Responsive Scrollable Menu

सूडान में फिर ढही सोने की खदान, अब तक 11 मजदूरों की मौत; लापता लोगों की तलाश जारी

Sudan Gold Mine Collapses: सूडान में एक बार फिर से सोने की खदान धंसने की खबर है. बताया जा रहा है कि इस घटना में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 30 लोगों को बचाव दल ने रेस्क्यू कर लिया है लेकिन अभी भी कई मजदूर लापता हैं. जिनकी तलाश की जा रही है. बता दें कि इस अफ्रीकी देश में सोने की खदान ढहने के कुछ ही दिनों में ये दूसरा मामला सामने आया है. हादसा रविवार (स्थानीय समय) को हुआ. बता दें कि ये सोने की खदान पूरे सूडान में फैली हजारों छोटी और अवैध खदानों में एक है. बता दें कि इससे पहले पिछले बुधवार (16 सितंबर) को भी सूडान में एक अवैध खदान धंस गई थी. जिसमें 82 लोगों की मौत हुई थी. 

खबर अभी अपडेट हो रही है....

Continue reading on the app

Jharkhand News: खेती के मौसम में नहीं भटकेगा मजदूर, सरकार ला रही है खास रोजगार कैलेंडर

Jharkhand News: गांव के मजदूरों को उनकी खेती के अनुसार साल भर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था तैयार की है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब खेतों में रोपाई या कटाई का पीक सीजन होता है, तब सरकारी योजनाओं के काम शुरू हो जाते हैं, जिससे मजदूरों के सामने असमंजस की स्थिति बन जाती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए अब वीबी-जीराम जी योजना के तहत पूरे राज्य में कृषि कार्यों के अनुकूल ग्रामीण रोजगार कैलेंडर बनाया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग इस पूरी पहल को कृषि विभाग के साथ मिलकर जमीन पर उतारने जा रहा है. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कामगारों को अपने ही क्षेत्र में मौसम और फसल चक्र के हिसाब से नियमित तौर पर मजदूरी मिल सकेगी.

तीन हिस्सों में बंटा राज्य का कृषि भूगोल

योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए पूरे प्रदेश को तीन अलग-अलग कृषि जलवायु जोन में विभाजित किया गया है. किसी भी इलाके में खेती पूरी तरह से वहां की भौगोलिक बनावट, बारिश के पैटर्न और स्थानीय फसलों पर निर्भर करती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य को मध्य व उत्तर-पूर्वी पठारी, पश्चिमी पठारी और दक्षिण-पूर्वी पठारी जोन में बांटा गया है. हर हिस्से की अपनी अलग मिट्टी, अलग मौसम और अलग जरूरतें हैं. इस नए वर्गीकरण से प्रशासन को यह तय करने में आसानी होगी कि किस समय किस जिले में सरकारी निर्माण या मिट्टी के काम शुरू कराने हैं और किस समय मजदूरों को खेतों में काम करने की छूट देनी है.

मध्य और उत्तर-पूर्वी पठारी क्षेत्र की रूपरेखा

मध्य एवं उत्तर-पूर्वी पठारी क्षेत्र में राज्य के सबसे अधिक जिले शामिल किए गए हैं. इस जोन के भीतर रांची, बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, कोडरमा, पाकुड़, रामगढ़ और साहिबगंज आते हैं. इस पूरे इलाके में मानसून आमतौर पर सामान्य समय पर या कभी-कभी थोड़ा पहले सक्रिय हो जाता है. यहां के ग्रामीण इलाकों में धान और मौसमी सब्जियों की बड़े पैमाने पर खेती होती है. इस जोन के लिए बनने वाले कैलेंडर में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि जब मानसून सक्रिय हो, तब मजदूरों पर अन्य निर्माण कार्यों का दबाव न रहे, बल्कि वे आसानी से अपनी फसलों की देखरेख कर सकें.

पश्चिमी पठारी क्षेत्र की चुनौतियां और योजना

राज्य का पश्चिमी पठारी हिस्सा भौगोलिक दृष्टि से थोड़ा अलग है और यहां अक्सर सूखे के हालात बन जाते हैं. इस जोन में गढ़वा, पलामू, लातेहार, गुमला, लोहरदगा, खूंटी और सिमडेगा जैसे जिलों को रखा गया है. इस क्षेत्र में बादलों के आने और बरसने का समय बाकी इलाकों से बिल्कुल अलग रहता है. यहां पानी की कमी के चलते किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए इस इलाके के लिए बनने वाले रोजगार कैलेंडर में जल संरक्षण, तालाब निर्माण और चेकडैम जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी. जब खेतों में काम नहीं होगा, तब मजदूरों को इन संरचनाओं के निर्माण में लगाकर उन्हें लगातार आमदनी दी जा सकेगी.

दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र में पहले शुरू होगा काम

दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र के अंतर्गत तीन प्रमुख जिले पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां आते हैं. इस भूभाग की खासियत यह है कि यहां प्री-मानसून और मानसून की बारिश बाकी क्षेत्रों की तुलना में पहले दस्तक देती है और अच्छी मात्रा में होती है. बारिश जल्दी शुरू होने के कारण यहां खेतों की तैयारी और बुवाई भी समय से पहले शुरू हो जाती है. इसलिए इस क्षेत्र का कैलेंडर इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि बारिश शुरू होने से पहले ही जरूरी सामुदायिक कार्य पूरे कर लिए जाएं और जैसे ही खेती का दौर शुरू हो, लोग अपने खेतों में व्यस्त हो सकें.

श्रम उपलब्धता के आधार पर तय होंगे काम के दिन

इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत इसका व्यावहारिक स्वरूप है. जब तीनों जोन की स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन पूरा हो जाएगा, उसके बाद वीबी-जीराम जी योजना के तहत कार्यों की रूपरेखा तय होगी. इसमें यह देखा जाएगा कि किस महीने में गांव में मजदूर खाली बैठे हैं और किस महीने में वे खेती में पूरी तरह जुटे हुए हैं. जहां श्रम की उपलब्धता अधिक होगी, वहां तत्काल प्रभाव से विकास कार्यों को मंजूरी दी जाएगी. इस तालमेल से गांवों से होने वाले पलायन पर रोक लगेगी और किसानों को भी अपने खेतों के लिए आसानी से स्थानीय कामगार मिल सकेंगे. आने वाले समय में यह व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक बड़ा कदम साबित होगी.

यह भी पढ़ें: Jharkhand News: हजारीबाग में पॉली हाउस बना किसानों के लिए वरदान, खेती से लाखों का हुआ मुनाफा

Continue reading on the app

  Sports

IND U19 vs AUS U19: यशबर्धन चौहान ने ठोका धमाकेदार शतक, ऑस्ट्रेलिया के सामने लगातार दूसरे मैच में मचाई तबाही

लगातार दूसरे मैच में 17 साल के यशबर्धन चौहान ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की पिटाई जारी रखी. नतीजा ये हुआ कि उन्होंने अपने U19 वनडे करियर का पहला शतक जड़ दिया. Mon, 21 Sep 2026 12:37:00 +0530

  Videos
See all

Maha 360: BRICS के मंच पर महाराष्ट्र की गूंज! ब्रिटेन की संसद में चर्चा | BRICS Summit 2026 #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-21T07:16:39+00:00

BJP Press Conference: कांग्रेस पर जमकर बरसे सुधांशु त्रिवेदी | Congress |Sudhanshu Trivedi |Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-21T07:16:21+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers