Aaj Ka Rashifal 21 September 2026: शनि की राशि में चंद्रमा का प्रवेश, 4 राशियों के लिए भारी है दिन-रिस्क वाले काम न करें
Aaj Ka Rashifal In Hindi: 21 सितंबर, सोमवार को चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि के स्वामी शनिदेव हैं। शनि की राशि में चंद्रमा का प्रवेश शुभ-अशुभ दोनों तरह के फल देता है।
UP Assembly Election 2027: BJP को रोकने के लिए AIMIM चीफ Owaisi ने विपक्षी दलों से मांगा साथ
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिलाने की पेशकश की। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन की घोषणा करने से पहले आगामी दो अक्टूबर तक इंतजार करेगी। ओवैसी ने कानपुर के छावनी क्षेत्र में बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की एक बार फिर सरकार बनने से रोकने के इच्छुक दलों के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम भी नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार बने। अगर आप भाजपा को फिर से सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, तो आइए और एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाइए।’’ ओवैसी ने बिहार में एआईएमआईएम के प्रस्ताव का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों पर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन इसके बजाय उन पर झूठे आरोप लगाए गए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने लोगों से पूछा, ‘‘आपके अखिलेश भैया सत्ता में आए तो (उत्तर प्रदेश में) कितने दंगे हुए?’’ इसके बाद उन्होंने 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों का जिक्र किया और कहा कि लगभग 50 हजार लोग अपने घरों और गांवों से विस्थापित हो गए थे।
ओवैसी ने सपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के शासन में मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक तथा शैक्षिक समस्याओं का हल नहीं किए जाने और उन्हें समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने मतदाताओं से राज्य में एआईएमआईएम की राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने का आग्रह करते हुए कहा कि मुसलमानों को उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक आवाज की जरूरत है। ओवैसी ने मदरसों को लेकर भाजपा सरकार के कदमों की भी आलोचना की और स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम धर्मगुरुओं और धार्मिक विद्वानों की भूमिका का जिक्र किया।
उन्होंने कानपुर के मदरसों के इतिहास का हवाला दिया और आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मुस्लिम उलमा ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा जारी किया था।
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