सायरा बानो का 70s का रोमांटिक गाना, जिसमें हर किसी को दिखता है अपना अतीत, लता मंगेशकर की आवाज में हुआ अमर
70 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों में कुछ गीत ऐसे हैं, जो वक्त के साथ और गहरे होते चले गए. फिल्म ‘बैराग (1976)’ का गीत ‘छोटी सी उम्र में’ भी उन्हीं अमर रचनाओं में शामिल है. ये गाना आज भी प्यार की पहली नजर के दर्द और दीवानगी को बयां करता है. लता मंगेशकर की मधुर और भावपूर्ण आवाज में ये गाना दिल को छू जाता है.आनंद बख्शी के गहरे बोल 'छोटी सी उम्र में लग गया रोग' और कल्यानजी-आनंदजी की दिलकश धुन ने इसे सदाबहार क्लासिक बना दिया. फिल्म में दिलीप कुमार और सायरा बानू के बीच का रोमांटिक-ट्रैजिक मोमेंट, जहां छोटी उम्र में ही इश्क का रोग लग जाता है, हर सुनने वाले को उदास-सी खुशी देता है.। ये सॉन्ग 70s के बोल्ड लव एक्सप्रेशन का बेहतरीन उदाहरण है, जो आज भी हर ब्रेकअप और फर्स्ट लव की याद दिलाता है.
90s का सबसे यादगार सैड लव सॉन्ग, जब प्यार दर्द बनकर हर सुर में बहा, आज भी रुला देता है कुमार सानू का ये गाना
90 के दशक की रोमांटिक फिल्मों की बात हो और दर्द भरे गानों का जिक्र न आए, ऐसा मुमकिन नहीं. ‘राजा हिंदुस्तानी’ का सुपरहिट गाना ‘तेरे इश्क में नाचेंगे’ आज भी टूटे दिलों की आवाज माना जाता है.यह गाना सिर्फ एक मेलोडी नहीं, बल्कि प्यार में मिले धोखे, बेबसी और दर्द का खुला इजहार है. आमिर खान और करिश्मा कपूर पर फिल्माया गया यह गाना कहानी के उस मोड़ पर आता है, जहां मोहब्बत सवालों के घेरे में होती है और दिल टूटने का एहसास हर फ्रेम में झलकता है. कुमार सानू की आवाज में इस गाने का दर्द सीधे दिल तक पहुंचता है. नदीम-श्रवण का संगीत और समीर के लिखे बोल इस गाने को और गहराई देते हैं. बारिश, टूटे जज्बात और तड़प. सब मिलकर इसे सदाबहार सैड लव सॉन्ग बना देते हैं, जो आज भी उतना ही असरदार है जितना पहली बार था. ये गाना सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि प्यार में मिलने वाले दर्द और उम्मीद की गहरी कहानी है. 90 के दशक का ये क्लासिक आज भी हर उदास शाम का साथी बन जाता है.
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