NSE का GMP ₹192 से गिरकर हुआ ₹43, अब Sonaselection IPO से हो रही तुलना, जानें किसमें है कितना दम?
NSE IPO vs Sonaselection India IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE के IPO के साथ-साथ सोनासेलेक्शन इंडिया का IPO भी सोमवार 21 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए बंद हो रहा है. दोनों IPO की मांग को लेकर बाजार में अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं. NSE का मुद्दा पूरी तरह से बिक्री के लिए एक प्रस्ताव है. जबकि सोनासलेक्शन अपने व्यवसाय के लिए नई पूंजी जुटा रहा है. तो आइए इसी क्रम में NSE और Sonaselection India की GMP, लॉट साइज और इसके सब्सक्रिप्शन के बारे में विस्तार से जानते हैं
NSE की GMP में भारी गिरावट
NSE के IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP अब प्राइस बैंड की घोषणा के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. प्राइस बैंड की घोषणा के समय, इसका GMP ₹192 के आसपास था, जो अब घटकर केवल ₹48 के आसपास रह गया है. ₹1,785 के ऊपरी प्राइस बैंड पर ₹48 का GMP सिर्फ 2.69% का प्रीमियम दिखाता है. यानी ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम 70 फीसदी से ज्यादा गिर गया है.
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NSE सब्सक्रिप्शन कैसा रहा?
NSE का IPO अब तक कुल 1.15 गुना सब्सक्राइब हो चुका है. रिटेल इन्वेस्टर्स से 0.69 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की तरफ से 1.46 गुना और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स की ओर से 1.32 गुना बोलियां मिली हैं. इससे पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से करीब ₹6,746.18 करोड़ जुटाए थे, जिसमें 3.78 करोड़ शेयर ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर आवंटित किए गए थे.
क्यों खास है NSE का इश्यू?
NSE का पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल है. यानी इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है. मौजूदा शेयरहोल्डर्स 12.64 करोड़ शेयर तक बेच रहे हैं और NSE को इस IPO से कोई पैसा नहीं मिलेगा. बेचने वाले शेयरहोल्डर्स में SBI, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, न्यू इंडिया एश्योरेंस और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि यह IPO सीधे तौर पर कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत नहीं करेगा. बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स को बाहर निकलने का मौका ही देगा.
सोनासेलेक्शन इंडिया की हालत भी कुछ खास नहीं है
वहीं, Sonaselection India का IPO अब तक सिर्फ 0.90 गुना ही सब्सक्राइब हुआ है. रिटेल निवेशकों से 1.29 गुना बोलियां मिल चुकी हैं, लेकिन NII कैटेगरी 0.60 गुना और क्यूआईबी कैटेगरी 0.46 गुना पर ही अटकी हुई है. इसका GMP और भी खराब है, जो फिलहाल ₹0 पर बना हुआ है. इसका मतलब है कि ₹99 के ऊपरी प्राइस बैंड पर इसकी लिस्टिंग फ्लैट रहने की संभावना है.
Sonaselection में फ्रेश कैपिटल की एंट्री क्यों अहम है?
NSE के विपरीत सोनासेलेक्शन का पूरा मामला ताजा है, जिसका मतलब है कि पैसा सीधे कंपनी में जाएगा. कंपनी अपने इश्यू का करीब 56.51 फीसदी यानी 80 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में लगाएगी, जबकि करीब 47.55 करोड़ रुपये प्लांट और मशीनरी के विस्तार में खर्च करेगी. इसका मतलब है कि इस IPO से कंपनी अपना कर्ज कम कर सकती है और अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी भी बढ़ा सकती है, हालांकि इसके साथ एग्जीक्यूशन रिस्क भी जुड़ा हुआ है.
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निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
NSE और Sonaselection दोनों अलग-अलग तरह के इन्वेस्टमेंट ऑप्शन हैं. NSE एक बड़े और स्ट्रैटेजिक मार्केट-इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस के लिए एक्सपोजर प्रदान करता है, लेकिन इसकी ऊंची वैल्यूएशन (लगभग ₹4.42 लाख करोड़) और डेरिवेटिव पर निर्भरता जैसे रिस्क फैक्टर्स को समझना महत्वपूर्ण है. जबकि सोनासलेक्शन एक छोटी कपड़ा कंपनी है, जिसका भविष्य कर्ज कटौती, मार्जिन और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा. GMP के मौजूदा संकेतों के मुताबिक, NSE लिस्टिंग को थोड़ा प्रीमियम मिल सकता है, जबकि Sonaselection की लिस्टिंग फ्लैट रह सकती है. ऐसे में निवेशकों को केवल सब्सक्रिप्शन आंकड़ों या GMP के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स, वैल्यूएशन और लॉन्ग-टर्म रिस्क को भी ध्यान में रखना चाहिए.
Desclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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बढ़ती उम्र के साथ भूलना एक आम समस्या है। जैसे हम किसी का नाम भूल जाते हैं, गाड़ी की चाबी रखकर भूल जाते हैं। हालांकि यह समस्याएं याददाश्त से संबंधि है, लेकिन इनका स्तर यह नहीं होता है कि इनको बीमारी माना जाए। बता दें कि यह समस्याएं ओवरथिंकिंग की वजह से होती है। ओवर थिंकिंग भी एक मेंटल समस्या है, जिसको सायकाइट्रिस्ट या सायकोलोजिस्ट की मदद से आराम से ठीक किया जा सकता है।
अल्जाइमर रोग
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह समस्याएं होना नॉर्मल है, तो फिर भूलने की बीमारी क्या है। भूलने की गंभीर बीमारी का अर्थ है कि इस स्थिति में चीजें भूल जाना, आपकी लापरवाही की वजह नहीं होता है या फिर ज्यादा व्यस्तता की वजह नहीं होता है। अगर आपके ब्रेन में हो रहे कुछ ऐसे बदलावों की वजह से होता है, जोकि याददाश्त संबंधी समस्या पैदा कर रहे हैं। अल्जाइमर एक ऐसी समस्या है, जोकि आमतौर पर बुढ़ापे में होती है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अल्जाइमर बीमारी लाइफ को कैसे प्रभावित करती है।
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क्यों होती है भूलने की बीमारी
भूलने की बीमारी का एक बड़ा कारण बढ़ती उम्र भी है। क्योंकि जब उम्र बढ़ने लगती है, तो दिमाग की कोशिकाएं सूखने लगती हैं। जिस कारण ब्रेन में सही मात्रा में ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है। जिस वजह से याददाश्त संबंधी समस्या होने लगती है। हालांकि यह सिर्फ भूलने की बीमारी का एक मात्र कारण नहीं है, बल्कि अन्य कई फैक्टर भी होते हैं।
अल्जाइमर के लक्षण
रखी गई चीजों को जल्दी भूल जाना
रात में नींद न आना
छोटे-छोटे कामों में परेशानी होना
परिवार के सदस्यों को न पहचान पाना
सोचने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होना
डिप्रेशन में रहना और डर जाना।
बचाव के तरीके
हालांकि इस बीमारी का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाता है। लेकिन अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। इस बीमारी के शुरूआती लक्षणों पर लोग ध्यान नहीं देते हैं, जिस कारण यह बीमारी बढ़ती है। ऐसे में अगर किसी को इस तरह के लक्षण दिखें, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
अल्जाइमर से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना चाहिए। लोगों से मिलना-जुलना चाहिए, जिस कारण डिप्रेशन न हो। घर के लोगों को संपर्क में रहना चाहिए, जिस कारण लोगों को पहचानने में परेशानी न हो। अगर घर में पहले से किसी को यह बीमारी है, तो आपको इस पर खास ध्यान देना चाहिए।
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