एआई-171 विमान हादसा: पायलटों के संगठन ने ‘बोइंग 787’ के तकनीकी रिकॉर्ड की व्यापक जांच की मांग की
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) से एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 के बोइंग 787 विमान हादसे की चल रही जांच में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और एवियोनिक्स से जुड़े सभी सबूतों की व्यापक जांच करने की मांग की है।
एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने एक पत्र में कहा कि विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उपलब्ध सभी तकनीकी जानकारियों की जांच की जानी चाहिए।
पायलटों के संगठन ने उन कई पत्रों और तकनीकी नोट्स का भी जिक्र किया, जो उसने पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और जांच एजेंसी को दिए थे। इनमें बोइंग 787 विमानों में सामने आई इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी समस्याओं और जून 2025 में विमान वीटी-एएनबी के साथ हुए हादसे से उनके संभावित संबंध का मुद्दा उठाया गया था।
एफआईपी ने कहा कि जांच एजेंसी को फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी की ओर से दी गई तकनीकी सामग्री की भी सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए। बताया गया है कि इसमें विमान के संचालन के इतिहास, रखरखाव, बार-बार सामने आई सिस्टम संबंधी गड़बड़ियों और खराबी के संकेतों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
पायलटों के संगठन के मुताबिक, एएआईबी ने यह जानकारी मिलने और ब्रिटेन के एएआईबी विशेषज्ञ के जरिए इसकी समीक्षा किए जाने की बात स्वीकार की है।
एफआईपी के अनुसार, बोइंग 787 में अत्यधिक एकीकृत मोर इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में बिजली उत्पादन, बिजली वितरण, निगरानी और डेटा नेटवर्क जैसी प्रणालियां विमान के सुरक्षित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संगठन का कहना है कि बार-बार सामने आने वाली तकनीकी खराबियों, बीच-बीच में होने वाली विफलताओं, बिजली आपूर्ति में रुकावट, सॉफ्टवेयर रीसेट, सेंसर से जुड़ी गड़बड़ियों और रखरखाव के दौरान सामने आई समस्याओं के रिकॉर्ड की एक साथ जांच करने से हादसे के कारणों का पता लगाने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
एफआईपी ने विमान के पुराने रखरखाव और विश्वसनीयता से जुड़े डेटा की विस्तार से समीक्षा करने की मांग की है। इसमें टेक्निकल लॉग की एंट्री, बाद में ठीक किए जाने के लिए छोड़ी गई खराबियां, बार-बार आने वाली खराबियों की रिपोर्ट, समस्या का पता लगाने से जुड़े रिकॉर्ड, बदले गए उपकरणों, विश्वसनीयता की निगरानी से जुड़े डेटा और विमान की सेवा अवधि के दौरान इंजीनियरिंग स्तर पर किए गए सुधारों की जानकारी शामिल है।
फेडरेशन ने इलेक्ट्रिकल पावर उत्पादन और वितरण प्रणाली, इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर एवियोनिक्स, फ्लाइट मैनेजमेंट और फ्लाइट-कंट्रोल कंप्यूटर, बैटरी सिस्टम, पावर-कंट्रोल यूनिट और विमान के डेटा नेटवर्क की भी गहराई से जांच करने की मांग की है।
एफआईपी ने कहा कि जांचकर्ताओं को फ्लाइट रिकॉर्डर से मिली जानकारी का एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम, एसीएआरएस ट्रांसमिशन, मेंटेनेंस डेटाबेस, बिल्ट-इन टेस्ट इक्विपमेंट की रिपोर्ट और विमान निर्माता कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड से मिलान करना चाहिए। इससे हादसे के कारणों की जांच में विभिन्न तकनीकी पहलुओं को एक साथ समझने में मदद मिल सकती है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'सेमीकॉन 2026' में 10 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान, कंपनियों में दिख रहा उत्साह
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। सेमीकॉन 2026 में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर कंपनियों के बीच बढ़ती रूचि और निवेश को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। लिंडे इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलंद साधुखान ने कहा कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के लिए देश में माहौल तेजी से तैयार हो रहा है।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान करीब 10 अरब डॉलर के निवेश और कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) से जुड़े प्रयास सामने आए हैं।
मिलंद साधुखान ने कहा कि सेमीकॉन 2026 को लेकर कंपनियों में काफी उत्साह है। उद्योग जगत में निवेश और परियोजनाओं को लेकर गति दिखाई दे रही है। उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर क्षेत्र के प्रमुख प्लेयर्स के संपर्क में है। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई नए और उभरते प्लेयर भी सामने आ रहे हैं, जो पैकेजिंग, टेस्टिंग और असेंबली से जुड़ी सुविधाएं स्थापित करने की तैयारी में हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जा रहे प्रोत्साहन और कई राज्यों की ओर से इन प्रोत्साहनों के अनुरूप सहयोग देने की इच्छा से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है। केंद्र द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं को राज्यों की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराने में दिखाई जा रही रूचि आने वाले समय में इस क्षेत्र की विकास यात्रा को और गति दे सकती है।
ओडिशा में कटक और भुवनेश्वर के बीच करीब 178 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित नए औद्योगिक और सेमीकंडक्टर केंद्र को लेकर भी साधुखान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि परियोजना से जुड़े शुरुआती चरण में ही निवेश और कई एमओयू सामने आए हैं। उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में सेमीकंडक्टर और औद्योगिक विकास को लेकर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि लिंडे इंडिया ओडिशा में औद्योगिक गैस की प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनियों में शामिल है और कंपनी राज्य में हो रहे नए विकास को लेकर सक्रिय रूप से जुड़ना चाहती है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से जमीन और आवश्यक बुनियादी ढांचे को लेकर सहयोग मिल रहा है, जिससे उद्योगों के लिए परियोजनाएं स्थापित करना आसान हो सकता है। कंपनी ने गोपालपुर में एक और जमीन सुरक्षित की है और कटक से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा जारी है। कंपनी ओडिशा को लेकर सकारात्मक है और राज्य में सेमीकंडक्टर तथा औद्योगिक गैस से जुड़े विकास में सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। केंद्र और राज्य सरकारों के प्रोत्साहन, नए निवेश और उद्योगों की बढ़ती भागीदारी के चलते भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की विकास प्रक्रिया आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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