मूवी रिव्यू-'लस्ट स्टोरीज 3':चार कहानियां, चार रंग और रिश्तों की वो बातें जो लोग अक्सर कह नहीं पाते
अवधि: 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग: (3.5/5) स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स निर्देशक: विक्रमादित्य मोटवानी, किरण राव, शकुन बत्रा, विशाल भारद्वाज कलाकार: कोंकणा सेन शर्मा, राधिका आप्टे, विजय वर्मा, अभिषेक बनर्जी, गुरफतेह पीरजादा, सना थंपी, राधिका मदान, अली फजल, अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ, गजराज राव ‘लस्ट स्टोरीज 3’ को देखने बैठते वक्त उम्मीद यही रहती है कि चार अलग-अलग निर्देशक रिश्तों, आकर्षण और इच्छाओं को अपने-अपने अंदाज में दिखाएंगे। अच्छी बात ये है कि फिल्म इस उम्मीद को पूरी तरह निराश नहीं करती। कहीं कहानी हंसाती है, कहीं रिश्तों की उलझन दिखाती है और कहीं आपको चौंकाती है। हां, चारों कहानियां बराबर दमदार नहीं हैं, लेकिन दो घंटे 40 मिनट में फिल्म इतना मसाला जरूर दे देती है कि देखने वाले का ध्यान बना रहता है और इस बार सबसे ज्यादा सरप्राइज देती हैं अदिति राव हैदरी। कहानी: चार किस्से, चार अलग अंदाज फिल्म की पहली कहानी विक्रमादित्य मोटवानी की है। इसमें कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे दो करीबी दोस्त हैं, जो अपनी-अपनी शादीशुदा जिंदगी से पूरी तरह खुश नहीं हैं। इंटरनेट पर कुछ देखने के बाद दोनों के दिमाग में एक ऐसा आइडिया आता है, जो दोस्ती और शादी दोनों की परीक्षा ले सकता है। यहां विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी अपने-अपने अंदाज में कहानी में कॉमेडी का तड़का लगाते हैं। कोंकणा और राधिका की दोस्ती वाला हिस्सा खास तौर पर अच्छा है। कहानी बहुत गहरी नहीं जाती, लेकिन हल्के-फुल्के अंदाज में काफी कुछ कह जाती है। दूसरी कहानी किरण राव की है और यहीं फिल्म थोड़ा अलग रास्ता पकड़ती है। गुरफतेह पीरजादा डबल रोल में हैं और सना थंपी के साथ उनकी कहानी शुरुआत में एक सामान्य आकर्षण की तरह लगती है, लेकिन धीरे-धीरे मामला रिश्ते से निकलकर अपराध और धोखे तक पहुंच जाता है। इस हिस्से का ट्विस्ट कहानी को संभालता है, हालांकि बीच में ऐसा भी लगता है कि कहानी जरूरत से ज्यादा चीजें एक साथ करने की कोशिश कर रही है। तीसरी कहानी शकुन बत्रा की है और शायद फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा भी यही है। राधिका मदान और अली फजल एक ऐसे कपल के किरदार में हैं जो तलाक लेने की तैयारी कर रहा है। दोनों के बीच गुस्सा है, शिकायतें हैं और बहुत सारी अनकही बातें हैं। लेकिन अजीब बात ये है कि जब भी दोनों मिलते हैं, उनके बीच वही पुरानी नजदीकी लौट आती है। यानी रिश्ता खत्म करने का फैसला तो हो चुका है, लेकिन दिल और आदतें अभी भी पुरानी जगह पर खड़ी हैं। शकुन बत्रा इसी उलझन को पकड़ते हैं। कहानी सिर्फ आकर्षण की नहीं रहती, बल्कि इस सवाल तक पहुंचती है कि क्या दो लोग एक-दूसरे से प्यार किए बिना भी एक-दूसरे के इतने करीब रह सकते हैं कि अलग होना मुश्किल हो जाए? और फिर आती है विशाल भारद्वाज की कहानी, जो फिल्म का सबसे अलग और सबसे मजेदार हिस्सा है। अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ एक पति-पत्नी के किरदार में हैं। कहानी पुराने दौर के हैदराबाद में सेट है, जहां अदिति का किरदार धीरे-धीरे रोमांटिक और कामुक साहित्य की दुनिया में दिलचस्पी लेने लगता है। यहीं से उसकी कल्पना और असली जिंदगी के बीच की सीमा थोड़ी धुंधली होने लगती है। सिद्धार्थ का किरदार भी इस पूरे खेल में काफी दिलचस्प है और गजराज राव अपने खास अंदाज में कहानी में खूब रंग भरते हैं। विशाल भारद्वाज ने इस हिस्से को इतना हल्का, शरारती और मजेदार रखा है कि कहानी कहीं भी भद्दी नहीं लगती। एक्टिंग: अदिति राव हैदरी ने बाजी मार ली चारों कहानियों में कलाकारों ने अच्छा काम किया है, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचती हैं अदिति राव हैदरी। उनका किरदार मासूम भी है, जिज्ञासु भी और अंदर से काफी शरारती भी। अदिति ने इन तीनों रंगों को बहुत खूबसूरती से पकड़ा है। खासकर उनके चेहरे के एक्सप्रेशन और घबराहट वाले सीन कहानी को और मजेदार बना देते हैं। सिद्धार्थ उनके साथ अच्छी केमिस्ट्री शेयर करते हैं और पहली बार में जितने सीधे-सादे लगते हैं, किरदार आगे बढ़ने के साथ उतने ही दिलचस्प होते जाते हैं। राधिका मदान और अली फजल भी तीसरी कहानी में शानदार हैं। दोनों के बीच गुस्सा, प्यार, खीझ और पुरानी नजदीकी—सब कुछ स्क्रीन पर साफ नजर आता है। कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे की दोस्ती फिल्म की पहली कहानी की जान है। दोनों की टाइमिंग अच्छी है और उनकी बातचीत में एक स्वाभाविकता दिखती है। विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी अपने छोटे-छोटे पलों में हंसी निकालने में कामयाब रहते हैं। डायरेक्शन और स्टोरीटेलिंग चारों निर्देशकों की अपनी अलग पहचान यहां साफ दिखाई देती है। विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी तेज और हल्की है, लेकिन इसका आइडिया जितना मजेदार है, कहानी उतनी गहराई तक नहीं जाती। किरण राव ने मुंबई को खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। उनकी कहानी में विजुअल स्टाइल अलग दिखती है, लेकिन ट्विस्ट के चक्कर में कहानी थोड़ी उलझ जाती है। शकुन बत्रा रिश्तों की पेचीदगियों को समझने में सबसे मजबूत नजर आते हैं। उनका हिस्सा सबसे ज्यादा भावनात्मक वजन लेकर आता है। और विशाल भारद्वाज तो यहां पूरी तरह अपने रंग में हैं। पुराने हैदराबाद का माहौल, संवाद, किरदार और हल्की शरारत—सब मिलकर इस कहानी को बाकी तीनों से अलग बना देते हैं। म्यूजिक और टेक्निकल पहलू कैसा है फिल्म का म्यूजिक कहानी के मूड को सपोर्ट करता है। खासकर ‘घट पट’ ध्यान खींचता है और कुछ हिस्सों की ऊर्जा बढ़ाता है। विजुअल ट्रीटमेंट भी फिल्म की बड़ी ताकत है। चारों कहानियों की अपनी अलग दुनिया है और कैमरा उस दुनिया को बनाने में अच्छी भूमिका निभाता है। विशाल भारद्वाज वाला हिस्सा खास तौर पर अपने रंग, लोकेशन और पीरियड फील की वजह से अलग नजर आता है। कहां रह जाती है पीछे? सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि चारों कहानियों का स्तर एक जैसा नहीं है। पहली कहानी का आइडिया मजेदार है, लेकिन उसका असर उतना देर तक नहीं रहता। दूसरी कहानी में ट्विस्ट तो है, मगर कहानी कई मोड़ों पर जरूरत से ज्यादा उलझती हुई लगती है। तीसरी कहानी मजबूत है, लेकिन कुछ जगहों पर रिश्तों को समझाने की कोशिश थोड़ी ज्यादा हो जाती है। चौथी कहानी सबसे मजेदार है, लेकिन उसका पेस थोड़ा और तेज होता तो असर और बढ़ सकता था। यानी फिल्म में मसाला भरपूर है, लेकिन हर डिश का स्वाद एक जैसा नहीं है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘लस्ट स्टोरीज 3’ परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह ऐसी एंथोलॉजी है जिसमें कम से कम दो कहानियां आपको बांधकर रखती हैं और बाकी दो आपको पूरी फिल्म से जोड़कर रखती हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है कि यह रिश्तों और इच्छाओं की बात करती है, लेकिन हर बात को भारी-भरकम बनाने की कोशिश नहीं करती। कहीं हंसाती है, कहीं सोचने पर मजबूर करती है और कहीं बस कहानी के साथ बह जाने देती है। अगर आपको रिलेशनशिप ड्रामा, थोड़ी कॉमेडी, थोड़ी शरारत और चार अलग-अलग अंदाज की कहानियां पसंद हैं, तो ‘लस्ट स्टोरीज 3’ वीकेंड पर एक अच्छी वन-टाइम वॉच है।
जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से आमिर खान मिले:दोनों की मुलाकात के बाद महाभारत प्रोजेक्ट चर्चा में आया
बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान हाल ही में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज से मिले। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच काफी देर बातचीत हुई। आमिर ने आध्यात्मिक गुरु के प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया। जगद्गुरु महाराज की सोशल मीडिया टीम ने आमिर के साथ मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'जब आध्यात्म और सिनेमा जगत की दो प्रमुख हस्तियां एक साथ आईं।' टीम के अनुसार, आमिर ने जगद्गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया और उनसे बातचीत की। वीडियो में आमिर हल्के नीले और सफेद रंग का कुर्ता और काला पजामा पहने नजर आए। वह जगद्गुरु महाराज के पास जाते, उनसे हाथ मिलाते और गर्मजोशी से गले मिलते दिखे। आध्यात्मिक गुरु की बातें सुनते हुए आमिर काफी प्रभावित नजर आए। देखें मुलाकात की तस्वीरें- मुलाकात के बाद पैपराजी में भी यह उत्सुकता दिखी कि क्या दोनों मिलकर कुछ करने की योजना बना रहे हैं। एक पैपराजी ने जगद्गुरु महाराज से पूछा, 'क्या होने वाला है? कोई कार्यक्रम है?' इस पर जगद्गुरु महाराज ने कहा कि उन्हें वहां जाना होगा जहां 'धर्म' उन्हें बुलाएगा, क्योंकि अभी गणेश महोत्सव का जश्न चल रहा है। यह पहली बार नहीं है जब आमिर खान जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से मिले हैं। इससे पहले भी आमिर ने उनका आशीर्वाद लिया था और धर्म, उपनिषद और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर उनसे विस्तार से बातचीत की थी। मुलाकात के बाद आमिर का ‘महाभारत’ प्रोजेक्ट फिर चर्चा में आमिर खान कई बार फिल्म 'महाभारत' को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता चुके हैं। ऐसे में जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से उनकी मुलाकात के बाद 'महाभारत' को लेकर चर्चा फिर शुरू हो गई है। गौरतलब है कि महाभारत पर आमिर पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से काम करने की इच्छा जता रहे हैं। आमिर खान इस महाकाव्य को किसी एक फिल्म में नहीं, बल्कि हॉलीवुड की मशहूर फिल्म सीरीज 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' की तरह एक भव्य फिल्म सीरीज के रूप में बैक-टू-बैक चैप्टर्स में बनाना चाहते हैं। साल 2024 में बीबीसी से बातचीत के दौरान आमिर खान ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा था, 'यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है और मेरे लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है। मुझे डर है कि इसे बनाते समय मुझसे कोई गलती न हो जाए। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि महाभारत हमारे लिए बहुत करीब है। यह हमारे खून में है, इसलिए मैं इसे बिल्कुल सही तरीके से बनाना चाहता हूं।' आमिर ने कहा था, ‘मैं हर भारतीय को गर्व महसूस कराना चाहता हूं और साथ ही दुनिया को यह दिखाना चाहता हूं कि भारत के पास क्या है। मुझे नहीं पता, यह कब बन पाएगा।’ आमिर आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं: सतीशाचार्य महाराज जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज ने एक इंटरव्यू में आमिर खान को लेकर कई बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से वह बहुत अच्छे इंसान हैं। महाराज के मुताबिक, कुछ समय से आमिर उनके संपर्क में हैं और आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि आमिर गीता पढ़ते हैं, कलावा बांधते हैं और रुद्राक्ष धारण करते हैं। इसके अलावा, वे भगवान का नाम लेते हैं और भजन भी सीख रहे हैं। महाराज ने बताया था कि आमिर उनसे मिलने पर उनके लिए भजन गाकर सुनाते हैं। उन्होंने यह भी किस्सा साझा किया कि जब वे आमिर के घर भोजन करने गए थे, तो आमिर ने विशेष तैयारी करवाई। उनके मुताबिक, पूरे घर को गंगाजल से साफ करवाया गया, नए बर्तन और अनाज मंगवाए गए। इसके बाद भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाया गया और पारंपरिक पद्धति से उन्हें भोजन कराया गया।
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