श्रीदेवी की 2.70 एकड़ जमीन पर फिर छिड़ा विवाद, SC ने बोनी कपूर जाह्नवी-खुशी को भेजा नोटिस
दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित 2.70 एकड़ जमीन से जुड़े पुराने संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियों जाह्नवी कपूर व खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है।
यह कदम मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ उठाया गया है, जिसमें कपूर परिवार को राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर दोबारा सुनवाई कर रहा है।
अदालत ने दिया यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और अरुण पिल्लई की पीठ ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक विवादित जमीन पर जैसी स्थिति है, उसे वैसा ही बनाए रखा जाए। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि इस विवाद को कोर्ट के चक्कर लगाने के बजाय आपसी बातचीत या मध्यस्थता से सुलझाया जाए। इसके लिए हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में बातचीत कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
क्या है 2.70 एकड़ जमीन का विवाद?
यह पूरा विवाद M.C. शिवकामी और उनके भाई M.C. नटराजन की याचिका से शुरू हुआ है। दोनों भाई-बहनों का दावा है कि श्रीदेवी और उनके परिवार द्वारा चेन्नई में खरीदी गई 2.70 एकड़ की इस प्रॉपर्टी के एक हिस्से पर उनका कानूनी अधिकार है। इसी दावे को लेकर वे लंबे समय से अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
मद्रास हाई कोर्ट ने दिया था कपूर परिवार के पक्ष में फैसला
इससे पहले इसी साल 20 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने कपूर परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिवकामी और उनके भाई के सिविल केस को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट का मानना था कि 1988 में हुए जमीन के लेन-देन को इतने सालों बाद चुनौती देना कानून के मुताबिक सही नहीं है, क्योंकि यह मामला समय-सीमा से बाहर हो चुका था।
अब 18 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद शिवकामी भाई-बहनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार से अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत 18 दिसंबर को इस मामले की अगली सुनवाई करेगी, जहां दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
भाई की कलाई पर कब बांधें राखी? रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त के साथ ग्रहण का भी रखें ध्यान
भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बहनें भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीद रही हैं, वहीं भाई भी अपनी बहनों को खास तोहफा देने की तैयारी में हैं। इस बार रक्षाबंधन को लेकर एक राहत वाली बात यह है कि राखी बांधने के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
भद्रा को लेकर हर साल लोगों के मन में सवाल रहता है कि राखी कब बांधें और किस समय राखी बांधने से बचना चाहिए। इस बार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को भाई पूरे दिन अपनी बहनों से राखी बंधवा सकेंगे। हालांकि राहुकाल का समय जरूर ध्यान में रखना होगा।
28 अगस्त को राखी बांधने में नहीं होगी भद्रा की रुकावट
इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। 28 अगस्त को भद्रा खत्म होने के बाद ही राखी का त्योहार मनाया जाएगा। इसलिए बहनें अपने भाई को पूरे दिन राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन पर भद्रा को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस उन परिवारों में रहता है, जहां सुबह ही राखी बांधने की तैयारी होती है। इस बार ऐसे परिवारों के लिए स्थिति आसान है। 28 अगस्त को भद्रा नहीं होने के कारण राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें
28 अगस्त को सुबह 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल के दौरान शुभ काम करने से बचा जाता है। इसलिए इस समय राखी बांधने की बजाय इसके पहले या बाद का समय चुना जा सकता है।
रक्षाबंधन पर अगर परिवार सुबह राखी बांधना चाहता है तो राहुकाल शुरू होने से पहले यह रस्म पूरी की जा सकती है। वहीं, दोपहर 12:07 बजे के बाद भी भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है।
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण
28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन की पूजा व अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस स्थिति में आती है कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती है बल्कि आंशिक भाग को ढकती है तो चंद्रमा का गहरी छाया से ढका भाग ग्रहणग्रस्त दिखाई देता है, इसे आंशिक चंद्र ग्रहण या पार्शियल लुनर इकल्प्सि कहते हैं ।
एक गणितीय अनुमान के अनुसार विश्व की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्या इसे देख सकेगी । 12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के 15 दिन के अंतराल से यह घटना होने पर सोशल मीडिया में बताया जा रहा है कि 15 दिन के अंतर से ग्रहण होना अनिष्ट करता है जबकि वैज्ञानिक तथ्य है कि कोई भी ग्रहण अकेला नहीं होता है। हर ग्रहण जोड़ी के रूप मे 15 दिन के अंतर पर होता है । आज तक जितने भी ग्रहण हुए है उनके 15 दिन के अंतर पर दूसरा ग्रहण होता ही है । इसलिए यह ग्रहण कोई अनोखी घटना नहीं है ।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी धार्मिक मान्यता या शुभ-अशुभ दावे की पुष्टि नहीं करता।
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