फिजिकल हेल्थ- लीकी गट क्या है:क्यों कमजोर होता आंतों का सुरक्षा बैरियर, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और जरूरी सावधानियां
हमारी आंतें सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करतीं। ये खाने से जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाती हैं और कई हानिकारक बैक्टीरिया व टॉक्सिन्स को ब्लड में जाने से रोकती भी हैं। इसके लिए आंतों की अंदरूनी परत एक फिल्टर की तरह काम करती है। अगर यह प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर पड़ जाए, तो कुछ टॉक्सिन्स आंतों के जरिए ब्लड में भी पहुंच सकते हैं। इस कंडीशन को ‘लीकी गट’ कहते हैं। सोशल मीडिया पर आजकल इसकी खूब चर्चा है। गैस, पेट फूलना, कब्ज, दस्त, फूड इंटॉलरेंस और थकान जैसे कई लक्षणों को इससे जोड़ दिया जाता है। लेकिन क्या हर ऐसे लक्षण का मतलब लीकी गट है? इसे समझना जरूरी है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ‘ में लीकी गट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. सुकृत सिंह सेठी, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांटेशन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- लीकी गट क्या होता है? जवाब- इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए- उदाहरण से समझें- कल्पना कीजिए कि घर की जालीदार खिड़की में छोटे-छोटे छेद हैं। इस जाली से हवा तो अंदर आ सकती है, लेकिन अगर छेद बड़े हो जाएं तो धूल-मिट्टी भी अंदर आने लगेगी। इसी तरह लीकी गट में आंत के बैरियर यानी प्रोटेक्टिव-लेयर की पकड़ कमजोर हो जाती है। सवाल- शरीर की फंक्शनिंग में हमारी आंतों का क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- आंत के 4 बड़े काम ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या लीकी गट कोई बीमारी है? जवाब- लीकी गट को अपने आप में एक बीमारी मानना सही नहीं है। आसान भाषा में इसे आंत की दीवार की पारगम्यता बढ़ना कहा जा सकता है। यानी आंत की सुरक्षा-परत सामान्य से ज्यादा चीजों को पार जाने दे सकती है। आंत की दीवार पूरी तरह बंद नहीं होती। उसमें बहुत बारीक रास्ते होते हैं, जिनसे जरूरी पोषक तत्व शरीर में पहुंचते हैं। समस्या तब होती है, जब यह बैरियर जरूरत से ज्यादा पारगम्य हो जाए। सवाल- क्या लीकी गट होने पर अन्य बीमारियां हो सकती हैं? जवाब- यह कहना सही नहीं होगा कि लीकी गट होने से सीधे कई दूसरी बीमारियां हो जाती हैं। कई मामलों में यह बीमारी का कारण होने की बजाय बीमारी का परिणाम भी हो सकता है। लीकी गट से जुड़ी सभी संभावित बीमारियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- लीकी गट के लक्षण क्या हैं? जवाब- लीकी गट सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में पाचन से जुड़ी समस्याएं, थकान और स्किन डिजीज शामिल हैं। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए– सवाल- क्या हर व्यक्ति में ऊपर दिए लक्षण दिखने का मतलब लीकी गट होता है? जवाब- नहीं, गैस, पेट फूलना, कब्ज या दस्त जैसे लक्षण बहुत सामान्य हैं। इनके पीछे कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि– सवाल- लीकी गट क्यों होता है? जवाब- इसका कोई एक कारण नहीं है। आंत का सुरक्षा बैरियर कई चीजों से प्रभावित हो सकता है। सभी कारण नीचे ग्राफिक में देखिए। सवाल- नींद की कमी हमारी आंतों की सेहत को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- प्रोलॉन्ग्ड स्ट्रेस से आंतों का सुरक्षा बैरियर कैसे कमजोर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- क्या ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शराब आंतों के सुरक्षा बैरियर को कमजोर करते हैं? जवाब- हां, इसका शरीर पर ये प्रभाव पड़ता है- ये सारी चीजें आंतों के सुरक्षा बैरियर को कमजोर करती हैं। ठीक यही असर शराब पीने पर भी होता है। शराब की मामूली मात्रा भी बॉडी के लिए सेफ नहीं है। सवाल- लीकी गट की जांच कैसे होती है? जवाब- लीकी गट की जांच के लिए कोई एक कॉमन टेस्ट नहीं है। इसके लिए कई तरह के अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं, जैसेकि- 1. लैक्टुलोज-मैनिटोल टेस्ट: इसमें पेशेंट को दो प्रकार की शुगर (लैक्टुलोज और मैनिटोल) का घोल पिलाया जाता है। इसके बाद यूरिन के जरिए यह मापा जाता है कि शरीर ने उन्हें कितनी मात्रा में अवशोषित किया है। 2. जोनुलिन टेस्ट: इस टेस्ट में स्टूल या ब्लड सैंपल में 'जोनुलिन' नामक प्रोटीन का लेवल टेस्ट किया जाता है। 3. ब्लड टेस्ट: इसमें बैक्टीरिया या भोजन के प्रति एंटीबॉडी लेवल की जांच की जाती है। 4. स्टूल एनालिसिस: आंतों के माइक्रोबायोम, सूजन के मार्कर्स और बैक्टीरिया के असंतुलन का पता लगाने के लिए स्टूल की जांच की जाती है। सवाल- लीकी गट का इलाज क्या है? जवाब- इसका कोई एक तय इलाज या एक खास दवा नहीं है। लीकी गट में डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं, जैसेकि- सवाल- लीकी गट होने पर लाइफस्टाइल में क्या बुनियादी बदलाव करने चाहिए? जवाब- इसके लिए डाइट में वो चीजें शामिल करने की जरूरत है, जो हमारी आंतों को स्वस्थ रखती हैं। जैसेकि खाने में पर्याप्त सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज हो। इसके अलावा लाइफस्टाइल में कई और बदलाव करने चाहिए। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- खान-पान की किन आदतों पर ध्यान देना चाहिए? जवाब- लीकी गट होने पर खाने में फाइबर की ज्यादा मात्रा और वेरायटी सबसे जरूरी है। फाइबर आंत के अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। नीचे ग्राफिक में डिटेल देखिए- कुल मिलाकर, लीकी गट आंतों से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें आंतों की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है। अगर इसके लक्षण लगातार बने रहें तो सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ********************* ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- देश में बढ़ रहे स्क्रब टाइफस के मामले:कैसे फैलता है ये संक्रमण, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, बचाव और सावधानियां हाल के दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों से ‘स्क्रब टाइफस’ के कई मामले दर्ज किए गए हैं। स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो संक्रमित चिगर के काटने से होता है। चिगर घास-झाड़ियों वाले इलाकों में पाया जाने वाला एक छोटा कीड़ा होता है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में श्वेत गुट भारतीयों की जासूसी कर रहे:मिडटर्म चुनाव के दौरान हेट क्राइम 30% बढ़ने का खतरा, ट्रम्प भी बना सकते हैं इमिग्रेशन को मुद्दा
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में इमिग्रेशन विरोध बड़ा मुद्दा बन रहा है। भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 30% तक बढ़ने की आशंका है। न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में 20 साल से रेस्तरां चलाने वाले भारतवंशी मोमिन अली (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि ट्रम्प के समर्थक श्वेत गुट भारतीयों के रेस्तरां में जासूसी करते हैं। प्रवासियों के मुद्दे से जुड़े संगठन एपीआई ने एक मॉड्यूल का अध्ययन कर चेताया है कि नवंबर तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 58 हजार होने का खतरा है। जबकि इस साल जुलाई तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 44,535 मामले सामने आए थे। अमेरिका में चुनाव अथवा भारतीयों से जुड़ा कोई भी मुद्दा सामने आने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी एंटी इमिग्रेशन मुद्दा उठाती है। भारतीयों के खिलाफ जॉब छीनने का आरोप भी लगाया जाता है। आइस एजेंटों को छापेमारी के लिए बुलाते हैं मोमिन अली कहते हैं कि आइस एजेंटों की आए दिन छापेमारी बड़ी आफत बन गई है। ये लोग आइस एजेंटों को अवैध प्रवासियों के काम करने का कॉल करते हैं। आइस एजेंट रेड डालकर वैध भारतीयों को भी पकड़ लेते हैं। छोटे से कस्बे फ्रेंडशिप में ग्रॉसरी स्टोर चलाने वाले धवल कुमार (बदला हुआ नाम) को आइस एजेंट बिना कारण बताए उठा कर ले गए। यहां के लगभग 200 लोगों ने उनके समर्थन में याचिका पर हस्ताक्षर किए तब जाकर 5 दिन बाद धवल को छोड़ा गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती... महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख:इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे, यह पाकिस्तान की इकोनॉमी का 3 गुना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
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