Kim Jong Un News | किम जोंग का न्यूक्लियर टेस्ट ला रहा भूकंप? | #kinjongun #nortkhorea #hindinews
Kim Jong Un News | किम जोंग का न्यूक्लियर टेस्ट ला रहा भूकंप? | #kinjongun #nortkhorea #hindinews #northkoreanews #nucleartest #timesnownavbharat You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
100% टैरिफ वाला दांव फ्लॉप शो! भारत ने रूस के साथ मिलकर अब कौन सी बड़ी डील कर ली, भड़के ट्रंप
एक तरफ मॉस्को, दूसरी तरफ वाशिंगटन और बीच में भारत। रूस पर अमेरिकी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टेरिफ लगाने का रास्ता खोल दिया है। ठीक इसी दौर में भारत के आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ रूस पहुंच रहे हैं। मॉस्को में रूसी सेना के बड़े अधिकारियों से उनकी मुलाकात होती है। डिफेंस कोऑपरेशन पर बात होती है। जॉइंट कैपेबिलिटी डेवलपमेंट की भी बात होती है और सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की भी बात होती है। भारत के आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ 16 से 18 सितंबर तक रूस के आधिकारिक दौरे पर रहे। यह सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं था। इस दौरान रूस के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत होती है। रूसी लैंड फोर्सेस के कमांडर इन चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई मोर्द विचेव के साथ सैन्य सहयोग और ट्रेनिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत होती है। इसके अलावा रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा उद्योग और प्रोक्योरमेंट से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होती है। यानी कि बातचीत सिर्फ सैनिकों के आदानप्रदान तक सीमित नहीं थी। इसमें रक्षा टेक्निक, प्रशिक्षण, क्षमता का विकास और रक्षा खरीद जैसे बड़े मुद्दे शामिल थे।
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मॉस्को में जनरल धीरज सेठ ने रूस के नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा। रूसी लैंड फोर्सेस के मुख्यालय में बातचीत की और सेंट पीटर्स पीटर पीटर्सबर्ग में मिखाइल लोवास क्या मिलिट्री आर्टिलरी अकाडमी भी वो गए। यानी भारत ने साफ कर दिया कि रूस के साथ सैन्य से सैन्य संपर्क अभी भी सक्रिय है। लेकिन अब जरा रुकिए क्योंकि इस पूरी कहानी का दूसरा हिस्सा इससे भी ज्यादा अहम है। उधर अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए नया कदम उठा रहा है। 18 सितंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा नया कानून साइन किया। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% टेरिफ लगाने की ताकत मिल गई। यानी कि अगर कोई देश रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा एनर्जी खरीदता है तो अमेरिका उसके सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है। वो भी भारी और इस कानून का दायरा भारत जैसे देशों के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता ही रहा है।
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अब यहां पर असली सवाल पैदा हो रहा है कि अगर अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ा रहा है तो भारत रूस के साथ सैन्य रिश्ते क्यों बनाए रख रहा है? इसका जवाब भारत रूस रिश्ते के इतिहास में छुपा है। भारत और रूस या कहें भारत और सोवियत संघ के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है। भारतीय सेना के बड़े हिस्से के हथियार और सैन्य प्लेटफार्म लंबे समय तक सोवियत और रूसी टेक्निक पर आधारित रहे। फाइटर जेट हो, टैंक हो, मिसाइल हो, मिसाइल का सिस्टम हो, हेलीकॉप्टर हो, तोपे हो और कई तरह के सैन्य उपकरण हैं। रूस भारत के रक्षा ढांचों में लंबे समय से एक अहम भागीदार रहा है और इसीलिए किसी एक फैसले से यह रिश्ता अचानक से खत्म हो ही नहीं सकता। बल्कि भारत बीते कुछ सालों में एक साथ कई देशों के साथ रक्षा संबंध बढ़ा रहा है। अमेरिका के साथ भी बढ़ा रहा है। फ्रांस के साथ भी बढ़ा रहा है। इजराइल के साथ भी बढ़ा रहा है और रूस के साथ भी बढ़ा ही रहा है। यानी भारत की रणनीति को सिर्फ किसी एक खेमे में जाने के तौर पर देखना तस्वीर नहीं है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अलग-अलग साझेदारों के साथ काम करता रहा है। वापस आते हैं रूस के दौरे पर।
आर्मी चीफ की मॉस्को यात्रा जॉइंट कैपेबिलिटी डेवलपमेंट
दोनों देशों की सेनाएं ऐसी क्षमताओं पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं जिसमें प्रशिक्षण तकनीकी समझ, सैन्य अनुभव साझा करना शामिल हो। इसके अलावा प्रोफेशनल मिलिट्री एक्सचेंज भी बातचीत का हिस्सा रहा है। यानी दो दोनों ही सेनाओं के अधिकारी और सैन्य संस्थान एक दूसरे के अनुभव और प्रशिक्षण साझा करते हैं। सवाल यह है कि क्या इसका मतलब है कि भारत अमेरिका से दूर जा रहा है? सिर्फ इस दौरे के आधार पर ऐसा कोई कंक्लूजन ठीक नहीं है क्योंकि भारत अमेरिका रक्षा संबंध भी बीते सालों में काफी बड़े हैं। भारत अमेरिका से कई रक्षा प्लेटफार्म और टेक्निक्स लेता है। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास होते रहते हैं। अभी भी हुआ और रणनीतिक सहयोग भी बढ़ा है और इसलिए तस्वीर कुछ ऐसी है कि भारत रूस के साथ पुराने रिश्ते को बरकरार रखना चाहता है और अमेरिका और दूसरे देशों के साथ भी अपने रक्षा संबंध आगे बढ़ा रहा है। यानी भारत के लिए मुद्दा किसी एक देश को चुनने वाला नहीं है। बल्कि अपनी सुरक्षा, जरूरतों और रणनीतिक हितों के हिसाब से साझेदारी को मैनेज करना है। लेकिन अमेरिका का नया टेरिफ कानून इस बैलेंस को चुनौती दे सकता है। क्योंकि अगर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टेरिफ लगा तो भारत के सामने आर्थिक और रणनीतिक दोनों तरह के सवाल खड़े हो जाएंगे।
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