Maharashtra BSc Nursing CAP Round 1 Result 2026: 8,691 छात्रों को सीट अलॉट, इस दिन तक कॉलेज में करना होगा रिपोर्ट
महाराष्ट्र में B.Sc Nursing में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट है। महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए B.Sc Nursing के सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रोसेस (CAP) के पहले राउंड की सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी कर दी है।
राज्य के 295 नर्सिंग कॉलेजों में B.Sc Nursing की कुल 16,770 सीटें हैं। इनमें से CAP Round 1 में 8,691 छात्रों को सीट अलॉट की गई है। वहीं, पहले राउंड के बाद 8,079 सीटें खाली रह गई हैं। ये सीटें एडमिशन प्रक्रिया के अगले राउंड में उपलब्ध रहेंगी।
सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 1,119 छात्रों को सीट
CAP Round 1 में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की कुल 1,180 सीटों में से 1,119 सीटें अलॉट की गई हैं। ये सीटें राज्य के 17 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में दी गई हैं। पहले राउंड के बाद सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 61 सीटें खाली रह गई हैं। इन सीटों को अगले राउंड की काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा।
प्राइवेट कॉलेजों में 7,572 सीट अलॉट
प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों में पहले राउंड के तहत 7,572 छात्रों को सीटें अलॉट हुई हैं। महाराष्ट्र में कुल 278 प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज हैं, जहां B.Sc Nursing की 15,590 सीटें उपलब्ध हैं।
पहले राउंड के बाद प्राइवेट कॉलेजों में 8,018 सीटें खाली हैं। ये सीटें भी CAP के अगले राउंड में एडमिशन के लिए उपलब्ध रहेंगी।
20 सितंबर तक कॉलेज में करना होगा रिपोर्ट
जिन छात्रों को CAP Round 1 में कॉलेज अलॉट हुआ है, उन्हें एडमिशन कन्फर्म करने के लिए 16 सितंबर से 20 सितंबर 2026 तक शाम 5:30 बजे तक अलॉट किए गए कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा।
कॉलेज में रिपोर्टिंग के समय छात्रों को अपने ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स साथ लेकर जाने होंगे। इसके अलावा निर्धारित फीस का भुगतान करने के लिए डिमांड ड्राफ्ट भी जमा करना होगा।
बैंक हॉलिडे होने पर चेक से कर सकते हैं भुगतान
यदि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान बैंक की छुट्टी रहती है, तो छात्र फीस का भुगतान चेक के माध्यम से कर सकते हैं। हालांकि, अगले कार्यदिवस पर इस चेक को डिमांड ड्राफ्ट से बदलना अनिवार्य होगा। यदि छात्र अगले कार्यदिवस पर डिमांड ड्राफ्ट जमा नहीं करता है, तो उसका एडमिशन रद्द किया जा सकता है।
अगले राउंड में मिलेंगी खाली सीटें
CAP Round 1 के बाद सरकारी और प्राइवेट दोनों संस्थानों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। कुल 8,079 सीटें अगले राउंड की एडमिशन प्रक्रिया में उपलब्ध होंगी। जिन उम्मीदवारों को पहले राउंड में सीट नहीं मिली है, उनके लिए अगले CAP राउंड में इन सीटों पर मौका मिल सकता है।
24 घंटे का लॉकडाउन : पूरी तरह सील रहा रोहतक का खरक जाटान गांव, जानिए 300 साल पुरानी परंपरा जब 1 दिन नहीं जलता चूल्हा
हरियाणा के रोहतक जिले में स्थित ऐतिहासिक महम चौबीसी का खरक जाटान गांव इन दिनों सोशल मीडिया पर एक खास वजह से चर्चा में है। आधुनिकता के इस दौर में जहां लोग अपनी पुरानी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, वहीं इस गांव के निवासियों ने 300 साल पुरानी एक ऐसी अनूठी रीत को आज भी संभाल कर रखा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।
भाद्रपद महीने के शनिवार को खरक जाटान के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से 24 घंटे का बंद (लॉकडाउन) रखा। शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू हुआ यह अलगाव शनिवार रात 12 बजे तक चला। इस दौरान न तो कोई ग्रामीण गांव से बाहर गया और न ही किसी बाहरी व्यक्ति को सीमा के भीतर आने दिया गया।
ये है 300 साल पुराने लोकविश्वास और अलगाव की कहानी
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस परंपरा के पीछे एक पुराना लोकविश्वास जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि सदियों पहले गांव में मासूम बच्चों और मवेशियों में एक जानलेवा बीमारी फैल गई थी। उस दौर में गांव में रहने वाले एक साधु ने ग्रामीणों को बीमारी रोकने और संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए एक दिन गांव को आसपास के इलाकों से पूरी तरह अलग रखने की सलाह दी थी।
ग्रामीणों ने साधु की बात मानी और बीमारी खत्म हो गई। इसी व्यावहारिक सोच के बाद से भाद्रपद महीने के शनिवार को गांव बंद रखने की यह परंपरा चली आ रही है।
सीमा पर खींची गई रेखा, रात भर युवाओं ने दिया पहरा
इस बंद को लेकर गांव में पहले ही ढोल बजवाकर मुनादी करवा दी गई थी। शहरों में रहने वाले लोग भी बंद शुरू होने से पहले गांव पहुंच गए। शुक्रवार रात को गांव की सीमा (फिरनी) के आसपास प्रतीकात्मक रेखा खींची गई और रात 12 बजे आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया। गांव की गलियों से लेकर सीमाओं तक युवाओं और ग्रामीणों ने खुद पहरा दिया। आवश्यक कार्य ग्रामीणों ने एक दिन पहले ही निपटा लिए थे।
घरों में बंद रहा चूल्हा
इस दौरान किसी भी घर में भोजन नहीं बनाया गया और न ही चूल्हा जलाया गया। एक दिन पहले तैयार किए गए मीठे पकवान जैसे खीर, मीठी रोटी, सुहाली और गुलगुले ही भोजन के रूप में खाए गए। नमकीन भोजन से पूरी तरह परहेज रखा गया और यह नियम सभी के लिए अनिवार्य था।
हवन, धूनी और मवेशियों की विशेष सेवा
शनिवार सुबह सामूहिक हवन-यज्ञ (धूणा) किया गया और धूनी की आंच पर खीर तैयार कर ग्रामीणों में बांटी गई। पशुओं की सेवा भी इस परंपरा का मुख्य हिस्सा रही। बंद समाप्त होने के बाद पशुओं को आयोजन स्थल पर लाकर पवित्र जल का डाभ से झाड़ा लगाया गया। गलियों और घरों में लोबान, गुग्गल व धूप की धूनी भी दी गई।
गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत का समागम
बंद के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन किया। युवाओं और बच्चों ने कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों में हिस्सा लिया। जोगियों ने गांव में आल्हा और रांझा गाकर सुनाया, जो गांव की सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
एकजुटता और संस्कृति को सहेजा गया
वरिष्ठ भाजपा नेता शमशेर सिंह खरक और ग्रामीणों ने कहा कि खरक जाटान ने बदलते समय के बावजूद अपनी परंपरा को जीवित रखा है। यह आयोजन केवल 24 घंटे के बंद तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की सामूहिक एकजुटता, लोकविश्वास, पशु सेवा और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है।
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