महाराष्ट्र में UCC पर बढ़ा विवाद? जस्टिस आरसी चव्हाण ने पैनल से दिया इस्तीफा, फीडबैक प्रक्रिया पर जताई आपत्ति
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) समिति से जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने फीडबैक प्रक्रिया को लेकर जताई आपत्ति. जानें क्या है पूरा विवाद.
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Shiv puja niyam: पूजा में केवड़ा का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता भगवान शिव को? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा
Kewda phool Shiv puja niyam: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान भगवान को अलग-अलग तरह के फूल अर्पित करने की परंपरा है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में केवड़ा के फूल का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसकी वजह से आज भी शिवलिंग पर केवड़ा अर्पित नहीं किया जाता।
भगवान ब्रह्मा और विष्णु के विवाद से जुड़ी है कथा
धार्मिक ग्रंथों में एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद हुआ कि दोनों में से श्रेष्ठ कौन है। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक विशाल ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दोनों देवताओं से कहा कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का आदि (आरंभ) या अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा।
भगवान विष्णु वराह रूप धारण कर नीचे की ओर गए, जबकि भगवान ब्रह्मा हंस का रूप लेकर ऊपर की ओर उड़ चले। दोनों देवता काफी खोजबीन के बाद भी ज्योतिर्लिंग का आदि-अंत नहीं ढूंढ पाए। भगवान विष्णु ने सच्चाई स्वीकार करते हुए हार मान ली, लेकिन भगवान ब्रह्मा ने असत्य का सहारा लिया।
केवड़े के झूठे साक्ष्य ने बढ़ाई मुश्किल
कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने रास्ते में उन्हें मिले केवड़े के फूल से यह झूठी गवाही दिलवाई कि उसने स्वयं ज्योतिर्लिंग के शिखर को देखा है। केवड़े के इस झूठे साक्ष्य के चलते भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान ब्रह्मा को यह श्राप दिया कि उनकी पृथ्वी पर कहीं पूजा नहीं होगी, वहीं केवड़े को भी यह श्राप मिला कि वह कभी भी भगवान शिव की पूजा में अर्पित नहीं किया जाएगा।
इसी वजह से आज भी वर्जित है केवड़ा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पौराणिक घटना के बाद से केवड़े के फूल को भगवान शिव की पूजा में अशुभ माना जाने लगा। यही कारण है कि आज भी शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा के दौरान श्रद्धालु केवड़े के फूल का इस्तेमाल करने से पूरी तरह परहेज करते हैं।
किन देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है केवड़ा?
हालांकि धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया गया है कि केवड़े का फूल पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता, बल्कि इसे देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा में अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि केवड़े की सुगंध देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इसी वजह से इसे धन-समृद्धि से जोड़कर भी देखा जाता है।
पूजा में फूलों के चयन का महत्व
इस कथा से यह भी शिक्षा मिलती है कि किसी भी देवता की पूजा में उन्हीं फूलों और सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए, जो शास्त्रों में उनके लिए निर्धारित बताई गई हैं। मान्यता है कि गलत सामग्री अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, इसी वजह से हर देवता से जुड़े इन नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
आज भी सावधानी से पालन किया जाता है यह नियम
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन भगवान शिव की पूजा में केवड़ा न चढ़ाने का यह नियम आज भी उतनी ही सावधानी से निभाया जाता है। आज भी शिव मंदिरों में पुजारी और श्रद्धालु इस पौराणिक मान्यता का पूरा सम्मान करते हुए पूजा सामग्री का चयन करते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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