मेलोनी बोलीं- इटली में बुर्का और नकाब पर बैन लगाएंगे:अभी दुनिया के 24 देशों में रोक; कहा- स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित होगी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने रविवार को कहा कि स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाई जाएगी। कैबिनेट जल्द इस पर फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी। मेलोनी ने रोम में अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के राष्ट्रीय महोत्सव में यह घोषणा की। नियमों के तहत विदेशी छात्रों के उन पेरेंट्स को इटैलियन भाषा की क्लास करनी होगी, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में घुलने-मिलने में दिक्कत है। कानून बनने के लिए सरकार की मंजूरी के बाद संसद से 60 दिनों के भीतर स्वीकृति जरूरी होगी। अभी फ्रांस और चीन समेत दुनिया के 24 देशों में बुर्का और नकाब पर बैन है। स्कूलों में विदेशी छात्रों के आंकड़े पाबंदियों का असर इटली के स्कूलों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ेगा। शोध संस्थान फोंडाजियोने ISMU के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 9 लाख 30 हजार ऐसे छात्र पढ़ते हैं, जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। ये छात्र देश के सभी छात्रों का करीब 11.6% हैं। पिछले 10 साल में इटली में विदेशी नाबालिगों की संख्या 4.5% घटी है। यूरोप की अदालतों ने बुर्का पर बैन को सही माना यूरोप में अदालतों का मानना है कि समाज में मेलजोल के लिए बुर्का बैन सही है, जबकि मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र इसे महिलाओं की धार्मिक आजादी पर हमला मानते हैं। दूसरी तरफ, इटली की जीडीपी में विदेशी कामगारों का 9% योगदान है और खेती, निर्माण व बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्र इन्हीं पर टिके हैं। मेलोनी सरकार के कड़े नियमों से इन कामगारों का आना-रहना मुश्किल हुआ, तो इटली में मजदूरों की भारी किल्लत हो सकती है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी:सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड, लगातार 1413 दिन से सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर पढ़ें…
प्याज 3 महीने में 82% महंगा, ₹30 से ₹54 किलो:महाराष्ट्र और कर्नाटक से प्याज की सप्लाई में कमी आई; पर कीमतें जल्द कम हो सकती हैं
जून-सितंबर के दौरान देश में प्याज की कीमतें तेजी से उछलीं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा भाव 29.50 रुपए प्रति किलो था। 17 सितंबर को यह बढ़कर 53.78 रुपए प्रति किलो हो गया। यानी करीब साढ़े तीन महीने में ही प्याज की कीमतों में 82.3% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। थोक बाजारों में तेजी और भी ज्यादा रही। 1 जून को थोक बाजार में प्याज का औसत भाव 22.60 रुपए किलो था। 10 सितंबर को यह 46.20 रु. हो गया, फिर 17 सितंबर को 45.68 रु. दर्ज किया गया। इस तरह, जून के मुकाबले थोक भाव लगभग दोगुना हो चुके हैं। इस तेजी की मुख्य वजह महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को हुआ नुकसान और बाजार में उसकी आवक का कम होना है। इसके अलावा, महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों ही राज्यों से प्याज की सप्लाई में कमी आई है। खरीफ की नई फसल बाजार में आने में हो रही देरी से भी सप्लाई पर दबाव है। प्याज के दाम घटाने के सरकारी कदम और असर बफर स्टॉक से राहत: सरकार सस्ते में खरीदा प्याज जमा रखती है और दाम बढ़ते ही इसे ₹35 किलो जैसी सस्ती दरों पर बाजार में उतार देती है ताकि आम जनता को राहत मिले। एक्सपोर्ट पर रोक-टोक: देश में किल्लत होने पर सरकार प्याज के निर्यात पर टैक्स या रोक लगाती है, जिससे देश के अंदर प्याज की कमी न हो। आम आदमी पर असर: सरकारी प्याज से कुछ हद तक जेब पर बोझ कम होता है, लेकिन खुदरा बाजार में दाम ज्यादा होने और नीतियों के बार-बार बदलने से पूरी राहत नहीं मिल पाती। साल के इस समय क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम? हर साल अगस्त से सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण होते हैं: त्योहारी सीजन में मांग का बढ़ना: रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों के कारण खपत बढ़ती है। मौसम और लॉजिस्टिक्स: बारिश की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित होती है और मंडियों तक माल देरी से पहुंचता है। फसल का चक्र: पुरानी फसल का स्टॉक खत्म होने लगता है और नई खरीफ फसल आने में थोड़ा समय होता है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मंडी में प्याज 9 दिन में 9% सस्ती हुई:सरकार ₹35 किलो बेच रही, रिटेल मार्केट में ₹53.92 किलो पहुंची देशभर की मंडियों में पिछले 9 दिन में प्याज की थोक कीमतें 9% तक गिर गई हैं। इससे आने वाले दिनों में रिटेल मार्केट में भी ये सस्ती हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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