'धार्मिक वजह से वंदे मातरम न गाना अपराध नहीं':सुप्रीम कोर्ट बोला- आपराधिक कार्रवाई नहीं हो; 47 दिन पहले बने कानून पर केंद्र से जवाब मांगा
वंदे मातरम से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, “धार्मिक कारणों से राष्ट्रगीत न गाने वाले व्यक्ति को आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए।” कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा। उम्मीद जताई कि वंदे मातरम् से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो एमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा। यह सुनवाई गायक टीएम कृष्णा की ओर से वंदे मातरम् से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर हुई। मामला उस कानून से जुड़ा है, जिसमें वंदे मातरम् के गायन को रोकने या गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय बनाया गया है। वंदे मातरम् को इस कानून के दायरे में लाने वाला संशोधन संसद से जुलाई में पास हुआ था। 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा ने बिल पास किया था। इसके बाद 6 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून बना। बिजो एमैनुअल केस: 3 छात्रों ने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया 1986 के बिजो एमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता। 2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' बनाया। इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' के पूरे 6 छंद गाए गए। केंद्र का आदेश- पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन होगा गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इसमें दोनों के सही बोल, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया था। निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो पहले राज्य गीत फिर वंदे मातरम और अंत में जन गण मन रहेगा।
बंगाल में मछुआरों ने हाथी के डूबते बच्चे को बचाया,VIDEO:हथिनी मां ने थपकी दी, मानो गलती के लिए फटकार रही हो, फिर दुलारा
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में मछुआरों ने तेज बहाव में बह रहे हाथी के एक नवजात बच्चे की जान बचाई। गजोल्डोबा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद हाथियों का झुंड तीस्ता नदी पार कर रहा था, तभी तेज धारा में बच्चा झुंड से अलग हो गया। तीस्ता नदी में मछली पकड़ रहे पांच मछुआरों ने बच्चे को पानी में संघर्ष करते देखा। उन्होंने दो नावों से करीब 4 किलोमीटर तक उसका पीछा किया। इसके बाद तीन मछुआरे पानी में उतरे और बच्चे को नाव पर खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चे को वन विभाग को सौंप दिया गया। उसे तुरंत इलाज दिया गया और उसकी मां की तलाश शुरू की गई। करीब दो घंटे की कोशिश के बाद वन विभाग, स्थानीय लोगों और मछुआरों ने बच्चे को उसकी मां से मिला दिया। मां हथिनी बच्चे के पास पहुंची और उसे थपकी दी। इसके बाद उसने बच्चे को दुलारा और दूध पिलाया। वन विभाग के अधिकारियों ने मछुआरों की समय पर की गई मदद की सराहना की। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मामलों में बच्चे को जल्द उसकी मां से मिलाना बेहद जरूरी होता है।
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