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एशियन गेम्स में भारत और श्रीलंका महिला टीम के बीच कब खेला जाएगा गोल्ड मेडल मैच? पाकिस्तान भी जीत सकता है पदक

IND W vs SL W Final: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को दूसरे सेमीफाइनल में 114 रनों के विशाल अंतर से हराकर एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में एंट्री कर ली है. इसी के साथ टीम इंडिया ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है. हालांकि, पूरी उम्मीद है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम अपने गोल्ड मेडल को डिफेंड कर पाएगी. अब गोल्ड मेडल यानी फाइनल मुकाबले में भारत की टक्कर श्रीलंका से होगी. वहीं, सेमीफाइनल में शिकस्त झेलने वाली पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें अब ब्रॉन्ज मेडल के लिए आमने-सामने होंगी, जिससे पाकिस्तान के पास भी इस टूर्नामेंट में पदक जीतने का एक मौका बचा हुआ है.

कब खेले जाएंगे गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले

एशियन गेम्स 2026 में महिला क्रिकेट के दोनों मेडल मुकाबले 22 सितंबर को एक ही दिन खेले जाएंगे. दिन की शुरुआत ब्रॉन्ज मेडल मैच से होगी, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें आमने-सामने होंगी. यह मुकाबला भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे शुरू होगा. इसके तुरंत बाद फैंस को महामुकाबला देखने को मिलेगा, जहां गोल्ड मेडल के लिए भारतीय महिला टीम और श्रीलंका महिला टीम की भिड़ंत होगी. भारत और श्रीलंका का यह फाइनल मैच भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा. 

शेफाली वर्मा ने खेली शतकीय पारी

इस सेमीफाइनल मुकाबले में भारत की स्टार सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा का विस्फोटक अंदाज देखने को मिला. उन्होंने मैदान के चारों तरफ चौके-छक्कों की बरसात करते सिर्फ 49 गेंदों में नाबाद 100 रनों की तूफानी शतकीय पारी खेली. उन्होंने अपनी इस पारी में 9 गगनचुंबी छक्के जड़े और कई बड़े रिकॉर्ड्स भी ध्वस्त कर दिए. शेफाली के इस शतक की बदौलत भारत ने बांग्लादेश को 196 रनों का विशाल लक्ष्य दिया.

जवाब में बांग्लादेशी टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने खुद को सरेंडर कर दिया और पूरी टीम 15.4 ओवरों में सिर्फ 81 रन बनाकर सिमट गई. भारत ने 114 रनों की इस बड़ी जीत के साथ फाइनल का टिकट पक्का किया. गेंदबाजी में भारत के लिए दीप्ति शर्मा और नंदिनी शर्मा ने घातक प्रदर्शन करते हुए 3-3 विकेट चटकाए.

श्रीलंका के चमारी अटापट्टू ने खेली कप्तानी पारी, पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया

एशियन गेम्स 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में श्रीलंकाई कप्तान चमारी अटापट्टू ने अपनी टीम के लिए अकेले दम पर मैच पलट दिया. उनके नाबाद 83 रनों की कप्तानी पारी के दम पर श्रीलंका ने पाकिस्तान को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. इस धमाकेदार जीत के साथ श्रीलंकाई टीम ने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर देश के लिए कम से कम सिल्वर मेडल सुरक्षित कर लिया है. इससे पहले, टॉस जीतकर बैटिंग करने उतरी पाकिस्तानी टीम ने शवाल जुल्फिकार (54 रन) और आयशा जफर (71 रन) के बीच हुई शानदार शतकीय साझेदारी के दम पर 177 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था. हालांकि, चमारी की आतिशी बल्लेबाजी के आगे यह लक्ष्य छोटा साबित हुआ और श्रीलंका ने महज 2 विकेट खोकर 17.5 ओवरों में ही जीत हासिल कर ली. 

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UP Election 2027: यूपी के सीतापुर जिले की 9 सीटों पर किसका है दबदबा, कौन मारेगा बाजी?

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सभी दल अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी भी राज्य की सभी सीटों पर तैयारियां कर रही है. क्योंकि यूपी का चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है. ऐसे में आज हम आपको सीतापुर जिले के राजनीतिक और सामाजिक समीकरण के बारे में बताने जा रहा है. क्योंकि सीतापुर जिले में विधानसभा की कुल 9 सीटें हैं. ऐसे में ये जिला सभी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. सीतापुर में की नौ विधानसभा सीटों में 1. महोली, 2. सीतापुर, 3. हरगांव (अजा / SC), 4. लहरपुर, 5. बिसवां, 6. सेवता, 7. महमूदबाद, 8. सिधौली (अजा / SC) और 9. मिश्रिख (अजा / SC) शामिल है.

सबसे पहले बात करते हैं सीतापुर जिले के ऐतिहासिक और भौगोलिक परिदृश्य के बारे में- उत्तर प्रदेश का सीतापुर जिला नैमिषारण्य की पवित्र भूमि, गोमती और सारंग नदी के उपजाऊ तटों पर बसा है. ये प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ स्थल नैमिषारण्य, चक्रतीर्थ, ऐतिहासिक स्थलों, प्रसिद्ध मंशाराम की बालूशाही और नैमिष के पावन धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अत्यंत प्रतिष्ठित, सामाजिक और रणनीतिक शक्ति केंद्र माना जाता है.

जहां लखनऊ अपनी प्रशासनिक चमक-धमक और अयोध्या अपने धार्मिक इतिहास के लिए जाना जाता है, वहीं सीतापुर अपने समृद्ध कृषि क्षेत्र, गन्ने की पैदावार, पारंपरिक हस्तशिल्प और गहरे सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के कारण प्रदेश के सियासी पटल पर बेहद असरदार भूमिका निभाता है. आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर यूपी के इस रणनीतिक रूप से अहम जिले में भी राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछाने शुरू कर दी है.

सीतापुर न केवल राज्य का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि यहां का विशाल कृषि उत्पादन नेटवर्क, नैमिषारण्य का आध्यात्मिक पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ताना-बाना इसकी पहचान को अटूट मजबूती प्रदान करता है. मिश्रिख के पवित्र तीर्थों से लेकर सीतापुर शहर के व्यापारिक केंद्रों तक, और महोली व हरगांव के उपजाऊ ग्रामीण अंचलों से लेकर लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद और सिधौली तक, सीतापुर की जनता का हर राजनीतिक फैसला लखनऊ की विधानसभा की दिशा और दशा को गहराई से प्रभावित करता है.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस श्रृंखला में आज बात सीतापुर जिले की...

सीतापुर की राजनीति का मिजाज राज्य के अन्य क्षेत्रों से काफी अलग और दिलचस्प है. 9 विधानसभा सीटों वाला यह जिला सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद विविधतापूर्ण है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए किसानों को फसलों का उचित मूल्य, गन्ना भुगतान, आवारा पशुओं की समस्या, कानून-व्यवस्था, नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र का विकास, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के रोजगार के मुद्दे बेहद निर्णायक सिद्ध होते हैं.

ऐतिहासिक रूप से सीतापुर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस का मजबूत जनाधार देखने को मिला है. यहां हमेशा बहुकोणीय और तीखा मुकाबला देखने को मिलता है, जहां जातीय समीकरण और स्थानीय जन-मुद्दे हार-जीत की रेखा तय करते हैं. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के सवाल, तीर्थाटन विकास और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा से चुनावी नतीजों की दिशा तय करते आए हैं.

यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे किसानों की खुशहाली, कृषि विकास, कानून-व्यवस्था, नैमिषारण्य व ग्रामीण क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं का रोजगार के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर सीतापुर जिले की 9 विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दिग्गज का पलड़ा भारी रहा है? और आगामी महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? चलिए समझते हैं...

सीतापुर जिले की आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी आंकड़े
कुल जनसंख्या 44,83,992
पुरुष जनसंख्या 23,75,264
महिला जनसंख्या 21,08,728
ग्रामीण जनसंख्या 88.16%
शहरी जनसंख्या 11.84%
औसत साक्षरता दर 61.12%
पुरुष साक्षरता दर 70.31%
महिला साक्षरता दर 50.67%

2011 जनगणना के अनुसार, सीतापुर की धार्मिक आबादी

 

धर्म प्रतिशत अनुमानित जनसंख्या
हिन्दू 79.29% 35,55,450
मुस्लिम 19.93% 8,93,725
सिख 0.26% 11,611
ईसाई 0.15% 6,579
बौद्ध 0.06% 2,663
जैन 0.03% 1,410

2022 में विधानसभा चुनाव के नतीजे

विधानसभा क्षेत्र उम्मीदवार का नाम पार्टी
1 महोली शशांक त्रिवेदी BJP
2 सीतापुर राकेश राठौर 'गुरु' BJP
3 हरगांव (अजा) सुरेश राही BJP
4 लहरपुर अनिल कुमार वर्मा SP
5 बिसवां निर्मल वर्मा BJP
6 सेवता ज्ञान तिवारी BJP
7 महमूदबाद आशा मौर्य BJP
8 सिधौली (अजा) मनीष रावत BJP
9 मिश्रिख (अजा) राम कृष्ण भार्गव BJP

सीतापुर की सभी सीटों कैसा रहा था 2022 में चुनावी परिणाम?

महोली): सीतापुर जिले की इस विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शशांक त्रिवेदी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ते हुए शानदार बढ़त बनाई थी. इस सीट पर बीजेपी की जीत ने क्षेत्र में पार्टी के संगठन और जनाधार को और अधिक मजबूत साबित किया. क्षेत्रीय मतदाताओं ने क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपना समर्थन दिया था.

सीतापुर सदर: सीतापुर की इस महत्वपूर्ण सदर सीट पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राकेश राठौर 'गुरु' विजयी रहे थे. उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल के साथ था. यह मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला रहा, जिसमें आखिर में बीजेपी उम्मीदवार ने बाजी मारी. इस जीत के साथ ही बीजेपी ने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफलता पाई थी.

हरगांव (अजा): सीतापुर की हरगांव सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हरगांव विधानसभा सीट पर भी बीजेपी उम्मीदवार सुरेश राही ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने चुनाव में अपने विरोधी प्रत्याशियों को पराजित करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की थी. इस जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. क्षेत्र की जनता ने उनके पक्ष में मतदान कर विकास कार्यों और सरकारी नीतियों पर भरोसा जताया था.

लहरपुर: सीतापुर जिले की लहरपुर विधानसभा सीट सीतापुर जिले की उन चुनिंदा सीटों में शामिल रही जहां समाजवादी पार्टी को सफलता मिली. यहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार वर्मा ने शानदार जीत का परचम लहराया था. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को चुनावी मैदान में मात देते हुए सीट पर कब्जा किया. इस सीट पर सपा की जीत ने यह साबित किया कि विपक्षी दल का यहां मजबूत स्थानीय आधार है.

बिसवां: सीतापुर की बिसवां विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में बीजेपी के निर्मल वर्मा ने जीत हासिल की. उन्होंने अपने विरोधियों को पछाड़ते हुए चुनावी वैतरणी पार की और विधानसभा पहुंचे. इस सीट पर भाजपा की रणनीति और स्थानीय समीकरण पूरी तरह से सफल साबित हुए थे. मतदाताओं ने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के समाधान की उम्मीद के साथ बीजेपी प्रत्याशी का समर्थन किया.

सेवता: सीतापुर जिले की सेवता विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के उम्मीदवार ज्ञान तिवारी ने उल्लेखनीय जीत दर्ज की. उन्होंने चुनाव के दौरान विभिन्न मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाते हुए मतदाताओं को अपने पाले में किया. कड़े संघर्ष वाले इस चुनावी मैदान में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया. इस जीत से जिले में एनडीए गठबंधन और भाजपा की स्थिति को और अधिक मजबूती मिली.

महमूदबाद: सीतापुर की इस बेहद अहम और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीट पर बीजेपी की तरफ से मैदान में उतरीं आशा मौर्य विजयी रहीं. उन्होंने यहां के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलते हुए शानदार चुनावी सफलता प्राप्त की. बीजेपी प्रत्याशी की इस जीत को पार्टी की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया. क्षेत्र के विकास और सामाजिक संतुलन के मुद्दों ने इस चुनाव परिणाम को तय करने में बड़ी भूमिका निभाई.

सिधौली (अजा): सीतापुर की ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सिधौली सीट पर भाजपा के मनीष रावत ने जीत का परचम लहराया. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बढ़त बनाई. इस जीत के साथ ही इस सुरक्षित सीट पर लंबे समय बाद राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. स्थानीय जनता ने क्षेत्र के विकास और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बीजेपी के पक्ष में मतदान किया था.

मिश्रिख (अजा): मिश्रिख सुरक्षित विधानसभा सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार राम कृष्ण भार्गव ने विजय हासिल की. उन्होंने अपने विरोधियों को हराकर सीट पर भगवा ध्वज लहराया और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. चुनाव के दौरान यहाँ सुरक्षा, विकास और सामाजिक कल्याण की योजनाएं मुख्य चर्चा का केंद्र रहीं. जनता के भारी समर्थन के चलते भाजपा उम्मीदवार ने यहां एक सुरक्षित और निर्णायक जीत दर्ज की.

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4 दिन के गैप ने बिगाड़ा खेल, आखिरी दो वनडे से बाहर हो सकते हैं जसप्रीत बुमराह और शुभमन गिल

Bumrah-Gill Likely to miss two ODI vs NZ: भारत के आगामी न्यूजीलैंड दौरे पर वनडे और टेस्ट मुकाबलों के बीच केवल चार दिनों का अंतर है. इस तंग शेड्यूल के कारण शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और केएल राहुल जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को अंतिम दो वनडे मैचों से बाहर रहना पड़ सकता है ताकि वे लाल गेंद से अभ्यास कर सकें. ऐसे में श्रेयस अय्यर टीम की कप्तानी संभाल सकते हैं और कोचिंग स्टाफ को भी दो भागों में बांटा जाएगा. प्रबंधन से सलाह न लेने पर शेड्यूल पर सवाल खड़े हो रहे हैं. Sun, 20 Sep 2026 19:43:55 +0530

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