BJP MLA Rajeshwar Singh ने की नए Tort Law की मांग, Law Minister को लिखा पत्र
उत्तर प्रदेश के विधायक राजेश्वर सिंह ने मांग की है कि जिस तरह ब्रिटिश काल के तीन आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय कानून लाए गए, उसी तरह नागरिक दायित्व से जुड़ी लापरवाही के पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए औपनिवेशिक काल के अपकृत्य कानून (लॉ ऑफ टॉर्ट्स) की जगह नया कानून बनाया जाए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता राजेश्वर सिंह ने शनिवार को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पत्र लिखकर उनसे व्यापक ‘भारतीय सिविल रॉन्ग्स एंड कंपनसेशन कोड’ शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विधि आयोग से सिफारिशें प्राप्त करने के बाद इसे कानून का रूप दिया जा सकता है।
उन्होंने पत्र में कहा है, ‘‘एक विकसित राष्ट्र को केवल दोषी को दंडित ही नहीं करना चाहिए, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के जीवन को भी फिर से संवारना चाहिए।’’ लखनऊ की सरोजिनी नगर विधानसभा सीट से विधायक ने पत्र में लिखा है, ‘‘गलत कामों के लिए सजा देने वाले कानून को आधुनिक बनाने के बाद, मेरा मानना है कि अब उन नतीजों की भरपाई करने वाले कानून को भी आधुनिक बनाने का समय आ गया है। इसे कानूनविदों के बीच अपकृत्य कानून के नाम से जाना जाता है।’’ भारत ने 2024 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य कानून की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व अधिकारी सिंह ने मेघवाल से इस मामले को समयबद्ध रिपोर्ट के लिए विधि आयोग के पास भेजने का आग्रह किया।
उन्होंने इसके बाद विशेषज्ञ समिति द्वारा इसका विश्लेषण और सभी हितधारकों के साथ देशव्यापी परामर्श कराने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने गलत कामों के लिए सजा देने वाले कानून को आधुनिक बनाया है। अब उन गलत कामों के परिणामों की भरपाई करने वाले कानून को भी आधुनिक बनाने का समय आ गया है।
जहां नुकसान हुआ है, वहां न्याय का अर्थ केवल फैसला सुनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी भरपाई करना भी होना चाहिए।’’ सिंह ने तर्क दिया कि भारत में नागरिक दायित्व से जुड़े अलग-अलग कानून तो हैं, लेकिन कोई समग्र कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि 1988 का मोटर वाहन अधिनियम, 2019 का उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और 1991 का लोक दायित्व बीमा अधिनियम जैसे कई अलग-अलग कानून हैं, लेकिन मौत से जुड़े दावों, डेटा उल्लंघन, साइबर धोखाधड़ी और बड़े हादसों के बढ़ते मामलों में जिस व्यापक और समग्र कानून की जरूरत है, उसका अभाव है। उन्होंने कहा कि यही वह ‘‘समग्र कानून’’ है, जिसकी कमी महसूस होती है।
सिंह ने लिखा है कि खुले नाले में गिरकर जान गंवाने वाले व्यक्ति की पत्नी, लापरवाहीपूर्ण इलाज से नुकसान उठाने वाले मरीज, कारखाने के अपशिष्ट से फसल नुकसान का सामना करने वाले किसान, बैंक की सुरक्षा में चूक के कारण ठगी का शिकार हुए पेंशनभोगी, ऑनलाइन ‘डीपफेक’ प्रसारित होने से प्रभावित हुई युवती या पुलिस की ज्यादती से नुकसान उठाने वाले व्यक्ति के परिवार को पांच स्पष्ट सवालों के जवाब चाहिए। उन्होंने लिखा कि ये पांच सवाल हैं—दावा किसके खिलाफ किया जाए, किस मंच पर किया जाए, कितने समय के भीतर किया जाए, कितनी राशि के लिए किया जाए और मामले के फैसले तक अंतरिम सहायता के तौर पर क्या उपलब्ध है। सिंह ने लिखा, ‘‘नागरिकों के लिए नागरिक क्षति संहिता (सिविल रॉन्ग्स कोड) केवल एक उपाय नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार का भी एक प्रभावी साधन है।
जब किसी विभाग को पता होता है कि लापरवाही की एक कीमत चुकानी होगी, तो वह उसे रोकने के लिए कदम उठाना शुरू कर देता है। यह संहिता जवाबदेही को भी मजबूत करेगी।
SpiceJet की घरेलू और International Flights लेट, Delhi Airport पर फंसे रहे 500+ यात्री
ऑपरेशनल दिक्कतों की वजह से दिल्ली से स्पाइसजेट की कई उड़ानें देर से चलीं, जिससे 500 से ज़्यादा यात्री प्रभावित हुए। कम से कम चार घरेलू और एक इंटरनेशनल उड़ान पर इसका असर पड़ा; इनमें लेह, जम्मू और दुबई जाने वाली उड़ानें शामिल थीं। सूत्रों ने बताया कि लेह जाने वाली कुछ उड़ानों के लिए चेक-इन स्टाफ़ दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 पर सुबह करीब 2.30 बजे ड्यूटी पर नहीं पहुँचा, जिससे यात्रियों के चेक-इन की प्रक्रिया प्रभावित हुई। बाद में स्पाइसजेट ने बताया कि प्रभावित उड़ानें रवाना हो चुकी थीं और अपनी मंज़िल पर पहुँच गई थीं। स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा 19 सितंबर, 2026 को दिल्ली से लेह जाने वाली स्पाइसजेट की उड़ानें SG121 और SG127, और दिल्ली से जम्मू जाने वाली उड़ान SG2160 ऑपरेशनल कारणों से देर से चलीं। ये उड़ानें रवाना हो चुकी हैं और अपनी मंज़िल पर पहुँच भी गई हैं। स्पाइसजेट यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करती है।
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लेह जाने वाली फ़्लाइट्स में कई घंटों की देरी हुई
असर वाली फ़्लाइट्स में दिल्ली से लेह जाने वाली SG127 भी शामिल थी, जिसे सुबह 4.50 बजे रवाना होना था। सूत्रों के मुताबिक, यह फ़्लाइट आखिरकार सुबह करीब 9 बजे रवाना हुई, जिससे चार घंटे से ज़्यादा की देरी हुई। खबरों के मुताबिक, लेह जाने वाली फ़्लाइट के लिए चेक-इन का इंतज़ार कर रहे यात्री इस देरी के बीच समझ नहीं पा रहे थे कि किससे संपर्क करें। सूत्रों ने बताया कि कुछ यात्री परेशान हो गए, जिसके बाद ड्यूटी मैनेजर को बुलाया गया और स्थिति को काबू में किया गया। इसके बाद फ़्लाइट के लिए चेक-इन की प्रक्रिया शुरू हुई। दिल्ली से लेह जाने वाली स्पाइसजेट की दो और फ़्लाइट्स पर भी असर पड़ा। फ़्लाइट SG121 सुबह 6.10 बजे और SG125 सुबह 8.45 बजे रवाना होने वाली थी। सूत्रों के मुताबिक, टर्मिनल 1 से सुबह 7.40 बजे रवाना होने वाली एयरलाइन की दिल्ली-जम्मू फ़्लाइट SG2160 भी एक घंटे से ज़्यादा देर से रवाना हुई।
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दिल्ली-दुबई फ़्लाइट भी देर से रवाना हुई
यह दिक्कत सिर्फ़ घरेलू उड़ानों तक ही सीमित नहीं थी। टर्मिनल 3 से चलने वाली स्पाइसजेट की दिल्ली-दुबई फ़्लाइट SG5111 सुबह 7.45 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन उसमें भी देरी हुई। फ़्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दिल्ली-दुबई फ़्लाइट आख़िरकार सुबह 9.42 बजे रवाना हुई। सूत्रों के मुताबिक, टर्मिनल 1 से लेह जाने वाली तीन और जम्मू जाने वाली एक फ़्लाइट प्रभावित हुईं, जिससे लगभग 450 यात्री प्रभावित हुए। इंटरनेशनल फ़्लाइट में देरी की वजह से प्रभावित यात्रियों की कुल संख्या और बढ़ गई। सुबह होते-होते प्रभावित घरेलू फ़्लाइट्स रवाना हो चुकी थीं, और दिल्ली-दुबई सर्विस भी अपनी मंज़िल के लिए निकल चुकी थी।
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