Chhatron Ki Goonj: इंदौर में राहुल गांधी का छात्रों से संवाद, शिक्षा से आरक्षण तक कई मुद्दों पर खुलकर हुई बातचीत, बोले- सिस्टम को स्टूडेंट नहीं, अंधभक्त चाहिए
इंदौर: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होकर छात्रों एवं युवाओंं से संवाद किया। वहीं, युवाओं ने भी राहुल गांधी के सामने मंच पर खुलकर अपनी समस्याएं एवं मांगें रखीं। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस सिस्टम को स्टूडेंट नहीं चाहिए बल्कि अंधभक्त चाहिए। कार्यक्रम में करीब 20 से 25 हजार युवा पहुंचे।
राहुल गांधी ने कहा कि अलग-अलग शहरों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और उनके भविष्य को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। इनमें पेपर लीक, संस्थागत विफलता, बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षा की बढ़ती लागत और निजीकरण जैसे विषय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का सिस्टम पर भरोसा कम हुआ है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद छात्रों ने जवाब देते हुए कहा, सर, हम सिस्टम से हार गए हैं।
System vs Students
स्टूडेंट्स के भविष्य को सिस्टम कैसे चैलेंज कर रहा है- आज ‘छात्रों की गूंज’ में हम इस जरूरी मुद्दे पर बात करेंगे।
: नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी जी
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दबाव में हैं छात्र, सिस्टम को लेकर उनकी आवाज सुनना जरूरी: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि अगर आज हम स्टूडेंट्स से बात करें तो वे खुश नहीं हैं। स्टूडेंट्स असहज हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा और वे दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और यह समझने की जरूरत है कि वे सिस्टम को लेकर क्या सोचते हैं। उन्होंने आगे कहा कि स्टूडेंट्स के मन में परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल हैं। वे जानना चाहते हैं कि परीक्षाओं पर भरोसा कैसे किया जाए? कैसे सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित हो रही है? साथ ही, यह कैसे पता चले कि किसी परीक्षा में चयन की प्रक्रिया निष्पक्ष और सही तरीके से हुई है?
राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल कर साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने कहा कि अंधभक्त’ कहते हैं कि विकास की आवश्यकता नहीं है। देश को आजादी नहीं मिली है। मोदी जी विष्णु के अवतार हैं। लेकिन अंधभक्त कभी सवाल नहीं पूछते। एक अंधभक्त कभी नहीं पूछेगा कि हमारे स्कूल और कॉलेज की हालत ऐसी क्यों हो गई है। हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों खराब हो गया है? हमारे पेपर क्यों लीक हो रहे हैं? एक स्टूडेंट ही है जो यह आवाज उठाता है।
राहुल ने कहा कि जहां स्टूडेंट मोहब्बत की बात करता है और प्यार व सम्मान से बात करता है, वहां अंधभक्त नफरत फैलाता है। जहां स्टूडेंट हम्बल होता है, दूसरों की बात सुनता है वहां अंधभक्त अहंकार से भरा और एरोगेंट होता है। उन्होंने कहा कि जहां स्टूडेंट डरता नहीं है और निडर होता है वहां अंधभक्त डरपोक होता है।
राहुल गांधी ने एमपी और यूपी में 55 फीसदी स्कूल बंद होने का किया दावा
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में एक बड़ा दावा भी किया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि देश में निजीकरण से करीब एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं। इनमें 55 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में बंद हुए हैं। इसके बाद उन्होंने छात्रावास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हर 100 छात्रों में से सिर्फ 14 छात्रों की ही जगह मिल पाती है। उन्होंने इस दौरान कई उदाहरण भी दिए। राहुल गांधी ने कहा कि असली मुद्दा निजीकरण और कॉस्ट-कटिंग का है जो उनके अनुसार “सबका साथ, मेरा विकास” के नारे के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जब सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कम निवेश करती है, तो इसका सीधा असर छात्रों पर पड़ता है और उनका भविष्य प्रभावित होता है।
छात्रों ने मंच से राहुल गांधी के सामने रखी अपनी बात
एक छात्र ने कार्यक्रम के मंच पर आकर राहुल गांधी से बात की। छात्र ने बताया कि वह सतना जिले के बिंद का निवासी है। उसने बताया कि बिंद वह इलाका है जहां पढ़ाई का स्तर बहुत खराब है। ऐसे में ज्यादातर बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओंं की तैयारी के लिए भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में आना पड़ता है लेकिन गरीब परिवारों के बच्चे पैसों की आर्थिक तंगी की वजह से तैयारी के लिए बाहर नहीं जा पाते हैं। छात्र ने कहा कि हर वर्ग के छात्र को शिक्षा मिलनी चाहिए क्योंकि यह उनका हक है।
इसके अलावा, मंच पर पहुंची एक छात्रा ने राहुल गांधी के सामने आरक्षण का मुद्दा रख दिया। राजगढ़ की सपना गुर्जर ने राहुल गांधी से संवाद करते हुए कहा कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने 14 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। यह पूरे प्रदेश में लागू भी है। सरकार बदलते ही बीजेपी सरकार ने हमारे 13 प्रतिशत पद पर कोर्ट का हवाल देकर हमारी सारी नियुक्त होल्ड कर दी है। पिछले 8 साल से हमारे 10 हजार पदों पर होल्ड लगा दिया है।
“मध्य प्रदेश की BJP सरकार बीते कई साल से युवाओं के साथ धोखा कर रही है और जानबूझकर उन्हें गुमराह कर रही है।”
राजगढ़ जिले की सपना गुर्जर जी ने ‘छात्रों की गूंज’ में नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी जी को BJP की करतूत बताई।
सुनिए ???? pic.twitter.com/yy72xQrs3s
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राहुल गांधी का पीएम मोदी समेत नेताओं पर निशाना, छात्रों के साथ ली सेल्फी
बता दें कि कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत अन्य नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से सवाल किए। वहीं कार्यक्रम में मौजूद छात्रों ने भी राहुल गांधी के सामने अपनी समस्याएं और मांगें खुलकर रखीं। कार्यक्रम के समापन के बाद राहुल गांधी ने डोम के अंदर मौजूद छात्रों के साथ सेल्फी ली और छात्रों से भी उनके साथ सेल्फी लेने के लिए कहा।
BJP-RSS के system को students नहीं, अंधभक्त चाहिए। pic.twitter.com/wzZVh1bFo0
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रोहित के लॉर्ड्स शतक से VVS लक्ष्मण से विवाद तक... जानें क्यों 2027 वर्ल्ड कप से पहले अजीत अगरकर ने छोड़ा चीफ सेलेक्टर पद
भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने अपने पद से हटने का फैसला कर लिया है. हालांकि उनका कार्यकाल 4 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन उन्होंने आगे एक्सटेंशन न लेने और पद छोड़ने की इच्छा बोर्ड को जता दी है. 2027 वनडे वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट के इस सबसे बड़े प्रशासनिक पद से अगरकर के अलग होने की खबरों ने पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है. इस हाई-प्रोफाइल विदाई के पीछे कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर उपजा ड्रामा और बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ बढ़ते मतभेद मुख्य कारण माने जा रहे हैं.
रोहित शर्मा का भविष्य और 2027 वर्ल्ड कप का प्लान
अजीत अगरकर और बीसीसीआई के बीच दरार की सबसे मुख्य वजह पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के वनडे क्रिकेट में भविष्य को लेकर शुरू हुआ विवाद था. 2027 वनडे वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए, अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति भविष्य की टीम तैयार करना चाहती थी. अगरकर यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को मौका देना चाहते थे. हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में रोहित द्वारा बनाए गए 138 रनों के शानदार शतक ने पूरी स्थिति बदल दी.
बीसीसीआई का यू-टर्न और अगरकर की नाराजगी
रोहित शर्मा के लॉर्ड्स में लगाए गए शतक के बाद, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया था. उन्होंने कहा था कि रोहित तब तक भारत के लिए खेलते रहेंगे, जब तक वे टीम की योजनाओं में फिट बैठते हैं. बोर्ड ने मुख्य चयनकर्ता को भरोसे में लिए बिना ही मीडिया के सामने खुलकर रोहित का समर्थन कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड के इस यू-टर्न और सोशल मीडिया के दबाव में आकर लिए गए फैसले से अजीत अगरकर काफी आहत और नाराज थे.
???? THE REASON OF AJIT AGARKAR'S EXIT AS CHIEF SELECTOR ????
— Tanuj (@ImTanujSingh) September 19, 2026
- The drama surrounding the future of Rohit Sharma and the ever growing differences with CoE head VVS Laxman became the main reasons for Chief selector Ajit Agarkar & the BCCI to part ways ahead of the 2027 WC. (PTI). pic.twitter.com/fdnY0IAqDT
CoE प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ नीतिगत मतभेद
रोहित शर्मा के विवाद के साथ-साथ, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर CoE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस चीफ वीवीएस लक्ष्मण के बीच भी नीतिगत मतभेद चल रहा था. इन दोनों दिग्गजों में कई बातों को लेकर ठन गई थी, जिसमें सबसे बड़ा सिरदर्द खिलाड़ियों की चोट थी. चयन समिति इस बात से बेहद परेशान थी कि चोटिल स्टार खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट और उनकी वापसी की सही तारीख बताने में लक्ष्मण की अगुवाई वाली CoE पूरी तरह नाकाम साबित हो रही थी.
वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया की बेस्ट प्लेइंग इलेवन को ही मैदान पर उतारने के पक्ष में थे, जबकि अगरकर का मानना था कि एशियन गेम्स जैसे छोटे टूर्नामेंट्स में स्टार खिलाड़ियों को भेजने की कोई जरूरत नहीं है. इसी बीच, जब टॉप प्लेयर्स की एक बेहद सीक्रेट इंजरी लिस्ट मीडिया में लीक हो गई, तो चयन समिति और CoE के बीच का आपसी भरोसा पूरी तरह से खत्म हो गया.
रिव्यू मीटिंग से अगरकर की दूरी बनी विदाई का आखिरी ट्रिगर
इस पूरे ड्रामे का आखिरी मोड़ तब आया, जब इंग्लैंड के खिलाफ खराब प्रदर्शन के बाद बीसीसीआई ने मुंबई में एक जरूरी समीक्षा बैठक बुलाई. मुख्य चयनकर्ता होने के नाते इस मीटिंग में अजीत अगरकर का रहना बेहद जरूरी था, लेकिन वे इसमें ऑनलाइन भी शामिल नहीं हुए. हालांकि, BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने यह कहकर उनका बचाव किया कि वे शहर से बाहर थे, लेकिन बीसीसीआई का एक बड़ा खेमा इसे अगरकर के असहयोग और बोर्ड के साथ उनके खत्म हो चुके रिश्तों की आखिरी निशानी मान रहा था.
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