श्रीलंका में भारत की मदद से बनने वाले पहले पुल की रखी गई आधारशिला, कुल 13 पुल बनने हैं
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने रविवार को परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री बिमल रत्नायके के साथ मिलकर मटाले में मोरागाहाकांडा पुल की आधारशिला रखी. यह भारत की अनुदान सहायता से पूरे श्रीलंका में बनाए जाने वाले 13 स्थायी पुलों में से पहला पुल है.
उच्चायुक्त ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ''भारत और श्रीलंका मिलकर संपर्क व्यवस्था को और मजबूत तथा टिकाऊ बना रहे हैं. परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री बिमल रत्नायके के साथ मटाले में मोरागाहाकांडा पुल की आधारशिला रखकर खुशी हुई. यह भारत की अनुदान सहायता से पूरे श्रीलंका में बनाए जाने वाले 13 स्थायी पुलों में से पहला है.''
उन्होंने आगे कहा, ''यह परियोजना चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण और पुनर्वास सहायता का हिस्सा है. यह आपात स्थिति में किए गए मरम्मत कार्यों से आगे बढ़कर स्थायी और मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.''
पिछले सप्ताह श्रीलंका के मन्नार स्थित जिला सामान्य अस्पताल में एक नई दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई के निर्माण का काम भी शुरू हुआ था. इसके लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता मिली है.
इस इकाई की आधारशिला रखने के समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्सा तथा भारत के उच्चायुक्त संतोष झा मौजूद थे. भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस परियोजना के लिए भारत की ओर से 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए का अनुदान दिया जाएगा.
उच्चायुक्त ने एक्स पर लिखा, ''स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, लोगों की जान बचाना! राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्सा के साथ मन्नार के जिला सामान्य अस्पताल में नई दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई की आधारशिला रखने के समारोह में शामिल होकर खुशी हुई.''
उन्होंने आगे कहा, ''भारत के 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए के अनुदान से तैयार होने वाली इस परियोजना के तहत इकाई को जरूरी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे आपात स्थिति में महत्वपूर्ण ‘गोल्डन आवर’ के दौरान मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा.''
उच्चायुक्त ने इस परियोजना को भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी और दोनों देशों की जन-केंद्रित विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का सच्चा प्रमाण बताया.
--आईएएनएस
एएमटी
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Delhi Town Hall: चांदनी चौक के ऐतिहासिक टाउन हॉल का होगा कायाकल्प, बनेगा ग्लोबल हेरिटेज सेंटर
Delhi Town Hall: दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक स्थित टाउन हॉल को अब नए और आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग की नोडल एजेंसी दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के बीच इस संबंध में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए.
एमओयू के तहत ऐतिहासिक टाउन हॉल, प्रेस बिल्डिंग और पार्क का संरक्षण करते हुए पूरे परिसर को ‘ग्लोबल हेरिटेज सेंटर’ के रूप में विकसित करने की योजना है. परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए इसे पर्यटन, संस्कृति और संग्रहालय गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है.
1860 से 1866 के बीच हुआ था निर्माण
चांदनी चौक और शाहजहानाबाद के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित टाउन हॉल का निर्माण वर्ष 1860 से 1866 के बीच हुआ था. यह ग्रेड-I विरासत परिसर है. लंबे समय तक नगर निगम का मुख्यालय भी इसी परिसर से संचालित होता रहा. वर्ष 2010 में निगम मुख्यालय के मिंटो रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में स्थानांतरित होने के बाद से टाउन हॉल परिसर का बड़ा हिस्सा काफी हद तक खाली रहा है. करीब 12,180 वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस ऐतिहासिक परिसर का स्वामित्व दिल्ली नगर निगम के पास ही रहेगा.
विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं का समावेश
परियोजना के तहत भवन की मूल ऐतिहासिक और स्थापत्य पहचान को सुरक्षित रखते हुए एडैप्टिव रीयूज के माध्यम से इसका आधुनिक उपयोग किया जाएगा. प्रस्तावित ग्लोबल हेरिटेज सेंटर में संग्रहालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
चांदनी चौक और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों के नजदीक होने के कारण इस परियोजना से पुरानी दिल्ली के विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक ही परिसर में दिल्ली के इतिहास, संस्कृति और विरासत को जानने-समझने का अवसर मिलेगा.
डीटीटीडीसी तैयार करेगा डीपीआर
एमओयू के तहत डीटीटीडीसी को परियोजना के लिए सर्वे, भवन का स्ट्रक्चरल असेसमेंट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके बाद परियोजना को सार्वजनिक निवेश अथवा पीपीपी मॉडल के जरिए विकसित करने का विकल्प तय किया जाएगा.
परियोजना की नियमित समीक्षा के लिए डीटीटीडीसी और नगर निगम के अधिकारियों का संयुक्त कार्य समूह भी बनाया जाएगा. एमओयू की शुरुआती अवधि 30 वर्ष रखी गई है, जिसे आपसी सहमति से आगे 30 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है.
विरासत सामग्री भी रहेगी सुरक्षित
टाउन हॉल से संबंधित विरासत सामग्री, अभिलेखीय दस्तावेज, कलाकृतियां और ऐतिहासिक रिकॉर्ड नगर निगम के पास ही रहेंगे. परियोजना में केवल भवन के संरक्षण पर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है.
क्या बोलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि चांदनी चौक का ऐतिहासिक टाउन हॉल केवल एक भवन नहीं, बल्कि दिल्ली के समृद्ध इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. सरकार का प्रयास है कि इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य पहचान को सुरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित होने के बाद यह परिसर देश-दुनिया से दिल्ली आने वाले पर्यटकों के लिए पुरानी दिल्ली के इतिहास, संस्कृति और विरासत से परिचित कराने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा.
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने क्या कहा?
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि चांदनी चौक की ऐतिहासिक विरासत दिल्ली की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. टाउन हॉल, प्रेस बिल्डिंग और पार्क को ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित करने से क्षेत्र में विरासत पर्यटन को नया आयाम मिलेगा. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए उन्हें देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक और उपयोगी बनाना सरकार का प्रयास है.
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