सपा प्रमुख Akhilesh Yadav के चवन्नी वाले तंज पर बोले RLD नेता KC Tyagi, हम 500 रुपये के नोट हैं
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले तंज पर पलटवार करते हुए राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने सोमवार को कहा, ‘‘हम चवन्नी नहीं हैं, बल्कि महात्मा गांधी की तस्वीर वाला 500 रुपये का नोट हैं।’’ त्यागी अखिलेश यादव की अगस्त में की गई उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी और रालद प्रमुख जयंत चौधरी को ‘चवन्नी’ कहा था। यह टिप्पणी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान चौधरी की उस टिप्पणी के संदर्भ में थी, जब उन्होंने सपा के सहयोगी रहते हुए भाजपा के प्रस्तावों को ठुकरा दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह कोई ऐसी ‘चवन्नी’ नहीं हैं, जिसे आसानी से ‘पलटा’ जा सके।
बाद में चौधरी ने सपा से गठबंधन समाप्त कर दिया और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गए। वर्तमान में वह केंद्रीय मंत्री हैं। यह तीखी बयानबाजी ऐसे समय में हुई है जब राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं।
त्यागी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव पूर्व प्रधानमंत्री और जयंत चौधरी के दादा चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक प्रभाव को समझते थे लेकिन अगली पीढ़ी इसे याद नहीं रख पाई। उन्होंने हाथरस के मुरसान में पार्टी की ‘स्वाभिमान सम्मान पदयात्रा एवं समरसता अभियान’ की शुरुआत के अवसर पर यह बात कही। रालोद में शामिल होने के बाद ब्रज क्षेत्र में यह त्यागी का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था।
‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए रालोद संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष त्यागी ने कहा, ‘‘ हमें यह साबित करना है कि हम ‘चवन्नी’ नहीं, बल्कि 500 रुपये का नोट हैं।’’ त्यागी ने लोगों से अपील की कि अगर उन्हें कभी लगे कि ‘कमल’ (भाजपा का चुनाव चिह्न) मुरझा रहा है, तो वे ‘नल’ (रालोद का चुनाव चिह्न) से पानी लेकर उसे सींचें, ताकि वह फिर खिल सके।
क्या UNSC में भारत की दावेदारी को मिल रही है रफ्तार? Visegrád Group (V4) देशों ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट का किया समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के इतर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल करते हुए भारत को यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए बड़ा समर्थन मिला है। मध्य यूरोप के चार देशों के समूह विसेग्राद 4 (V4)- पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य- ने UNSC में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। इस बारे में स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य भारत की दावेदारी का समर्थन करने में एकजुट हैं।
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पहली विसेग्राद ग्रुप (V4) + भारत विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा, "V4 देशों के तौर पर हम सभी इस बात से सहमत हैं कि 'ग्लोबल साउथ' का हिस्सा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती हुई महाशक्ति होने के नाते, भारत को UN सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।"
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जुराज ब्लानार का यह बयान मध्य यूरोप के चार देशों की ओर से स्पष्ट समर्थन दिखाता है, क्योंकि भारत UN की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
भारत और V4 देश सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली V4-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक को "एक नया ऐतिहासिक मौका" बताया। जिन देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई, उन्होंने अपने विदेश मंत्रियों की सालाना बैठकें करने और एक सालाना बिजनेस फोरम बनाने पर भी सहमति व्यक्त की।
इस संबंध में, जयशंकर ने कहा कि भारत और V4 देश तकनीक और इनोवेशन में बेहतर सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे और साथ ही मौजूदा रक्षा संबंधों को मजबूत करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, "रक्षा के क्षेत्र में V4 देशों के साथ हमारा इतिहास बहुत मजबूत रहा है। हम उस रिकॉर्ड और सहयोग को नया रूप देना चाहते हैं और आगे बढ़ाना चाहते हैं।"
UNSC में भारत की स्थायी सीट क्यों महत्वपूर्ण है?
UNSC में भारत की स्थायी सीट के लिए तर्क सीधा है - सुरक्षा परिषद के गठन के बाद से दुनिया बदल गई है, लेकिन इसकी स्थायी सदस्यता में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके अलावा, 1945 में एशिया और अफ्रीका का बड़ा हिस्सा अभी भी औपनिवेशिक शासन के अधीन था। कई देश जिनकी आबादी, अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक प्रभाव अब बहुत अधिक है, वे या तो स्वतंत्र नहीं थे या संप्रभु देशों के रूप में अस्तित्व में नहीं थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत आठ बार सुरक्षा परिषद का चुना हुआ सदस्य रहा है, जिसमें हाल ही में 2021 और 2022 का कार्यकाल शामिल है। यह मामला कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि भारत की आबादी, आर्थिक ताकत, UN शांति-रक्षा अभियानों में योगदान और बढ़ता हुआ कूटनीतिक प्रभाव। इसके अलावा, भारत ने आतंकवाद-विरोधी प्रयासों, विकास, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति पर होने वाली चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभाई है। नई दिल्ली के लिए, सुरक्षा परिषद में सुधार का मतलब सिर्फ़ भारत को स्थायी सदस्यता दिलाना नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली बहुपक्षीय सुरक्षा संस्था के ढांचे में बदलाव करना है, ताकि वह आज की दुनिया की सच्चाई को बेहतर ढंग से दिखा सके।
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