भारत का सामान वापस अपने पास ले जाएगा। यह सारा खेल पाकिस्तान की एयर स्पेस से ही चलेगा। यह सारा सामान और मानवीय मदद पाकिस्तान की एयर स्पेस से ही होकर गुजरेगी।
Sri Lanka: जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने वाले बिल पर जनमत संग्रह की जरूरत नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने संविधान के प्रस्तावित 22वें संशोधन को लागू करने के लिए जनमत संग्रह कराने की जरूरत से इनकार किया है। संसद के अध्यक्ष जगत विक्रमरत्ने ने मंगलवार को सदन में यह जानकारी दी। विवादित 22वां संविधान संशोधन (22ए) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 67 वर्ष करने और अपील अदालत के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 63 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव रखता है।
इसमें अपील अदालत के न्यायाधीशों की संख्या 20 से बढ़ाकर 25 करने का भी प्रावधान है। संशोधन में उच्च न्यायालय, जिला अदालतों और मजिस्ट्रेट अदालतों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष करने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह संशोधन अगस्त में संसद में पेश किया गया था, जिसके बाद इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए 14 दिन की अवधि शुरू हुई थी।
संशोधन को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में 60 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और इसके लिए जनमत संग्रह की मंजूरी जरूरी है। उच्चतम न्यायालय ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।
अध्यक्ष विक्रमरत्ने ने अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘‘संविधान के अनुच्छेद 83 के प्रावधानों के तहत 22वें संविधान संशोधन विधेयक के प्रावधानों या इसके किसी भी हिस्से के लिए जनता की मंजूरी जनमत संग्रह के माध्यम से लेना जरूरी नहीं है।’’ यह फैसला विपक्षी दलों और श्रीलंका बार एसोसिएशन (बीएएसएल) के लिए झटका माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा और इसके लिए जनमत संग्रह जरूरी है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व वाली श्रीलंका की नेशनल पीपुल्स पावर सरकार के पास 225 सदस्यीय संसद में 159 सीटों के साथ दो-तिहाई बहुमत है।
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