Supreme Court को बताया गया, Ram Mandir चढ़ावा चोरी में 25 सितंबर तक Charge Sheet देगी SIT
उच्चतम न्यायालय को सोमवार को बताया गया कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच कर रही अदालत द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) 25 सितंबर तक या उससे पहले पहला आरोपपत्र दाखिल करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद से कानूनी तौर पर तय 90 दिन की समय-सीमा जल्द ही खत्म होने वाली है। मेहता ने कहा, ‘‘पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो जाएगी, इसलिए हमें आरोपपत्र दाखिल करना होगा, अन्यथा उन्हें (आरोपियों को) डिफॉल्ट जमानत मिल जाएगी।’’ शीर्ष अदालत ने सीलबंद लिफाफे में एसआईटी की ओर से दाखिल की गई विस्तृत वस्तु स्थिति रिपोर्ट का भी अवलोकन किया।
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167(2) के तहत, यदि जांच एजेंसी तय अवधि यानी 60 या 90 दिन के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रहती है तो आरोपी को वैधानिक जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 187 ने पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167(2) का स्थान लिया है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले एसआईटी को अपनी जांच जल्द पूरी करने और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह चढ़ावा चोरी मामले में जांच में हुई प्रगति की वस्तु स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे। शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई को चढ़ावे के कथित गबन की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) किरण एस. की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय एसआईटी का संज्ञान लिया था। उसने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा था।
सुधारात्मक कदमों पर जोर देते हुए पीठ ने कहा था कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पीठ ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। पीठ ने 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार से चढ़ावे के कथित गबन की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की संभावना के बारे में उसे अवगत कराने को कहा था।
शीर्ष अदालत ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले में वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने चढ़ावे की कथित चोरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को भी नोटिस जारी किया था। राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत का रुख किया था।
उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और मंदिर न्यास के वित्तीय मामलों का ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ कराने संबंधी निर्देश का अनुरोध किया था।
CM Yogi ने Meerut में Congress पर साधा निशाना, बोले- विपक्ष ने राजनीति में वंशवाद को बढ़ाया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन पर वंशवादी राजनीति और जातिवाद का आरोप लगाया। मेरठ में 'शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से राजनीति परिवारवाद और जातिवाद जैसी बुराइयों से ग्रस्त रही है। कांग्रेस पार्टी और उसके राजनीतिक सहयोगियों ने लंबे समय तक राजनीति को केवल परिवार के हितों और निजी लाभ का जरिया माना। जनसेवा का माध्यम बनने के बजाय, सत्ता उनके लिए परिवार का शासन बनाए रखने और अपने निजी स्वार्थों को साधने का साधन बन गई।
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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 'शक्ति केंद्र' नाम ही इसके काम को परिभाषित करता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में, शक्ति केंद्र संयोजक संगठन और चुनाव की पूरी ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति को अपने स्वार्थ साधने का जरिया माना जाने लगा था। बीजेपी ने इस राजनीतिक सोच के सामने एक अलग आदर्श पेश किया है - 'राष्ट्र प्रथम'। हमारे लिए राजनीति केवल सत्ता पाने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम है। हमारे कार्यकर्ताओं का लक्ष्य संगठन को स्वयं से ऊपर, समाज को संगठन से ऊपर और राष्ट्र को समाज से ऊपर रखना है।
"मुझे क्या" वाली सोच पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे "मंथरा-बुद्धि" कहा। उन्होंने कहा कि जो लोग 'मुझे क्या' कहते हैं, उनमें मंथरा-बुद्धि होती है - यानी 'मुझे क्या मिलेगा, कोई कुछ भी करे, उससे मुझे क्या लेना-देना?' यह सोच न सिर्फ़ व्यक्ति को, बल्कि पूरे समाज को नुकसान पहुँचाती है। इससे पहचान का संकट पैदा होता है, समाज अपनी ज़िम्मेदारियों से भागने लगता है और विकास में बाधा आती है।
CM योगी ने कहा कि इस सोच ने देश को कमज़ोर किया और पहचान का संकट पैदा किया, लेकिन 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद संभालने के बाद बदलाव साफ़ दिखा। उन्होंने कहा कि हमने एक नया भारत देखा - एक ऐसा भारत जिसे अपनी विरासत पर गर्व है और जो विकास की अपनी रफ़्तार खुद तय करता है। एक ऐसा भारत जिसे अब पहचान का संकट नहीं है, जो सीना तानकर चलता है और दुनिया की आँखों में आँखें डालकर बात करता है। और जब कोई भारत को चुनौती देने की हिम्मत करता है, तो वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना भी जानता है।
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उन्होंने कहा कि PM मोदी के नेतृत्व में 'नया भारत' गुलामी की मानसिकता को छोड़ रहा है और अपनी विरासत पर गर्व को फिर से स्थापित कर रहा है। उन्होंने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का उदाहरण दिया, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने आगे कहा कि मथुरा-वृंदावन में विकास कार्य चल रहे हैं। हमने भागवत भूमि 'शुक्रतीर्थ' के कायाकल्प का काम हाथ में लिया है और विदुर कुटी के लिए भी फंड आवंटित किया है।
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