'कुछ कुछ होता है’ की छोटी अंजलि ने 6 साल तक छुपाया अपना दर्द, सना सईद की दर्दभरी कहानी जानकर भर आएंगी आंखें
Sana Saeed Birthday: सुपरस्टार शाहरुख खान की आइकॉनिक फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ (Kuch Kuch Hota Hai) आज भी कई लोगों की फेवरेट फिल्मों में शामिल है. इस फिल्म की कहानी ही नहीं बल्कि इसके गाने और किरदारों ने दर्शकों को खूब दिल जीता. इन्हीं किरदारों में एक छोटी सी बच्ची अंजलि भी थी, जिसने अपनी नटखट शरारतों और मासूमियत से हर किसी का दिल जीत लिया था. इस किरदार को किसी और ने नहीं बल्कि एक्ट्रेस सना सईद (Sana Saeed) ने निभाया था. फिल्म के इतने साल बीत जाने के बाद भी सना को आज भी लोग प्यार से ‘छोटी अंजलि’ के नाम से याद करते हैं. आज सना सईद अपना 37वां जन्मदिन मना रही हैं. उनके जन्मदिन के मौके कुछ कुछ होता है कि अंजलि की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है. हालांकि, पर्दे पर हमेशा हंसती- मुस्कुराती नजर आने वाली सना की लाइफ में एक ऐसा दौर भी आया, जब वह अंदर से पूरी तरह टूट गई थीं. आइए इस बारे में जानते हैं.
ग्लैमर की दुनिया के बीच शुरू हुआ मुश्किल दौर
चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपनी पहचान बनाने के बाद सना सईद ने बड़े होने के बाद साल 2012 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में वापसी की. इस फिल्म में उनका अंदाज पहले से ग्लैमरस नजर आया था. फिल्म को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और लोगों ने उनके काम की तारीफ की. जिससे वह एक बार फिर चर्चा में आ गईं थीं. लेकिन इसी दौरान उनकी लाइफ में एक ऐसा दौर शुरू हुआ, जिसके बारे में लोगों को शायद ही पता हो.
दरअसल, सना पर फिल्म इंडस्ट्री में फिट और परफेक्ट दिखने का प्रेशन हो गया था. जिसके चलते वह एक सीरियस डिजीज शिकार हो गईं. जानकारी के मुताबिक, सना को बुलिमिया नाम के ईटिंग डिसऑर्डर का सामना करना पड़ा. बता दें कि यह एक तरह की ऐसी बीमारी होती है, जिसमें इंसान का ज्यादा खाना खाने के बाद वजन बढ़ने के डर से खाने को बाहर निकालने की कोशिश करता है. सना के लिए यह परेशानी धीरे-धीरे उनकी लाइफ का हिस्सा बन गई.
6 साल तक नहीं समझ पाईं बीमारी
सना की लाइफ का सबसे मुश्किल हिस्सा वो था, जब वह 6 साल तक इस परेशानी को झेलती रहीं. लेकिन उन्हें खुद नहीं पता था कि वह किस बीमारी से जूझ रही हैं. उन्हें इस बीमारी का नाम तक नहीं मालूम था. वह हर बार कुछ खाने के बाद गिल्ट महसूस करती थीं और खुद को दोष देने लगती थीं.
इस वजह से इसका उनकी मेंटल हेल्थ पर भी गहरा असर पड़ा. जिसके बाद वह अकेली रहने लगीं और अपनी परेशानी को भी किसी से शेयर करने से डरती थीं. उन्हें डर रहता था कि अगर लोगों को उनकी हालत के बारे में पता चला तो वे उनके बारे में क्या सोचेंगे. जब वह इस दौर से गुजर रही थीं. बाहर से देखने में सबकुछ नॉर्मल नजर आ रहा था लेकिन अंदर से वह लगातार एक परेशनियों का समाना करती रहीं.
किताब बनी सहारा
जब सना ने 6 साल तक बुलिमिया नाम की बीमारी से जूझा तो तब उनकी लाइफ में एक बड़ा मोड़ आया. एक दिन उनके हाथ ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ी एक किताब लगी. जब उन्होंने उसे पढ़ना शुरू किया तो उसमें बताए गए कई सिम्टम्स वैसे ही थे, जिससे वह सालों से जूझ रही थीं. तभी सना को पहली बार समझ आया कि उनकी ये परेशानी कोई कमजोरी नहीं है बल्कि एक तरह की समस्या है.
जब उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला तो उन्हें एहसास हुआ कि इससे बाहर निकलना संभव है और इसके बाद उन्होंने लाइफ को बदलने और खुद को ठीक करने का फैसला किया. सना के लिए इस बीमारी से पीछा छुड़ाना बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. उन्होंने अपने लाइफस्टाइल को बदला और थेरेपी की मदद ली. उन्हें इस बीमारी से पूरी तरह ठीक होने करीब 4 साल का टाइम लगा.
लॉस एंजिल्स में गुजार रहीं पतिं संग लाइफ
बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर सना ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में अपनी लाइफ को नए सिरे से जीना शुरू किया. आज वह वहां अपने पति साबा वैगनर के साथ मिलकर एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी चला रही हैं. इसके अलावा वह लॉस एंजिल्स में कई इंडिपेंडेंट प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हैं और फिल्मों की स्क्रिप्ट पर भी काम कर रही हैं.
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भारत में रूसी तेल की मांग आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम, डिस्काउंट नहीं: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में रूसी तेल की मांग डिस्काउंट नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत रूस से औसत 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कि वित्त वर्ष 23-26 में औसत 46 मिलियन बैरल कच्चे तेल से अधिक है।
एक्सिस बैंक की इकोनॉमिक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से 298 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया है।
हालांकि मार्च 2022 से जून 2023 के बीच भारत के आयातित कच्चे तेल में रूस की हिस्सेदारी शून्य से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई (जिसकी वजह शायद डिस्काउंट थी), लेकिन मार्च 2026 से हर दिन अतिरिक्त 1 मिलियन बैरल आयात को सिर्फ कीमतों में बदलाव से नहीं समझाया जा सकता।
रिपोर्ट में कहा गया, “पहला, 2023 से पश्चिम एशिया के मुकाबले रूसी कच्चे तेल पर औसत डिस्काउंट 3-5 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा है। दूसरा, 7 डॉलर प्रति बैरल तक के प्रीमियम के बावजूद भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी है। अगर भारत स्पॉट मार्केट से ये अतिरिक्त 60-80 मिलियन बैरल खरीदता, तो तेल की कीमतें आज की तुलना में ज्यादा होतीं।”
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के अनुभव से पता चलता है कि बहुत अधिक टैरिफ लगाने की धमकी, असल में टैरिफ लगाने की तुलना में व्यापार बातचीत में ज्यादा काम की होती है, और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर अमेरिका में खुदरा महंगाई पर पड़ता है।
ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण रिपब्लिकन पहले से ही मध्यावधि चुनावों में मुश्किल स्थिति में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “कांग्रेस का समर्थन इस टैरिफ की धमकी को कानूनी रूप से मजबूत बनाता है, जबकि अतिरिक्त क्षमता पर सेक्शन 301 के तहत लंबित नतीजों से टैरिफ में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। भारत के लिए, एक काम का आधार वह 18 प्रतिशत की हेडलाइन दर है जिस पर फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईईईपीए अधिकार के तहत टैरिफ को अमान्य घोषित किए जाने से पहले सहमति बनी थी।”
जब इसे लागू किया जाता है, तो छूट के कारण प्रभावी दर भी हेडलाइन दर से कम होती है।
इस वित्त वर्ष (अब तक) में भारत का निर्यात साल-दर-साल 19 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो/पार्ट्स, धातु और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की मुख्य भूमिका रही है, साथ ही अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी सुधार हुआ है।
--आईएएनएस
एबीएस
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