मिशन शक्ति केंद्रों में न्यूनतम सेवा मानक तय होंगे : DGP Rajiv Krishna
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने शुक्रवार को कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों के लिए निश्चित न्यूनतम सेवा मानक तय किए जाने की जरूरत है, ताकि राज्य के सभी पुलिस थानों में नागरिकों को एक जैसी और गुणवत्तापूर्ण सहायता मिल सके।
डीजीपी बरेली रेंज द्वारा ऑनलाइन के माध्यम से आयोजित ‘मिशन शक्ति कौशल विकास’ कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला बरेली के जीआईसी सभागार में आयोजित की गई, जिसमें बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता तथा परिवार परामर्श केंद्रों के प्रभारी शामिल हुए।
पुलिस की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कृष्णा ने कहा, “प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र के लिए न्यूनतम सेवा मानक निर्धारित किए जाएंगे, ताकि नागरिकों को राज्य के किसी भी पुलिस थाने में समान और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।” उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों को महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए एक विश्वसनीय और पहचान योग्य “ब्रांड” के रूप में उभरना चाहिए।
'Mule' Accounts के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन में बैंक के पूर्व अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों से अर्जित 1,621 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के लेन-देन के मकसद से ‘म्यूल’ खाते खोलने के आरोप में राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व शाखा प्रमुखों तथा अन्य लोगों के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
एजेंसी ने अपनी शुरुआती जांच के आधार पर कार्रवाई की है। इस जांच में श्रीगंगानगर जिले में बैंक की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शाखा में 13 और जिले की मुख्य शाखा में चार ऐसे खाते सामने आए, जिनके जरिए साइबर अपराध और अन्य धोखाधड़ी से हासिल 1,621 करोड़ रुपये की अवैध रकम का लेन-देन हुआ।
एजेंसी ने इस मामले में बैंक की मुख्य शाखा के पूर्व मुख्य प्रबंधक और प्रमुख अमन आनंद तथा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शाखा के प्रमुख विकास वाधवा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके अलावा, खाते खुलवाने में मदद करने वाली कंपनियों और व्यक्तियों सहित कई अन्य संस्थाओं को भी आरोपी बनाया गया है।
‘म्यूल’ खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिसका इस्तेमाल अपराधी, खाताधारक की जानकारी से या जानकारी के बगैर, अवैध धन प्राप्त करने, धन अंतरित करने या उसे वैध बनाने के लिए करते हैं।
एजेंसी ने प्राथमिकी में आरोप लगाया, ‘‘फर्जी कंपनियों के नाम पर इन चालू खातों को खोलने में सुविधा प्रदान करने के लिए बैंक अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से स्थल का दौरा करने के बाद रिपोर्ट तैयार की और व्यवसाय किए जाने का झूठा सत्यापन किया था।’’
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि जिन 17 कंपनी के नाम पर ये चालू खाते खोले गए थे, वे सभी वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थीं। इन कंपनी को केवल जाली और फर्जी दस्तावेजों के सहारे इन खातों को खोलने और लेन-देन करने के लिए बनाया गया था।
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