अजय राय बोले- काशी की विरासत ध्वस्त कर रहे मोदी–योगी:3 अक्षय वटवृक्षों में एक को काट डाला; कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया
काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर चल रहे तोड़फोड़ पर यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पीएम मोदी और सीएम योगी पर हमला बोला। उन्होंने कहा- मोदी-योगी की सरकार काशी की विरासत और हिंदू धर्म की सबसे बड़ी धरोहर को पूरी तरह से ध्वस्त करने में जुटी है। बाबा विश्वनाथ के दरबार में कॉरिडोर के नाम पर एक आधुनिक मॉल बना दिया गया। सैकड़ों मंदिर तोड़ दिए गए। इसे तबाह कर दिया गया। अजय राय अक्षय वट वृक्ष का जिक्र करते हुए कहा- हिंदू धर्म में 3 प्रमुख स्थानों काशी, गया (बोधगया) और प्रयागराज का बड़ा महत्व है। यहां हजारों-हजार साल पुराने अक्षय वट वृक्ष थे। इनका इतिहास हिंदुस्तान में तीन अक्षय वटों का रहा है। हमारे पीएम मोदी भी उन अक्षय वट वृक्षों को नमन करते हैं। गया और प्रयागराज संगम के ही दो अक्षय वट वृक्ष बचे हैं। काशी वाला अक्षय वट काट दिया गया। उन्होंने कहा- 'बाबा विश्वनाथ और मां पार्वती के काशी आने से पहले से यह वृक्ष यहां विराजमान था, लेकिन गुजरात के ठेकेदारों ने इसे खत्म कर दिया।' बढ़ते विरोध के बीच PMO और CMO ने मामले का संज्ञान लिया और प्रशासन को विकास के साथ धरोहरों को संरक्षित करने के निर्देश दिया। बाबा विश्वनाथ के गुरु का मंदिर भी तोड़ा राय ने आगे आरोप लगाया कि अमुक्तेश्वर महादेव मंदिर, जो बाबा विश्वनाथ के गुरु का मंदिर था, उसे भी तोड़ दिया गया। लक्ष्मी नारायण का मंदिर, जो कसौटी पत्थर पर बना था। जिस पत्थर पर सोने की असलियत जांच की जाती है, वह भी गायब है। वहां की मूर्तियां मिली नहीं, कहीं स्थापित भी नहीं की गईं। शनि भगवान का मंदिर सहित कई अन्य मंदिर पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। काशी में हजारों साल पुरानी धरोहर को नष्ट कर दिया अजय राय ने और क्या-क्या कहा... PMO और CMO ने मामले को संज्ञान लिया अब पूरा मामला समझ लीजिए... 25 मीटर ऊंची चिमनी बनेगी, ताकि घरों तक न पहुंचे राख होल्कर ट्रस्ट ने प्रशासन से मांगी मूर्तियां मणिकर्णिका घाट का निर्माण वर्ष 1771 में मालवा की शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था। करीब ढाई सौ साल पुरानी इस विरासत को श्मशान घाट विकास परियोजना के तहत क्षतिग्रस्त किए जाने होलकर ट्रस्ट ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए पीएम और सीएम को पत्र लिखा है। अहिल्याबाई होलकर न सिर्फ मध्यप्रदेश के मालवा या महेश्वर की महारानी थीं, बल्कि उन्हें पूरे भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। 31 मई 2025 को ही उनकी 300वीं जन्म शताब्दी थी, जिसे जन्म शताब्दी के तौर पर भाजपा पूरे वर्ष मना रही है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2025 को भोपाल पहुंच कर उनके नाम पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उनके सम्मान में डाक टिकट और 300 रुपए का चांदी का स्मारक सिक्का जारी किया था। वहीं, अब उनकी ऐतिहासिक संरचना के तोड़े जाने से लोग काफी नाराज है। देवी अहिल्याबाई से जुड़ी कई ऐतिहासिक मूर्तियां और धार्मिक प्रतीक भी क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ मूर्तियां टूटकर मलबे में दब गईं, तो कुछ खुले में पड़ी मिलीं। एक शिवलिंग के क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है। जिस हिस्से को तोड़ा गया, वहां देवी अहिल्याबाई की शिव आराधना से जुड़ी प्रतिमाएं स्थापित थीं। मणिकर्णिका घाट की देखरेख खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट करता है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया है। यशवंतराव होलकर ने जारी पत्र में कहा- हमें अत्यंत दुख और निराशा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि विकास के नाम पर वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को अचानक ध्वस्त कर दिया गया। सन् 1791 में पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। यह स्थान अहिल्याबाई मां साहेब के लिए अत्यंत महत्व रखता था। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 जनवरी 2026 को बिना किसी पूर्व सूचना के, वाराणसी नगर निगम अधिकारियों के निर्देश पर कुछ ही घंटों में घाट का यह हिस्सा तोड़ दिया गया। इसके बावजूद वहां की मूर्तियों को संरक्षित किया गया और न ही हमारी ट्रस्ट से इसकी कोई अनुमति ली गई। ‘जिस देवी की प्रतिमा काशी में स्थापित की, वही मलबे में’ यशवंतराव होलकर ने पत्र में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें भारत की संस्कृति की महान रक्षक के रूप में सम्मान दिया है। विडंबना देखिए कि उसी देवी अहिल्याबाई की पवित्र और ऐतिहासिक मूर्तियां आज मणिकर्णिका घाट के मलबे में दबी पड़ी हैं। वे खुद बनारस पहुंचे और अधिकारियों से मूर्तियां मांगी, जिसे फिर से स्थापित किया जा सके। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से की ये मांगें की थी होलकर ट्रस्ट और इंदौर के होलकर राजपरिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ये मांगें की हैं। विरोध के बाद रोका गया काम मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास परियोजना के चलते हुई तोड़फोड़ के बाद हो रहे विरोध और होलकर ट्रस्ट की शिकायत को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। प्रशासन को विकास के साथ धरोहरों को संरक्षित करने के निर्देश दिया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि अहिल्याबाई की मूर्ति समेत अन्य समस्त धरोहरों को नुकसान नहीं पहुंचा है। सभी मूर्तियों को संरक्षण के दृष्टिगत संस्कृति विभाग के परिसर में सुरक्षित रख दिया गया है। घाट के पुनर्विकास के बाद इसे यथावत उक्त स्थल पर सम्मान के साथ लगाया जाएगा। फिलहाल गुरुवार को वहां का काम रोक दिया गया है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें- सतुआ पीने वाले बाबा के पास 50 करोड़ का आश्रम:भाई का कत्ल; सतीश तिवारी के जगद्गुरु बनने की कहानी पीली पोशाक। चलने के लिए करोड़ों की लैंड रोवर डिफेंडर, पोर्श टर्बो जैसी गाड़ियां। आंखों पर रे-बैन जैसा ब्रांडेड चश्मा। जिसकी तारीफ अक्सर यूपी के सीएम योगी भी करते हैं। हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के ललितपुर के छोटे से गांव मसौरा से निकले सतीश तिवारी की। सतीश पहली बार दीक्षा लेने के बाद संतोष दास बन गए। ये कोई और नहीं, माघ मेले में सुर्खियां बटोर रहे सतुआ बाबा हैं। 26 साल पहले सतुआ बाबा को जिस बड़े भाई ने अध्यात्म की राह दिखाई, वो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी हत्या हो चुकी है। आखिर सतीश तिवारी कैसे बनारस पहुंचे? उनके संन्यासी बनने की खबर परिवार को कब लगी? मां ने जिद कर क्यों आखिरी सांस उनके आश्रम में ली? पढ़िए सतुआ बाबा की जिंदगी के अनसुने किस्से…
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