Asian Games में Pakistan Women ने Bangladesh को 31 रन से हराकर जीता Bronze Medal
मंगलवार को निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले गए तीसरे स्थान के लिए प्ले-ऑफ मैच में पाकिस्तान की महिला टीम ने बांग्लादेश को 31 रनों से हरा दिया। 146 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 114/7 रन ही बना सकी और इस तरह एशियाई खेलों के इस संस्करण में अपना पहला मेडल जीतने से चूक गई। पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला करते हुए, पाकिस्तान ने शवाल ज़ुल्फ़िकार और गुल फ़िरोज़ा के साथ अच्छी शुरुआत की। इस जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 46 रन जोड़े, जिसके बाद नाहिदा अख्तर ने फ़िरोज़ा को आउट कर दिया। फ़िरोज़ा ने छह चौकों की मदद से 23 गेंदों में 31 रन बनाए।
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सायरा ज़बीन क्रीज़ पर आईं, लेकिन ज़्यादा देर तक टिक नहीं सकीं और सिर्फ़ पाँच रन बनाकर आउट हो गईं। ज़बीन के बाद ज़ुल्फ़िकार (27 गेंदों में 17 रन) और एमान फ़ातिमा (0) भी आईं और अगले कुछ ओवरों में ही पवेलियन लौट गईं। आयशा ज़फ़र ने तेज़ी से नौ रन बनाए, लेकिन संजीदा अख्तर मेघला ने उन्हें नौ रन पर आउट कर दिया। जब पाकिस्तान का स्कोर 67/5 था और उनकी पारी में आठ ओवर बाकी थे, तब कप्तान फ़ातिमा सना क्रीज़ पर आलिया रियाज़ के साथ जुड़ीं।
दोनों ने छठे विकेट के लिए 67 रन जोड़े, जिसमें रियाज़ ने दो छक्कों और एक चौके की मदद से 22 गेंदों में 25 रन बनाए। सना ने अपनी 45 रन की पारी में तीन छक्के और इतने ही चौके लगाए। पाकिस्तान की पारी की आखिरी गेंद पर वह आउट हो गईं और टीम का स्कोर 145/8 रहा। नादिदा अख्तर, रितु मोनी और शोर्ना अख्तर ने दो-दो विकेट लिए, जबकि संजीदा अख्तर मेघला ने एक विकेट लिया। 146 रन के आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए, बांग्लादेश की बल्लेबाजों दिलारा अख्तर और जुएरिया फिरदौस ने अच्छी शुरुआत की।
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उम्म-ए-हानी ने पाकिस्तान को पहली सफलता दिलाई जब उन्होंने तीसरे ओवर में फिरदौस को आउट किया। अगले ओवर में तस्मिया रुबाब ने दिलारा अख्तर (आठ गेंदों पर 12 रन) को आउट किया। इसके बाद अगले ओवर में शोभना मोस्तरी भी आउट हो गईं और सिर्फ़ दो रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। कप्तान निगार सुल्ताना जोटी और शर्मिन अख्तर ने चौथे विकेट के लिए 47 रन जोड़े और बांग्लादेश की पारी को संभाला। लेकिन एक तरफ से ज़रूरी रन-रेट का दबाव बढ़ता गया और इसका नतीजा यह हुआ कि बांग्लादेशी कप्तान आउट हो गईं; उन्हें आयशा ज़फ़र ने LBW आउट किया। उन्होंने तीन चौकों की मदद से 30 गेंदों में 25 रन बनाए। इसके बाद, एक तरफ से विकेट गिरते रहे और ज़रूरी रन-रेट बढ़ता गया। शर्मिन अख्तर (45 गेंदों में नाबाद 46 रन) और नाहिदा अख्तर (छह गेंदों में नाबाद 10 रन) नॉट आउट रहीं; 20 ओवर पूरे होने तक बांग्लादेश की टीम पाकिस्तान के स्कोर से 31 रन पीछे थी।
Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी व्रत से मिलती है सभी पापों से मुक्ति
आज परिवर्तिनी एकादशी है, परिवर्तिनी एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है। परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में परिवर्तिनी एकादशी विशेष है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में सोते हुए अपनी करवट बदलते हैं। इस एकादशी पर कुछ विशेष उपाय करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तो आइए हम आपको परिवर्तिनी एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
जानें परिवर्तिनी एकादशी के बारे में
पंडितों के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी आती हैं और हर महीने शुक्ल व कृष्ण पक्ष में एक-एक एकादशी पड़ती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है। भाद्रपद मास की परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 22 सितंबर दिन मंगलवार को परिवर्तनी एकादशी तिथि का व्रत किया जाएगा, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर विधि विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है। पुराणों में बताया गया है कि परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने से 100 यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में विश्राम करते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
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जानें परिवर्तिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे आरंभ होगी और 22 सितंबर की रात लगभग 9:43 बजे समाप्त होगी।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत में करें इन नियमों का पालन
पंडितों के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें। एकादशी पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करें। बिना तुलसी के विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें। व्रत के दिन क्रोध न करें और न ही किसी के लिए अपने मन में बुरे विचार लेकर आएं। एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित होता है। तो इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही जल चढ़ाएं। एकादशी के दिन तामसिक चीजों का सेवन न करें। (लहसुन-प्याज,मांसाहार, शराब) एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून काटने की मनाही होती है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत के पारण का समय
- एकादशी तिथि प्रारम्भ - सितंबर 21, 2026 को 08:00 पी एम बजे
- एकादशी तिथि समाप्त - सितंबर 22, 2026 को 09:43 पी एम बजे
- परिवर्तिनी एकादशी पारण तिथि- 23 सितंबर 2026
- पारण (व्रत खोलने का)समय - 06:27 ए एम से 08:53 ए एम
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 10:50 पी एम
परिवर्तिनी एकादशी के दिन विष्णु जी को लगाएं इन चीजों का भोग
पंडितों के अनुसार जगत के पालनहार भगवान विष्णु को पंचामृत अत्यंत प्रिय है इसलिए इसका भोग जरूर लगाएं। दूध, दही, चीनी, शहर और घी को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। एकादशी के दिन विष्णु जी को पंचमेवा भी जरूर चढ़ाएं। पंचमेवा में बादाम, काजू, छुआरा, किशमिश और मखाना आता है। श्री हरि विष्णु को पीला रंग बेहद पसंद है तो एकादशी के दिन बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, पीला पेड़ा या केसरिया रंग की खीर भी अर्पित करें। एकादशी के दिन चावल बनाना वर्जित है तो आप खीर साबूदाना की बना सकते हैं।परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मौसमी फल जैसे- केला, सेब, अनार आदि फलों का भी भोग लगाएं।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक
शास्त्रों में परिवर्तिनी एकादशी के विषय में राजा मांधाता और अनावृष्टि की कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार त्रेतायुग में मांधाता नाम के एक प्रतापी राजा थे। उनके राज्य में लगातार तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई, जिससे भयंकर सूखा पड़ गया और प्रजा त्रस्त हो गई। कारण जानने के लिए राजा जब वन गए, तो ऋषियों ने बताया कि राज्य में एक शूद्र द्वारा तपस्या करने के कारण यह दोष उत्पन्न हुआ है। राजा मांधाता ने निर्दोष और तपस्यारत व्यक्ति को दंड देने से मना कर दिया और इसका धार्मिक उपाय पूछा। तब ऋषियों ने उन्हें परिवार सहित भाद्रपद शुक्ल एकादशी (परिवर्तिनी एकादशी) का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से यह व्रत किया, जिससे राज्य में मूसलाधार बारिश हुई, खेत हरे-भरा हो गए और प्रजा फिर से सुखी हो गई।
परिवर्तिनी एकादशी में दशमी से पहलें रखें ये सावधानी
शास्त्रों के अनुसार नारद पुराण में एकादशी व्रत के नियम अनुसार तिथि की शुरुआत होने के बाद इनमें मसूर आदि दालें, दूसरे के घर भोजन, और रात्रि भोजन से बचने की बात कही गई है। इसलिए अगर आप शास्त्रीय नियमों के अनुसार व्रत करना चाहते हैं तो 21 सितंबर को दिन में ही सात्त्विक और हल्का भोजन कर लेना बेहतर माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत में ये खाएं, रहेंगे सेहतमंद
पंडितों के अनुसार एकादशी व्रत को लेकर जलाहार, फलाहार, क्षीरभोजी और नक्तभोजी जैसी अलग-अलग व्रत पद्धतियां बताई गई है। आप अपनी क्षमता अनुसार ये व्रत कर सकते हैं। साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंद, आलू और मूंगफली जैसी चीजें एकादशी व्रत में खा सकते हैं। एकादशी व्रत में सिर्फ अन्न का त्याग ही नहीं बल्कि झूठ, छल-कपट, क्रोध और कठोर वाणी से बचने की सलाह भी दी जाती है। व्रत के दौरान संयम रखें, इंद्रियों पर काबू रखना भी जरुरी है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भक्तों को श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित कर पूजा करते हैं। एकादशी का व्रत मन और इंद्रियों पर संयम रखने तथा भगवान के प्रति भक्ति बढ़ाने का अवसर माना जाता है। परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वामन स्वरूप और राजा बलि से जुड़ी कथा के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं।
- प्रज्ञा पाण्डेय
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