श्रिया सरन ने ‘दृश्यम’ के लास्ट चैप्टर ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ के साथ नंदिनी को अलविदा कहने पर शेयर किए अपने जज़्बात
‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ की रिलीज़ में अब दो हफ्ते से भी कम समय बाकी है और विजय सालगांवकर का सालों से सुरक्षित रखा गया राज़ अब पहले से कहीं ज्यादा उजागर होने के करीब है. एसपी क्राइम ब्रांच की भूमिका में जयदीप अहलावत की एंट्री के साथ-साथ तब्बू की मीरा देशमुख और प्रकाश राज भी विजय की हर गतिविधि पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, जिससे उस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यह रहस्य 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में सामने आएगा.
श्रिया सरन ने नंदिनी के किरदार को निभाने पर शेयर किया एक्सपीरियंस
‘दृश्यम’ फ्रैंचाइज़ी अपने बहुप्रतीक्षित अंतिम अध्याय की ओर बढ़ रही है. ऐसे में श्रिया सरन ने नंदिनी के किरदार को निभाने के अपने अनुभव और इस किरदार से अपने खास जुड़ाव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने यह भी साझा किया कि शूटिंग पूरी होने के बाद ‘दृश्यम’ की दुनिया को अलविदा कहना उनके लिए कैसा अनुभव रहा.
श्रिया सरन ने साझा किया, “नंदिनी हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहेगी. नंदिनी और विजय का रिश्ता बहुत खूबसूरत है, जहां विजय कभी यह नहीं कहता कि नंदिनी ने कुछ गलत किया है. सिर्फ पहले पार्ट में, जब वह कहती है, ‘मैंने सब ठीक किया ना’, तब वह कहता है, ‘नहीं, वो हमारे पास वापस आएंगे.’ इसके बाद से उसने हमेशा उसका साथ दिया है.”
'अभिषेक ने इसे बहुत खूबसूरती से लिखा'
उन्होंने आगे कहा, “अभिषेक ने इसे बहुत खूबसूरती से लिखा है. दूसरे पार्ट से लेकर तीसरे पार्ट तक, जिस तरह से दोनों एक टीम की तरह काम करते हैं... एक खूबसूरत लाइन है जो पार्ट 1 से लेकर ‘द कन्क्लूजन’ तक चलती है, और वह कहती है, ‘दम घुटता है.’ मुझे लगता है कि यह लाइन उसके भीतर चल रही हर चीज़ को बयां करती है—उसका दर्द, डर, कल क्या होगा इसकी चिंता, अपने परिवार को खोने का डर और अपने बच्चों के साथ मौजूद रहने की उसकी चाहत.”
सेट पर आखिरी दिन भावुक हो गई थीं श्रिया
‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ के सेट पर आखिरी दिन श्रिया भावुक हो गई थीं. अपने अनुभव को साझा करते हुए अभिनेत्री ने कहा, “जब हम ‘द कन्क्लूजन’ की शूटिंग कर रहे थे, सेट पर आखिरी दिन मुझे याद है कि जब मैं सेट से जा रही थी, तो आखिरी बार मैंने डाइनिंग टेबल की तरफ देखा. उन्होंने वहां इतना समय बिताया था, इतने सारे सीन्स वहां और उस घर में शूट किए थे. और मुझे लगा कि ये सब अब पीछे छूट रहा है. लेकिन जो यादें मैंने संजोई हैं, मैंने जितना कुछ सीखा है और जिस खूबसूरती से इसे लिखा गया है, वो हमेशा मेरे साथ रहेगा.”
2 अक्टूबर को रिलीज होगी ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’
अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, रजत कपूर, जयदीप अहलावत और प्रकाश राज के साथ कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव सहित अन्य कलाकार नजर आएंगे. फिल्म के साथ इस चर्चित फ्रैंचाइज़ी के अंतिम अध्याय के लिए एक दमदार कलाकारों की टोली एक साथ आ रही है.
स्टार स्टूडियो18 द्वारा प्रस्तुत, पैनोरमा स्टूडियोज़ की यह फिल्म अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित है और इसकी कहानी अभिषेक पाठक, आमिल कीयान खान और परवेज़ शेख ने लिखी है. फिल्म का निर्माण आलोक जैन, अजीत अंधारे, कुमार मंगत पाठक और अभिषेक पाठक ने किया है. ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।
अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।
रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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