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INDW VS BANW: टीम इंडिया ने टॉस जीतकर चुनी बल्लेबाजी

INDW VS BANW Toss Update: एशियन गेम्स 2026 का दूसरा सेमीफाइनल मैच भारतीय महिला क्रिकेट टीम और बांग्लादेश के बीच खेला जा रहा है. इस मैच में जब टॉस के लिए सिक्का उछला, तो भारत के पक्ष में गिरा. जहां, टॉस जीतकर टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है. नतीजन, अब बांग्लादेश की टीम पहले गेंदबाजी करने मैदान पर उतरेगी. 

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मात्र 250 रुपए से संवार सकते हैं बच्चे का भविष्य! जानिए NPS वात्सल्य स्कीम में क्यों बढ़ रही निवेशकों की रुचि

बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए शुरू की गई एनपीएस वात्सल्य योजना तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है. अगस्त 2026 तक इस योजना से जुड़े खातों की संख्या 4 लाख के पार पहुंच गई है. यह बढ़ती संख्या दिखाती है कि अब बड़ी संख्या में माता-पिता कम उम्र से ही अपने बच्चों के लिए दीर्घकालिक निवेश की योजना बना रहे हैं.

मार्च 2026 तक जुड़े 2.15 लाख बच्चे

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक योजना से जुड़े बच्चों की संख्या लगभग 2.15 लाख थी, जबकि एक वर्ष पहले मार्च 2025 में यह आंकड़ा करीब 1.07 लाख था. इससे साफ है कि पिछले एक साल में एनपीएस वात्सल्य को लेकर लोगों की दिलचस्पी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. बता दें कि एनपीएस वात्सल्य योजना के तहत माता-पिता या अभिभावक अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं. इस योजना की खास बात यह है कि निवेश की शुरुआत केवल 250 रुपए से की जा सकती है, जबकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है.

कौन-कौन कर सकता है बच्चों के खातों में पैसे जमा?

योजना में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि रिश्तेदार और मित्र भी बच्चे के खाते में राशि जमा कर सकते हैं. इसका उद्देश्य बच्चों के लिए लंबी अवधि का निवेश कोष तैयार करना और कम उम्र से वित्तीय अनुशासन की आदत विकसित करना है. आंकड़ों के अनुसार, एनपीएस वात्सल्य में सबसे बड़ी हिस्सेदारी स्कूल जाने वाले बच्चों की है. 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे कुल खाताधारकों का करीब 36.9 प्रतिशत हिस्सा हैं. इसके बाद 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत है.

15-19 साल तक के बच्चों की 21 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी

वहीं, 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कुल खाताधारकों का लगभग 68.5 प्रतिशत हिस्सा हैं. यह संकेत देता है कि माता-पिता बच्चों की पढ़ाई के शुरुआती वर्षों से ही उनके भविष्य के लिए निवेश करना पसंद कर रहे हैं. एनपीएस वात्सल्य एक मार्केट-लिंक्ड निवेश योजना है, जिसमें जमा राशि को बाजार से जुड़े विभिन्न निवेश साधनों में लगाया जाता है. अलग-अलग पेंशन फंड अपनी निवेश रणनीति के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, चुनी गई योजना के आधार पर इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश की हिस्सेदारी काफी अधिक हो सकती है. यही कारण है कि यह योजना लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ संपत्ति निर्माण का अवसर प्रदान करती है. हालांकि यह योजना लंबी अवधि के निवेश के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में आंशिक निकासी की भी अनुमति है.

तीन साल बाद 25 फीसदी निकाल सकते हैं पैसा

नियमों के अनुसार, खाता खुलने के तीन वर्ष बाद जमा मूल राशि का 25 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है. इस सुविधा का उपयोग शिक्षा, चिकित्सा उपचार या कुछ विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है. हालांकि निवेश से मिलने वाले रिटर्न को इस सीमा में शामिल नहीं किया जाता. एनपीएस वात्सल्य की एक बड़ी खासियत यह है कि बच्चे के वयस्क होने के बाद भी निवेश जारी रखा जा सकता है. 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद खाते को निर्धारित नियमों के तहत आगे चलाया जा सकता है और 21 वर्ष की आयु तक बनाए रखा जा सकता है.

बाद में इसे सामान्य नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) खाते में भी बदला जा सकता है. यह सुविधा इसे बच्चों के लिए उपलब्ध कई पारंपरिक बचत उत्पादों से अलग बनाती है. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीएस वात्सल्य को अन्य निवेश विकल्पों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पूरक साधन के रूप में देखना चाहिए. जहां पीपीएफ एक सुरक्षित और सरकार समर्थित बचत योजना है, वहीं म्यूचुअल फंड निवेशकों को अधिक लचीलापन और अपेक्षाकृत आसान निकासी की सुविधा देते हैं. दूसरी ओर, एनपीएस वात्सल्य का फोकस लंबी अवधि की संपत्ति निर्माण और रिटायरमेंट-आधारित वित्तीय अनुशासन विकसित करने पर है.

लंबी अवधि के लिए करें प्लान

इसलिए निवेश का चुनाव करते समय यह समझना जरूरी है कि धन की आवश्यकता कब पड़ेगी. यदि लक्ष्य लंबी अवधि का है, तो एनपीएस वात्सल्य एक आकर्षक विकल्प हो सकता है. पेंशन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव भी तेजी से हो रहे हैं. हाल के महीनों में एनपीएस योजनाओं को अधिक पारदर्शी और समझने योग्य बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे निवेशकों को योजनाओं के जोखिम, रिटर्न और शुल्क की तुलना करने में आसानी होगी. साथ ही, डिजिटल तकनीकों के उपयोग से खाता खोलने की प्रक्रिया भी काफी आसान हुई है. कुछ मामलों में एनपीएस खाता कुछ ही सेकंड में खोले जाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

ऐसे में, कम निवेश राशि, लंबी अवधि का दृष्टिकोण, बाजार आधारित वृद्धि की संभावना और भविष्य में एनपीएस में बदलाव की सुविधा जैसे कारणों से एनपीएस वात्सल्य तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जो माता-पिता बच्चों के लिए लंबी अवधि का फंड तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है.

स्रोत- आईएएनआएस

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