सिंहस्थ क्षेत्र के अवैध निर्माण पर चली निगम की जेसीबी, बिना अनुमति चल रहा था काम
उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर निर्माण कार्यों का दौर लगातार चल रहा है और दूसरी तरफ अतिक्रमण पर भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। अब तक शहर के कई क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने कार्रवाई की जा चुकी है। कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां काम चल रहा है और कुछ जगह पर निशान लगा दिए गए हैं, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सिंहस्थ महापर्व की तैयारी के बीच अब नगर निगम को एक और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए देखा गया। प्रशासन की टीम ने लालपुल ब्रिज रोड पर स्थित माधवानंद आश्रम की ओर से सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि पर बिना अनुमति के बनाए जा रहे करीब 10000 वर्ग फीट के निर्माण को तोड़ दिया है। इस दौरान नगर निगम की टीम के साथ पुलिस बल पूरे समय मौके पर तैनात रहा।
ढहाया गया अवैध निर्माण
नगर निगम के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक माधवानंद आश्रम की तरफ से सिंहस्थ के लिए आरक्षित की गई भूमि पर 2 मंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा था। इस निर्माण के लिए किसी तरह की अनुमति भी नहीं ली गई थी। यही वजह रही कि नगर निगम की टीम पोकलेन और जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची। इसके बाद मशीनों की सहायता से निर्माणाधीन भवन पूरी तरह से नेस्तनाबूत कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबित न्यायालय की ओर से सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाले अवैध निर्माण हटाने को लेकर आदेश भी दिए गए। इसी के तहत निगम द्वारा इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।
अतिक्रमण पर चलती रहेगी जेसीबी
शहर में जगह जगह अवैध अतिक्रमण तोड़ा जा रहा है। इसे लेकर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि इस महापर्व के दौरान बुनियादी ढांचे के निर्माण और व्यवस्थाओं के लिए आरक्षित की गई है। यहां पर बिना अनुमति के किसी भी तरह का अस्थाई या स्थाई निर्माण करना नियमों के खिलाफ है। इस भूमि का अनाधिकृत उपयोग किसी भी तरह से प्रशासन द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। निगम के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण या अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई आगे भी जारी रहने वाली है।
हाई कोर्ट का फैसला, निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की सुनवाई अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम बेंच में होगी
कटनी जिले में सीएसपी रही निलंबित पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया की सुनवाई अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की बेंच में होगी। सरकार की ओर से उठाई गई मांग को स्वीकार करते हुए और केस डायरी देखने के बाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय लिया है। अब 22 सितंबर को पूर्व सीएसपी के मामले में नई बेंच सुनवाई करेगी।
बता दे कि नेहा पच्चीसिया ने अपने ऊपर दर्ज हुई एफआईआर को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। 21 सितंबर को जस्टिस हिमांशु जोशी को बेंच में सुनवाई होनी थी। सरकार ने मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच में भेजने की मांग की थी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम बेंच में होगी नेहा केस की सुनवाई
सरकार की और से कहा गया कि एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगा है। इस वजह से मामले की सुनवाई संबंधित बेंच को करनी चाहिए। हालांकि नेहा के वकीलों ने इसका विरोध भीभ किया था। उनका कहना था कि ये धाराएं पिछली सुनवाई के बाद जोड़ी गई है, इसलिए सुनवाई पहली बेंच में ही होनी चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद केस डायरी देखी और दूसरी बेंच में ही सुनवाई के लिए उपयुक्त माना।
बता दें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के लिए अलग बेंच तय है। जस्टिस संदीप एस कलगांवकर की सिंगल बेंच ऐसे मामलों को सुनती है। इसके सात ही जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच भी सुनवाई करती है। प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट यानी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम को चैलेंज किए जाने की प्रकृति के आधार पर यह तय होगा कि यह मामला सिंगल बेंच जाएगा या डिविजनल बेंच।
नेहा ने एफआईआर रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई है
उल्लेखनीय है कि पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने एफआईआर रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। इससे पहले उन्होंने अंतरिम राहत की भी मांग की थी। नेहा की ओर से एफआईआऱ में अपनी भूमिका से इनकार किया गया है। नेहा के वकील का कहना है कि उनके खिलाफ सीधे सबूत नहीं है। राज्य सरकार की और से इसका विरोध किया गया है। सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
वंदना झा की रिपोर्ट
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