महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में चुनाव का रिजल्ट आज:सुबह 10 बजे काउंटिंग शुरू होगी, दोपहर बाद परिणाम; BMC पर सबकी नजर
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में हुए चुनाव का रिजल्ट आज आएगा। 893 वार्डों में कुल 15,931 उम्मीदवार मैदान में हैं। काउंटिंग सुबह 10 बजे शुरु होगी। परिणाम दोपहर बाद आने का अनुमान है। सबसे अहम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) है। एक दिन पहले आए तीन एग्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवेसना को 130 से 150 सीटें मिल सकती हैं। बहुमत के लिए 114 की जरूरत है। वहीं कांग्रेस गठबंधन को 60 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य के खाते में 5 से 7 सीटें आ सकती हैं। चार साल देरी से हुए चुनाव, 2022 से टले थे नगर निगम चुनाव हर पांच साल में होते हैं। बीएमसी का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था। ऐसे में अगला चुनाव 2022 में होना था। उस दौरान निर्वाचन प्रक्रिया और वार्ड सीमाओं में बदलाव चल रहे थे। नए वार्ड नक्शे और सीटों का पुनर्विन्यास किया जा रहा था। बीएमसी में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 227 से 236 करने का प्रस्ताव था। इस बदलाव के चलते पुरानी सीटों पर चुनाव करना संभव नहीं था, इसलिए चुनाव टाल दिए गए। हालांकि ये प्रस्ताव पास नहीं हुआ। BMC चुनाव में बीजेपी-शिंदे साथ; कांग्रेस अलग लड़ रही बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों पर चुनाव हुए। भाजपा- शिवसेना (शिंदे गुट) में गठबंधन हैं। बीजेपी 137 सीटों पर लड़ रही है वहीं शिंदे की शिवसेना ने 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उधर शिवसेना यूबीटी ने मनसे के साथ अलांयस किया है। यूबीटी जहां 163 सीटों पर लड़ी वहीं MNS को 52 सीट मिली। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) से गठबंधन किया है। कांग्रेस 143 सीटों पर लड़ रही है वहीं वीबीए को 46 सीट दी गईं हैं। एनसीपी ने किसी के साथ हाथ नहीं मिलाया। अजित गुट वाली ये पार्टी 94 सीटों पर लड़ रही है। BMC चुनाव क्यों है साख का सवाल BMC चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता हासिल करने की लड़ाई है। इसलिए यह महायुति और महाविकास अघाड़ी के लिए साख का सवाल है। 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी BMC पर बिना बंटे शिवसेना ने (1997-2017) तक राज किया था। तब BJP उसकी सहयोगी थी। मुंबई नगर निगम का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के बजट से भी बड़ा है। यही कारण है कि भाजपा, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एकनाथ शिंदे की शिवसेना, कांग्रेस, शरद पवार और अजीत पवार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। चुनावी वादे: बस किराए में 50% छूट तो 1500 महीना का वादा भाजपा गठबंधन ने बीएमसी चुनाव में महिलाओं को BEST बसों में यात्रा करने पर किराए में 50% छूट देने का वादा किया है। वहीं उद्धव–राज ठाकरे अलांयस ने महिला घरेलू सहायकों को ₹1500 महीना और 700 वर्गफुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स फ्री करने की बात कही है। कांग्रेस ने मुंबई की प्रदूषण समस्या और BEST बस सेवा में सुधार का वादा किया है। साथ ही शहर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की बात कही है।
विश्व प्रसिद्ध ॐ पर्वत धीरे-धीरे पड़ रहा काला:हिमालय की चोटियों से बर्फ गायब, पर्यावरणविद् बोले- ऊंचे इलाकों में मानवीय हस्तक्षेप कम करना जरूरी
उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी की कमी के कारण हिमालय काला पड़ता जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित पंचाचूली, हंसलिंग और विश्व प्रसिद्ध ॐ पर्वत सर्दियां में बर्फ की मोटी परत हुआ करती थी, अब नाममात्र की बर्फ के साथ खड़े हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि हिमालय के बदलते मौसम का भी संकेत है। जनवरी का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन अभी तक बर्फबारी नहीं हुई है। दिन में धूप की तपिश के कारण बची हुई बर्फ भी पिघल रही है, जिससे हिमालय की पर्वत श्रृंखला काली नजर आ रही है। पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में जहां इस समय कम से कम दो फीट बर्फ होनी चाहिए थी, वहां धूल उड़ रही है। स्थानीय लोग मौसम की इस बेरुखी से अचंभित हैं, क्योंकि उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी थी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और बर्फबारी नहीं होने का कारण पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) का निष्क्रिय होना है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद ही बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। हालांकि, कुछ दिन यही स्थिति रहने की संभावना है। हिमालय में बर्फबारी की कमी न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। ॐ पर्वत पर भी कम बर्फ ओम पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित है। ओम पर्वत हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश आने वाले श्रद्धालु ओम पर्वत को जरूर देखते हैं। ओम पर्वत की ऊंचाई 5900 मीटर है। ओम पर्वत को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर 3987 मीटर (लगभग 13,080 फीट) की ऊंचाई पर स्थित नाभिढांग से देखा जा सकता है। इस समय इस पर्वत पर चार फीट से अधिक बर्फ होनी चाहिए थी, लेकिन इस चोटी पर नाममात्र की ही बर्फ है। अक्टूबर में हुई थी हल्की बर्फबारी पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में अक्टूबर में हल्का हिमपात हुआ था। तब उम्मीद थी कि इस शीतकाल में मौसम अच्छा रहेगा, लेकिन अक्टूबर के बाद जनवरी पहले सप्ताह में ही हल्की बर्फबारी के बाद मौसम रूठ गया। जो बर्फ गिर भी रही है, वह धूप की तपिश से पिघल जा रही है। नवंबर से शुरू हो जाता था हिमपात गुंजी निवासी तेज सिंह ने बताया कि पांच-छह साल पहले तक नवंबर महीने से बर्फबारी शुरू हो जाती थी। बर्फबारी के कारण फंसने के डर से माइग्रेशन वाले परिवार अक्तूबर के अंतिम सप्ताह तक घाटी की ओर लौट आते थे। इस समय गुंजी में कम से कम दो फीट बर्फ होनी चाहिए थी, लेकिन वहां पर धूल उड़ रही है। अंतिम गांव कुटी में भी बर्फ नहीं है। यही स्थिति धारचूला के दारमा घाटी के गांवों में भी बनी है। पिछले एक से दो दशकों में मौसम में बड़ा बदलाव आया है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस है कारण केवीके पिथौरागढ़ के मौसम विशेषज्ञ डॉ. चेतन भट्ट का कहना है कि बारिश या बर्फबारी नहीं होने का कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस है। पक्षिमी विक्षोभ के निष्क्रिय होने से बारिश नहीं हो रही है। इसके सक्रिय होने के बाद ही बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। कुछ दिन यही स्थिति रहने की संभावना है। उच्च हिमालय में मानव हस्तक्षेप पर्यावरणविद् पद्मश्री बसंती दीदी ने बताया कि वनों को मनमाने तरीके से काट दिया गया। अंधाधुंध तरीके से विकास कार्य हो रहे हैं। पद्मश्री बसंती दीदी ने बताया- उच्च हिमालयी क्षेत्र तक हजारों लोगों की आवाजाही बढ़ी है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने से इस तरह के बदलाव आ रहे हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए वनों और उच्च हिमालय में मानव हस्तक्षेप को कम करना होगा।
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