IIT बॉम्बे सुसाइड-पिता ने जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाया:कहा- टीचर ने बेटे को गलत केस में फंसाने की कोशिश की; क्राइम ब्रांच मामले की जांच करेगी
IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। उन्होंने शुक्रवार शाम कहा ने हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। पिता के मुताबिक, साहिल के टिचर सूर्यनारायण दुल्ला उन्हें जातिसूचक गालियां दीं और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने दुल्ला के खिलाफ केस दर्ज किया है। साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था। वह एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में BTech सेकंड ईयर का छात्र था। परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ घंटे बाद साहिल की मौत हुई थी। छात्रों के प्रदर्शन के बीच मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं टाली गईं घटना के बाद 400 से ज्यादा छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बाद में डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने छात्रों से मुलाकात की। छात्रों के विरोध के बीच मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं टाल दी गई हैं। संस्थान ने छात्र की मौत पर गहरा दुख जताया है और मामले की जांच की जा रही है। IIT बॉम्बे में स्टूडेंट वेलनेस सेंटर मौजूद IIT बॉम्बे में छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए स्टूडेंट वेलनेस सेंटर (SWC) मौजूद है। यहां छात्र पर्सनल काउंसलिंग और तनाव से निपटने में मदद ले सकते हैं। इसके लिए wellness@iitb.ac.in पर ईमेल या 022-2576-9070 पर फोन करके समय लिया जा सकता है। अगर कोई छात्र बात-बात पर चिड़चिड़ा हो रहा है, पढ़ाई छोड़ रहा है, खुद को कमरे में बंद रखता है, कम खाता-सोता है या हमेशा निराशा भरी बातें करता है, तो यह भारी मानसिक तनाव की निशानी है। 5 साल में 65 छात्रों ने सुसाइड किया RTI डेटा के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच देश के IITs में कुल 65 छात्रों ने आत्महत्या की। 2025 में अकेले 15 मामले थे। इन पांच वर्षों में IIT Kharagpur में सबसे ज्यादा 11 मामले दर्ज हुए। यह RTI पिछले साल IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने लगाई थी। वे IIT छात्रों के लिए ग्लोबल मेंटरिंग नेटवर्क चलाते हैं। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… IIT दिल्ली स्टूडेंट के सुसाइड पर बवाल:कमरा न मिलने से परेशान था, प्रोजेक्ट भी रूके, छात्रों ने किया कक्षा का बहिष्कार, गेट के बाहर प्रदर्शन बेगूसराय के ऋषिकेश कुमार ने 22 अगस्त को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के कैंपस में सुसाइड कर लिया। उसने IIT दिल्ली के लेक्चरर हाल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। पूरी खबर पढ़ें…
बंगाल उपचुनाव- रेजीनगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार गिरफ्तार:पुलिस ने 5 साल पुराने झड़प के केस में पकड़ा; इससे पहले कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार हुआ था
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को पुलिस ने बहरामपुर से शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो गुटों में हुई झड़प के मामले में हुई है। सैफुल इस्लाम हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से जुड़े हैं। यह गिरफ्तारी कांग्रेस के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुई है। मिलन प्रधान को जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन से जुड़े करीब दो दशक पुराने मामले में पकड़ा गया था। नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। ये सीटें 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद खाली हुई थीं। AJUP नेता नकली नोट और हथियारों के साथ गिरफ्तार अधिकारियों के मुताबिक, AJUP के प्रदेश सचिव आशिक इकबाल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। मुर्शिदाबाद जिले में पुलिस पिकेट पर वाहन जांच के दौरान उन्हें पकड़ा गया। उनके पास बड़ी मात्रा में नकली नोट और अवैध हथियार मिले। इकबाल के साथ यात्रा कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस प्रत्याशी 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान हुए एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में उनके खिलाफ पहले से वारंट भी जारी हुआ था। फिलहाल उन्हें 3 अक्टूबर तक कस्टडी में भेजा गया है। रेजीनगर से ममता के प्रत्याशी फिर पलटे जीनगर में TMC उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार सुबह 10 बजे चुनाव से हटने का ऐलान किया, लेकिन करीब 3 घंटे बाद ही दोपहर एक बजे यूटर्न ले लिया। रबीउल ने सुबह हटने का ऐलान करते वक्त पार्टी का पुराना चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घासफूल’ नहीं मिलने और नया चिह्न ‘फुटबॉल प्लेयर’ मिलने को इसकी वजह बताया था। हालांकि, ममता बनर्जी से बातचीत के बाद रबीउल ने कहा, "मैं चुनाव लड़ूंगा।" इससे एक दिन पहले नंदीग्राम में भी ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। TMC के दोनों गुटों का नया नाम-सिंबल, ममता सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी ने TMC का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने शुक्रवार को अपनी याचिका में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पक्षकार बनाया है। इससे एक दिन पहले 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों TMC गुटों को मूल नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोकते हुए अलग-अलग नाम और सिंबल दिए थे। अब दोनों गुट उपचुनाव में नई पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे। ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ सिंबल मिला, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल आवंटित किया गया। TMC के नाम और सिंबल को लेकर विवाद क्यों? TMC में विवाद मई के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद शुरू हुआ। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना। स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दे दी। इसके बाद पार्टी में 28 साल में पहली बार टूट हो गई। विवाद बाद में संसद तक पहुंचा। 20 लोकसभा सांसदों ने काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग ग्रुप के रूप में खुद को पेश किया और BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन किया। इसके बाद दोनों गुटों ने TMC के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिन्ह पर दावा किया। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पुराने नाम और सिंबल इस्तेमाल करने से रोक दिया। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ममता बनर्जी की पार्टी का नाम 'ममता टीएमसी': सिंबल फुटबॉल प्लेयर; बागी गुट 'डेमोक्रेटिक टीएमसी' कहलाएगा बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से 18 दिन पहले चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
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