इस हफ्ते कटरा से हरिद्वार के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन, ऐसा रहेगा रूट और शेड्यूल
रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उत्तर रेलवे के जम्मू डिवीजन ने सोमवती अमावस्या के अवसर पर तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी के कटरा और हरिद्वार के बीच एक विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा और हरिद्वार के बीच चलने वाली विशेष ट्रेन, ट्रेन नंबर 04606 के रूप में चलेगी, जबकि हरिद्वार से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के लिए वापसी सेवा ट्रेन नंबर 04605 के रूप में चलेगी।
वैष्णो देवी-हरिद्वार स्पेशल ट्रेन का विस्तृत शेड्यूल
- गाड़ी संख्या 04606 वैष्णो देवी-हरिद्वार स्पेशल ट्रेन रविवार, 14 जून को श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन से शाम 06:15 बजे छूटेगी और अगले दिन सोमवार, 15 जून को सुबह 06:30 बजे हरिद्वार पहुंचेगी। इस सफर को पूरा करने में लगभग 12 घंटे 15 मिनट का समय लगेगा।
- गाड़ी संख्या 04606 हरिद्वार-वैष्णो देवी स्पेशल ट्रेन सोमवार, 15 जून को हरिद्वार से शाम 05:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन मंगलवार, 16 जून को सुबह 07:00 बजे श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंचेगी। इस सफर में करीब 13 घंटे 40 मिनट का समय लगेगा।
रूट और प्रमुख स्टेशन (Stoppages)
यह विशेष ट्रेन रास्ते में शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर), जम्मू तवी, पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लुधियाना जंक्शन, अंबाला कैंट, सहारनपुर जंक्शन और रुड़की स्टेशनों पर रुकेगी।
कितने कोच होंगे
इस स्पेशल ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 16 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- जनरल (General) कोच
- स्लीपर क्लास (Sleeper Class)
- एसी थ्री-टियर (AC 3-Tier)
- एसी टू-टियर (AC 2-Tier)
नोट- यात्री इन स्पेशल ट्रेनों के ठहराव की विस्तृत जानकारी रेलवे स्टेशन, रेल मदद नम्बर 139 अथवा ऑनलाइन माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं या फिर www.enquiry.indianrail.gov.in या NTES App पर जाकर भी डिटेल्स प्राप्त कर सकते हैं।
सिर्फ 1 बच्ची को पढ़ाने स्कूल आते हैं मास्टर मिथारी:13 साल से रोज 5 किमी जंगल पार करके आ रहे; सोशल मीडिया पर मिलीं बधाई
आज के समय में एक 55 साल का टीचर अगर रोज घने जंगलों, बारिश, खूंखार जंगली जानवरों और कच्चे रास्तों से बीच सिर्फ एक छात्रा को पढ़ाने स्कूल जाता है तो यह बात किसी आश्चर्य से कम नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र के 55 वर्षीय जीवन मिथारी ऐसे ही टीचर है जो रोज पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करके दूर-दराज के गांव में स्थित स्कूल पहुंचते हैं। जीवन मिथारी कोल्हापुर जिले में गगनबावड़ा तालुका स्थित 'कवलटेक धनगरवाड़ा' के जिला परिषद स्कूल में पिछले 13 साल से टीचर हैं। सिंधुदुर्ग सीमा से सटे इस बेहद दुर्गम गांव में न तो बिजली है और न ही गाड़ियों के जाने का कोई रास्ता। 13 साल से बीहड़ स्कूल में ले रहे क्लास मिथारी के अनुसार, मैं 26 जुलाई 2013 को पहली बार इस स्कूल में आया थाा। तब से लगातार यहीं पढ़ा रहा हूं। हालांकि पहले छात्रों की संख्या ज्यादा थी। कवलटेक धनगरवाड़ा और आसपास के इलाकों में करीब 70–100 परिवार रहते थे। रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग यह गांव छोड़कर शहर चले गए। इस तरह स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार कम होती गई। अब स्कूल में आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है जिसका नाम स्वरा है। स्वरा की छोटी बहन भी उसके साथ स्कूल आती है, क्योंकि गांव में आंगनवाड़ी केंद्र नहीं है। वह अगले साल कक्षा 1 में जाएगी। तब रोज स्कूल में पढ़ने भी आया करेगी। वन अधिकारियों से मिथारी को किया सचेत मिथारी का कहना है कि इस पांच किमी स्कूल तक पैदल आने जाने के दौरान उन्हें वन्यजीवों के इलाके से होकर गुजरना पड़ता है। एक बार बस्ती के पास एक तेंदुए ने एक बछड़े को मार दिया था। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वहां ट्रैप कैमरा लगाया, जिसमें तेंदुए की सैकड़ों तस्वीरें कैद हुईं। वन अधिकारियों ने मिथारी को भी सलाह दी थी कि स्कूल जाते और लौटते समय रास्ते में कहीं भी रुकें या बैठें नहीं। ताने को चुनौती माना और तबादला कराया जीवन मिथारी पहले कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। उनके साथियों ने एक बार तंज किया कि रसूखदार शिक्षक हमेशा सुविधायुक्त इलाकों में नियुक्ति ले लेते हैं, जबकि अन्य टीचर्स को दुर्गम क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। इस ताने को चुनौती की तरह लेते हुए मिथारी ने खुद अपना तबादला इस गांव में करवाया और तब से यही टीचर हैं। सबसे पास स्कूल 11 KM दूर है इस छोटे से गांव में बच्चों के लिए दूसरे स्कूल में जाना आसान नहीं है। धुंडावाडे में सबसे नजदीकी स्कूल करीब 5.5 किलोमीटर दूर है। अगर बच्चे रोज उस स्कूल में जाएंगे तो उन्हें करीब 11 किलोमीटर की यात्रा करनी होगी। मानसून के दौरान यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है। यहां के लोग मुख्य रूप से छोटी खेती, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने और जामुन व करवंद जैसे जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर हैं। किसान अपनी फसलों को गौरों से बचाने के लिए दोहरी बाड़ लगाते हैं। ऐसी दूरदराज की बस्ती में यह स्कूल बच्चों की पढ़ाई के लिए बहुत अहम है। जीवन मिथारी मई 2029 में रिटायर होने वाले हैं। रिटायरमेंट से पहले वे चाहते हैं कि स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए परिसर के चारों ओर चारदीवारी बनें। ------------------------------------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी: ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
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