Shimla में HPU गेट पर SFI और ABVP कार्यकर्ताओं में हिंसक भिड़ंत, 5 छात्र अरेस्ट
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शनिवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद पांच छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, विश्वविद्यालय के द्वार के पास दोनों छात्र संगठनों के सदस्य कथित तौर पर आपस में भिड़ गए, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
एबीवीपी के कैंपस अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने आरोप लगाया कि एसएफआई कार्यकर्ताओं ने नए छात्रों का स्वागत करने के लिए द्वार के पास मौजूद एबीवीपी सदस्यों पर हमला कर दिया। उन्होंने दावा किया कि एसएफआई के कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और उन्होंने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर हथियारों से हमला किया, जिससे उनके लगभग पांच कार्यकर्ता घायल हो गए। ठाकुर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस घटना में कथित रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं, एसएफआई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर उसके सदस्यों पर हमला करने का आरोप लगाया। संगठन ने आरोप लगाया कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार शाम को एसएफआई के एक छात्र को रोका और उसे परेशान किया, तथा शनिवार को एसएफआई कार्यकर्ताओं पर हथियारों से हमला किया। एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और परिसर में छात्रों की पर्याप्त सुरक्षा की मांग की है।
शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
Rahul Gandhi का बड़ा हमला: System को सवाल पूछने वाले Students नहीं, सिर्फ अंधभक्त चाहिए
मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छात्रों को लगता है कि जिस व्यवस्था को उनकी मदद और सुरक्षा के लिए, और विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की रक्षा के लिए बनाया गया है, वही उन पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिस्टम के ख़िलाफ़ है। यह सिस्टम क्या है? इस सिस्टम की कई परतें हैं। सबसे ऊपर छह लोग बैठे हैं जो इसे चलाते हैं।
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राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी—वह डराने-धमकाने, छात्रों की पिटाई, कील लगी लाठियों के इस्तेमाल और पैलेट गन चलाने जैसे काम संभालते हैं; अमित शाह जी इसे चलाते हैं; वह इसे लागू करने वाले (enforcer) हैं। ये हैं अजीत डोभाल जी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। अनौपचारिक बातचीत में वह कहते हैं कि भारत को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ़ 500 लोगों को कंट्रोल करना काफ़ी है। उन्होंने भारत के टेलीफ़ोन, WhatsApp और Facebook कम्युनिकेशन पर कंट्रोल कर लिया है; वह फ़ोन टैपिंग करवाते हैं और जानकारी अमित शाह जी और नरेंद्र मोदी जी तक पहुँचाते हैं।
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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीच में मोहन भागवत जी हैं, जो विचारधारा का काम देखते हैं; उनके संगठन को स्कूल, कॉलेज और संस्थान चलाने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये मिलते हैं। फिर, एक तरफ़ अडानी जी हैं और दूसरी तरफ़ अंबानी जी... सिस्टम ने हर संस्थान में अपने ही लोगों को बिठा रखा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम को छात्रों से खतरा महसूस होता है। क्यों? क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं। एक छात्र पूछता है कि अमित शाह का बेटा क्रिकेट एसोसिएशन का चेयरमैन कैसे बना। एक छात्र पूछता है कि कैसे दो लोगों ने भारत के पूरे बिज़नेस जगत पर कब्ज़ा कर लिया। एक छात्र पूछता है कि न्यायपालिका और दूसरी संस्थाएं अपना काम करने में क्यों नाकाम रहती हैं, या चुनाव आयोग अपनी ज़िम्मेदारियां क्यों नहीं निभा रहा है। इसीलिए सिस्टम को छात्र नहीं चाहिए; उसे 'अंधभक्त' चाहिए। अंधभक्त, छात्र का ठीक उल्टा होता है। जहाँ छात्र सवाल पूछता है और जिज्ञासु रहता है, वहीं अंधभक्त अपनी ही एक काल्पनिक दुनिया में जीता है। जहाँ छात्र निडर होता है, वहीं अंधभक्त डरपोक होता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'अंधभक्त' कहते हैं कि विकास की ज़रूरत नहीं है। मोदी जी विष्णु के अवतार हैं। लेकिन अंधभक्त कभी सवाल नहीं पूछते। अंधभक्त कभी यह नहीं पूछेगा कि हमारे स्कूलों और कॉलेजों की हालत ऐसी क्यों हो गई है। हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों चरमरा गया है? हमारे पेपर क्यों लीक हो रहे हैं? छात्र ही वह व्यक्ति है जो इस मुद्दे पर आवाज़ उठाता है।
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