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भारत सरकार ने फिर जारी की ईरान में रह रहे लोगों के लिए एडवाइजरी, जानें अब MEA ने क्या कहा?

ईरान में लगातार बढ़ती अशांति और असुरक्षा के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को नई एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि ईरान में हालात तेजी से खराब हो रहे हैं और भारतीय नागरिकों को पूरी सतर्कता बरतने की जरूरत है. मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल के अनुसार, वर्तमान में ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है.

ईरान में भारतीयों के लिए MEA की अहम सलाह

विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की स्पष्ट सलाह दी है. वहीं, जो भारतीय पहले से वहां मौजूद हैं, उन्हें उपलब्ध किसी भी सुरक्षित माध्यम से जल्द से जल्द देश छोड़ने को कहा गया है. MEA ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार ईरान की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

विरोध प्रदर्शन से शासन-विरोधी आंदोलन तक

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 से ईरान में आर्थिक संकट के चलते शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं. ये प्रदर्शन धीरे-धीरे शासन-विरोधी आंदोलन का रूप ले चुके हैं. कई शहरों में हिंसा, इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई इलाकों में कर्फ्यू लागू किया गया है और टैंकों की तैनाती की सूचना भी मिली है. अनौपचारिक रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या हजारों में बताई जा रही है.

पहले भी जारी हो चुकी है ट्रैवल एडवाइजरी

इससे पहले 14 जनवरी को भी विदेश मंत्रालय ने ईरान को लेकर ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थी. उस समय भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को कमर्शियल फ्लाइट्स या अन्य साधनों से तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी गई थी. मौजूदा हालात को देखते हुए अब सरकार ने निकासी की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है.

24 घंटे की हेल्पलाइन और रजिस्ट्रेशन सुविधा

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की है. दूतावास ने सभी भारतीयों से अपना रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है. हालांकि, इंटरनेट बंद होने के कारण कई लोगों को रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ रही है. ऐसे में परिवार के सदस्य भारत से ही MEA पोर्टल पर जानकारी दर्ज करा सकते हैं.

विशेष उड़ानों से होगी निकासी

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने विशेष विमानों के जरिए भारतीयों की सुरक्षित वापसी की तैयारी कर ली है. पहले चरण में 16 जनवरी को तेहरान से दिल्ली के लिए एक स्पेशल फ्लाइट रवाना हो सकती है, जिसमें गोलेस्तान यूनिवर्सिटी और तेहरान मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल होंगे. कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस द्वारा उड़ानें निलंबित किए जाने के कारण चार्टर्ड फ्लाइट्स का सहारा लिया जा रहा है.

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

भारत सरकार ने दोहराया है कि वह ईरान में फंसे हर भारतीय की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और हालात के अनुसार आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

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इजरायल के लोगों को भी भारत पसंद, 71 फीसदी ने कहा 'इंडिया तुझे सलाम', राजदूत ने दी खास प्रतिक्रिया

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारत को लेकर दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जिनकी सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है। वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक्स ने एक लिस्ट जारी की है, जिसमें उन देशों के नाम और प्रतिशत बताए गए हैं, जिनकी भारत को लेकर सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है। इस लिस्ट में सबसे ऊपर इजरायल का नाम है। वहीं, भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने खुशी जताई है।

वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक्स ने प्यू रिसर्च सेंटर की 2023 की रिपोर्ट के आधार पर लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में सबसे पहले नाम इजरायल का है, जहां 71 फीसदी लोग भारत के लिए सकारात्मक सोच रखते हैं। इसके बाद दूसरा नाम ब्रिटेन का है, जहां 66 फीसदी लोग भारत के लिए सकारात्मक सोच रखते हैं। तीसरे स्थान पर 64 फीसदी के साथ केन्या और चौथे स्थान पर 60 फीसदी के साथ नाइजीरिया है। इसके अलावा पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया है। दक्षिण कोरिया में 58 फीसदी लोग भारत को लेकर पॉजिटिव सोच रखते हैं।

लिस्ट के अनुसार, भारत को लेकर जापान 55, ऑस्ट्रेलिया 52, इटली 52, अमेरिका 51, जर्मनी 47, कनाडा 47, पोलैंड 46, स्वीडन 46, इंडोनेशिया 45, मेक्सिको 42, नीदरलैंड 41, फ्रांस 39, हंगरी 34, स्पेन 34, ग्रीस 33, ब्राजील 33, दक्षिण अफ्रीका 28 और अर्जेंटीना 22 फीसदी सकारात्मक सोच रखते हैं।

इस लिस्ट को रिपोस्ट कर इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने लिखा, इजरायलियों को भारत से प्यार है।

दरअसल, भारत और इजरायल के बीच खास संबंध है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक-दूसरे का खुला समर्थन करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में 14 मई 1948 को इजरायल को स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव आया था। शुरुआत में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन दो साल में ही 1950 में इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी। दोनों देशों के बीच 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए।

भारत फिलिस्तीन का समर्थन करता था। यही कारण है कि उसे इजरायल को मान्यता देने में इतना वक्त लगा। हालांकि, रक्षा के क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच की दोस्ती काफी पुरानी है। इजरायल ने ना केवल 1962 के भारत-चीन युद्ध में मोर्टार और मोर्टार रोधी डिवाइस दिए, बल्कि कारगिल युद्ध में भी इजरायल ने भारत को सैन्य मदद पहुंचाई।

1950 में इसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के बाद पहली बार 2017 में भारत के प्रधानमंत्री ने इजरायल का दौरा किया। पीएम मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध में काफी मजबूती आई है। दोनों देशों के बीच के संबंध में काफी धीरे-धीरे विकास हुआ, लेकिन मोदी सरकार के नेतृत्व में इसमें काफी तेजी देखी गई।

भारत और इजरायल रक्षा, कृषि, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार के अहम साझेदार हैं। 2020 से लेकर 2024 तक दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कई बड़ी साझेदारी हुई है। दोनों देश सांस्कृतिक तरीके से भी आपस में जुड़े हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में यहूदियों का आगमन लगभग दो हजार साल पहले हुआ था।

उस समय से लेकर अब तक भारत में यहूदी शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं। इस बात से खुद इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सहमति रखते हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि भारत इकलौता ऐसा देश है, जहां बड़ी संख्या में यहूदी रहते हैं, लेकिन फिर भी कभी उनके उत्पीड़न की घटना सामने नहीं आई।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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