Audi EV: ऑडी की सबसे छोटी इलेक्ट्रिक कार ए2 ई-ट्रॉन पेश, जानें कीमत और फीचर्स
Audi EV: ऑडी ने वैश्विक बाजार के लिए अपनी सबसे छोटी इलेक्ट्रिक कार ए2 ई-ट्रॉन को पेश कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह उसका सबसे किफायती इलेक्ट्रिक मॉडल होगा। नई इलेक्ट्रिक हैचबैक दिसंबर 2026 से बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। जर्मनी में इसकी शुरुआती कीमत 38,000 यूरो (करीब 42 लाख रुपये) रखी गई है।
आधुनिक डिजाइन और प्रीमियम केबिन
ऑडी ए2 ई-ट्रॉन के केबिन में पुनर्चक्रित सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 12.8 इंच की टचस्क्रीन और 11.9 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। इसके अलावा, स्पर्श-संवेदनशील दरवाजा नियंत्रणों के साथ नया डिजाइन किया गया स्टीयरिंग व्हील मिलता है।
कार में इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे नियंत्रणों को स्टीयरिंग व्हील के पीछे दिए गए एक छोटे पैनल में रखा गया है। इससे सेंटर कंसोल का लेआउट ज्यादा साफ-सुथरा और उपयोगी हो गया है।
ऑडियो के लिए ए2 ई-ट्रॉन में मानक तौर पर 7-स्पीकर ऑडियो सिस्टम दिया गया है। वहीं, ग्राहक इसे विकल्प के तौर पर 14-स्पीकर सोनोस साउंड सिस्टम और हेड-अप डिस्प्ले के साथ भी खरीद सकते हैं।
चार पावर विकल्प
ऑडी ए2 ई-ट्रॉन को चार अलग-अलग पावर विकल्पों के साथ पेश किया गया है। इसके बेस वेरिएंट में 125 किलोवाट की पावर और 350 न्यूटन-मीटर का टॉर्क मिलता है। वहीं, टॉप-स्पेक वेरिएंट 240 किलोवाट की पावर और 545 न्यूटन-मीटर का टॉर्क पैदा करता है।
सभी वेरिएंट में रियर-व्हील ड्राइव लेआउट दिया गया है। इनमें स्थायी रूप से उत्तेजित समकालिक मोटर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बेहतर प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता मिलने का दावा किया गया है।
646 किमी तक की रेंज
बैटरी की बात करें तो ऑडी ए2 ई-ट्रॉन को वेरिएंट के अनुसार 52 किलोवाट-घंटा, 61 किलोवाट-घंटा और 84 किलोवाट-घंटा के तीन अलग-अलग बैटरी पैक के साथ पेश किया गया है।
बड़े बैटरी पैक वाले वेरिएंट को एक बार पूरी तरह चार्ज करने पर 646 किमी तक की डब्ल्यूएलटीपी रेंज मिलने का दावा किया गया है।
140 किलोवाट वाले वेरिएंट में विकल्प के तौर पर दक्षता पैकेज भी उपलब्ध है। इसके साथ कार की ऊर्जा खपत 12.8 किलोवाट-घंटा प्रति 100 किमी तक बताई गई है। इससे यह अपने वर्ग की ज्यादा ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रिक कारों में शामिल हो सकती है।
कॉम्पैक्ट आकार में ज्यादा जगह
ऑडी ने ए2 ई-ट्रॉन को छोटे आकार के बावजूद ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर खास ध्यान दिया है। कंपनी के अनुसार, इसमें यात्रियों के लिए पर्याप्त जगह वाला केबिन मिलता है। डैशबोर्ड और दरवाजों पर सॉफ्ट-रैप डिजाइन एलिमेंट दिए गए हैं, जो केबिन को प्रीमियम लुक देते हैं।
कार में ऑडी का नया फिडलॉक चुंबकीय स्टोरेज सिस्टम भी मानक तौर पर मिलता है। कनेक्टेड फीचर्स के तौर पर इसमें माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वर्क एजेंट जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं।
कुल मिलाकर, ऑडी ए2 ई-ट्रॉन को कंपनी ने कॉम्पैक्ट डिजाइन, प्रीमियम केबिन, लंबी रेंज और आधुनिक तकनीक के संयोजन के तौर पर पेश किया है। दिसंबर 2026 में बिक्री शुरू होने के बाद यह ऑडी के एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक मॉडल के तौर पर वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाएगी।
(मंजू कुमारी)
Karva Chauth 2024: महिलाओं के लिए क्यों खास है करवा चौथ का व्रत, शास्त्रों में बताया गया है चंद्रमा पूजा का महत्व
Karva Chauth 2024: करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना हेतु रखा जाता है। इस व्रत का नाम करवा चौथ इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन करवा की पूजा की जाती है। ‘करवा’ का अर्थ होता है मिट्टी का बर्तन और ‘चौथ’ का मतलब गणेशजी की प्रिय तिथि, जिस पर इस व्रत का आयोजन होता है। प्रेम, समर्पण और विश्वास के इस अनोखे महापर्व पर मिट्टी के बर्तन यानी करवे की पूजा का विशेष महत्त्व है, जिससे रात्रि में चंद्रदेव को जल अर्पण किया जाता है।
‘रामचरितमानस’ के लंका कांड के अनुसार इस व्रत का एक पक्ष यह भी है कि जो पति-पत्नी किसी कारणवश एक-दूसरे से बिछुड़ जाते हैं, चंद्रमा की किरणें उन्हें अधिक कष्ट पहुंचाती हैं, इसलिए करवा चौथ के दिन चंद्रदेव की पूजा कर महिलाएं यह कामना करती हैं कि किसी भी कारण से उन्हें अपने प्रियतम का वियोग ना सहना पड़े। महाभारत में भी एक प्रसंग है, जिसके अनुसार पांडवों पर आए संकट को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के सुझाव पर द्रौपदी ने भी करवा चौथ का व्रत किया था। इसके बाद ही पांडव महाभारत युद्ध में विजयी रहे।
भक्ति भाव से पूजा के उपरांत व्रत रखने वाली महिलाएं छलनी में से चांद को निहारती हैं। करवा चौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से शुरू होता है और शाम को चांद निकलने तक किया जाता है। इस पर्व में चंद्रमा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाएं दिन भर निर्जला उपवास कर शाम को चंद्रमा निकलने के बाद ही अपना उपवास खोलती हैं। इस दिन चतुर्थी माता और गणेशजी की भी पूजा की जाती है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि सौभाग्य, पुत्र, धन-धान्य, पति की रक्षा एवं संकट टालने के लिए चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का एक अन्य कारण यह भी है कि चंद्रमा औषधियों और मन के अधिपति देवता हैं। उसकी अमृत वर्षा करने वाली किरणें वनस्पतियों और मनुष्य के मन पर सर्वाधिक प्रभाव डालती हैं। दिन भर उपवास के बाद चतुर्थी के चंद्रमा को छलनी की ओट में से जब महिला उसे देखती है, तो उसके मन पर पति के प्रति अनन्य अनुराग का भाव उत्पन्न होता है, उसके मुख और शरीर पर एक विशेष कांति आ जाती है। इससे महिलाओं का रूप और स्वास्थ्य उत्तम और दांपत्य जीवन सुखद हो जाता है।
- अनीता जैन
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