आज नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल के सेनापति काल भैरव, मंदिर में की गई विशेष सजावट
आज डोल ग्यारस है, जिसे अन्य आने वाली एकादशी के मुकाबले महत्वपूर्ण माना गया है। इस मौके पर विशेष पूजा पाठ और दान करने का महत्व है। उज्जैन के निवासियों के लिए यह दिन और भी खास है। ऐसा इसलिए क्योंकि डोल ग्यारस के दिन बाबा महाकाल के सेनापति भगवान काल भैरव की सवारी निकाली जाती है।
काल भैरव का मंदिर उज्जैन के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां विराजित बाबा भैरव की प्रतिमा मदिरापान करती है। यही इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है क्योंकि आज तक वैज्ञानिक भी ये पता नहीं कर पाए कि आखिरकार ये मदिरा कहा जाती है। आज भैरव बाबा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए नगर भ्रमण करने के लिए निकलेंगे।
आज काल भैरव की सवारी
वर्षों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक आज एक बार फिर बाबा भैरव नगर भ्रमण करेंगे। राजसी ठाठ बाट के साथ शाम 4 बजे मंदिर से सवारी रवाना होगी। शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए ये सवारी 7.30 दोबारा मंदिर पहुंचेगी। इस दौरान पूरे मार्ग में भक्त बाबा का स्वागत और दर्शन करेंगे।
राजसी ठाठ बाट से निकलेंगे बाबा
शाम 4 बजे निकलने वाली सवारी से पहले कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा पालकी की पूजा करेंगे। रजत मुखारविंद और चरण पादुकाओं के पूजन के बाद सशस्त्र बल बाबा भैरव को गार्ड ऑफ ऑनर देगा। इसके बाद सवारी का सिलसिला शुरू होगा। सवारी में सशस्त्र पुलिस बल, बैंड, हाथी घोड़े, अखाड़े और धार्मिक झांकियां शामिल होंगे।
ये रहेगा मार्ग
ये सवारी मंदिर से शुरू होकर नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणक चौक, महेंद्र मार्ग होते हुए केंद्रीय जेल तिराहा जाती है। यहां जेल अधीक्षक द्वारा भगवान की पूजन करने के बाद सवारी सिद्धवट जाती है। यहां वैकुंठ द्वार पर पुजारी शिप्रा जल से बाबा काल भैरव की पूजा करते हैं। इसके बाद सवारी ब्रिजपुरा से जेल तिराहा होते हुए 7.30 बजे वापस मंदिर पहुंचती है।
सिंधिया राजवंश से आएगी शाही पगड़ी
काल भैरव की सवारी निकलने से पहले पूजा के दौरान बाबा को शाही पगड़ी पहनाई जाएगी। ग्वालियर के सिंधिया राजवंश से विशेष पगड़ी भेजी जाएगी। कलेक्टर इसे बाबा को धारण करवाएंगे। उसके पश्चात ही सवारी निकाली जाएगी।
मंदिर में चल रही तैयारी
बाबा काल भैरव की सवारी के लिए मंदिर में विशेष तैयारी की जा रही है। गर्भगृह को खूबसूरत फूलों से सजाया जा रहा है। इसके अलावा पूरे मंदिर परिसर में हर तरफ फूलों की माला लगाई जा रही है। भगवान का खूबसूरत श्रृंगार भी किया गया है। भक्तों की लाइन वाले डोम को भी फूलों की लड़ से सजाया गया है।
23 सितंबर को इंदौर में ‘नो यूपीआई डे’, मर्चेंट लेन-देन पर चार्ज के खिलाफ व्यापारियों का हल्लाबोल
UPI पर बड़े मर्चेंट लेन-देन पर जो नया चार्ज लगाने की तैयारी हो रही है, उसके विरोध में व्यापारी अब लामबंद हो रहे हैं। दरअसल, इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का ऐलान किया है। इसके लिए शहर में प्रचार अभियान काफी तेज कर दिया गया है। आपको बता दें कि इस दिन व्यापारी विरोध जताने के लिए कोई भी डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे।
10 लाख लोगों तक पहुंचने का बड़ा लक्ष्य
अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स की इस अपील को इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन का पूरा साथ मिला है। एसोसिएशन ने 10 लाख लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का एक बड़ा टारगेट सेट किया है। इसके लिए बाजारों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और आज से डिजिटल अभियान भी शुरू हो गया है। व्यापारी सोशल मीडिया और कॉल सेंटर के जरिए दुकानदारों और ग्राहकों से सीधा संपर्क साध रहे हैं।
मुनाफा कम होने और लागत बढ़ने का डर
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि उनका यह अभियान UPI के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। दरअसल, उन्हें डर है कि बड़े पेमेंट्स पर मर्चेंट चार्ज लगने से व्यापारियों की लागत बेवजह बढ़ जाएगी। खासकर उन छोटे खुदरा दुकानदारों को ज्यादा नुकसान होगा, जिनका मार्जिन पहले से ही बहुत कम होता है। इसलिए व्यापारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी यह वाजिब चिंता सरकार के सामने रखना चाहते हैं।
23 सितंबर को रहेगा शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध
आपको बता दें कि 23 सितंबर का यह ‘नो यूपीआई डे’ पूरी तरह से एक शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध रहेगा। व्यापारियों से अपील की गई है कि वे इस दिन सिर्फ कैश में काम करें और ग्राहकों को प्यार से अपनी परेशानी समझाएं। व्यापारियों की बस इतनी सी मांग है कि सरकार डिजिटल भुगतान का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि मर्चेंट चार्ज और रिफंड जैसी उलझनों को पूरी तरह स्पष्ट करे।
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