Vastu Tips: गणेश जी की पीठ के दर्शन से आ सकती है दरिद्रता, स्थापना में रखें इन बातों का ध्यान
हिंदू धर्म में गणपति बप्पा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। शुभ और मांगलिक कार्यों में भगवान गणेश की पूजा करने से कोई विघ्न बाधा नहीं आती है। वहीं शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। हिंदू धर्म और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान गणपति की पीठ के दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गणपति बप्पा की पीठ के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके पीछे की वजह के बारे में बताने जा रहे हैं।
पीठ पर होता है दरिद्रता का वास
धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश की पीठ पर गरीबी और दरिद्रता का वास माना जाता है। बप्पा के सामने से दर्शन करने से भक्त को सुख और समृद्धि में वृ्द्धि का आशीष मिलता है। लेकिन भगवान गणेश की पीठ के दर्शन करने से जातक के जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है और दरिद्रता आती है। इस वजह से भगवान गणेश की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहिए।
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माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति जाने-अंजाने में गणपति बप्पा की पीठ के दर्शन करता है, तो उस जातक को अपने जीवन में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में सुख-सौभाग्य नहीं होता है। इसलिए इस स्थिति में बप्पा से क्षमा मांगनी चाहिए।
जानें गणेश जी के दर्शन का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश के दर्शन करने मात्र से जातक के जीवन में सुख-सौभाग्य और समृ्द्धि का आगमन होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
जानें मूर्ति स्थापना के नियम
भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करने के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि दीवार से मूर्ति सटी न हो। ऐसा इसलिए जिससे कि कोई भी भूलकर गणेश जी की पीठ के दर्शन न कर सके।
वास्तु के मुताबिक भगवान गणेश की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है। मूर्ति का मुख हमेशा पूर्व या फिर उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। इस दिशा में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है और परिवार के सभी लोगों पर बप्पा की कृपा बनी रहती है।
वहीं एक बात का खास ध्यान रखें कि भगवान गणेश की मूर्ति को सीधे तौर पर जमीन पर नहीं रहना चाहिए। वहीं मूर्ति को हमेशा किसी चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर स्थापित करना चाहिए।
Radha Ashtami 2026: राधा रानी को बेहद प्रिय है अरबी समेत अन्य 5 चीजों का भोग, अर्पित करें ये भोग
हिंदू धर्म में राधा अष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्तजन राधा अष्टमी का व्रत करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। राधा अष्टमी के दिन विधिवत रुप से राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है, उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग अर्पित कर सकते हैं।
इस बार राधा अष्टमी का व्रत 19 सितंबर 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि राधा रानी के प्रिय भोग कौन से हैं।
राधा रानी के प्रिय भोग
- इस खास मौके पर आप राधा रानी को मालपुआ और रबड़ी का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मालपुआ और रबड़ी का भोग राधा अष्टमी को अधिक प्रिय है।
- राधा अष्टमी के दिन श्रीजी को पंचामृत का भोग जरुर लगाएं। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर पंचामृत का भोग जरुर लगाएं। राधा-रानी को भी भगवान कृष्ण की तरह ही धनिया की पंजरी का भोग अति प्रिय है। इसलिए इस दिन राधा रानी के साथ-साथ भगवान कृष्ण को भी धनिया पंजीरी का भोग अर्पित करें।
- खासतौर पर भगवान कृष्ण को माखन मिश्री अधिक प्रिय है। इसलिए राधा अष्टमी के दिन राधा रानी के माखन मिश्री का भोग जरुर लगाएं।
- राधा रानी को इस दिन आप खीर का भोग अर्पित कर सकते हैं। आप चाहे तो चावल की खीर या मखाने की खीर भी बना सकते हैं।
- राधा अष्टमी के दिन राधा रानी को अरबी का भोग जरुर लगाएं। राधा रानी को अरबी को भोग काफी पसंद होता है। अरबी का भोग राधा अष्टमी के दिन माता को जरुर लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी सब्जी राधा रानी के लिए बना रहे भोग के लिए, तो उसमें भूलकर भी लहसुन प्याज न डालें। सात्विक सब्जी का भोग लगाएं।
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