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भारत बड़े बदलाव के दौर में, जीडीपी 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद: अजित डोभाल

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजित डोभाल ने शनिवार को कहा कि अगले दो दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी मौजूदा स्तर (लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर) से बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

आईआईटी रुड़की में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए एनएसए डोभाल ने कहा कि ग्रेजुएट देश के विकास के एक बड़े बदलाव वाले दौर में कदम रख रहे हैं और आने वाले सालों में वे अलग-अलग सेक्टर में बड़े बदलाव देखेंगे।

एनएसए डोभाल ने कहा कि भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं और देश एक शानदार भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि भारत की मौजूदा जीडीपी 4.015 ट्रिलियन डॉलर है और अगले 20 सालों में इसके 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

2047 में भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले के समय के लिए सरकार के विजन का जिक्र करते हुए डोभाल ने कहा कि देश एक शानदार अमृत काल से गुजर रहा है, जिसमें विकास और इनोवेशन के कई मौके हैं।

एनएसए ने छात्रों से अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी में हिम्मत और पक्का इरादा दिखाने की भी अपील की।

हिंदू पौराणिक कथाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने भगवान राम का उदाहरण दिया और कहा कि ऋषि विश्वामित्र ने बुराई का सामना करने के लिए उन्हें उनकी हिम्मत और मजबूत चरित्र की वजह से चुना था।

एनएसए डोभाल ने अपने शुरुआती करियर की बातें भी साझा कीं। उन्होंने सिक्किम में अपनी पोस्टिंग के दौरान का एक अनुभव बताया, जहां एक शेरपा ने उन्हें सफलता के तीन सिद्धांत सिखाए थे।

एनएसए डोभाल के अनुसार, लोगों को सबसे पहले अपनी मौजूदा स्थिति को समझना चाहिए, फिर अपनी मंजिल को साफ तौर पर तय करना चाहिए और आखिर में अपने लक्ष्यों तक पहुंचने और सफलतापूर्वक वापस आने के लिए जरूरी रास्ते की पहचान करनी चाहिए।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल-जून तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का स्वागत किया। उन्होंने इसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद और लोगों की सामूहिक कोशिशों का सबूत बताया।

सरकार ने बार-बार अमृत काल फ्रेमवर्क के तहत अपने लंबे समय के विकास एजेंडे के एक अहम आधार के तौर पर लगातार आर्थिक विस्तार का जिक्र किया है।

--आईएएनएस

एमएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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DUSU Election Result: टेनिस कोर्ट से डूसू की सत्ता तक, जानें कौन हैं डीयू छात्रसंघ के प्रमुख यश डबास

DUSU Election Result: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू चुनाव 2026 के नतीजे सामने आ चुके हैं और इस बार कैंपस की राजनीति में बेहद दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है. छात्र राजनीति के सबसे बड़े मंच पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष पद की सबसे अहम कुर्सी अपने नाम कर ली है. हर एक दौर की गिनती के साथ बदलती स्थिति और सांस रोक देने वाली लड़ाई के बाद यश डबास ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के प्रत्याशी विजय शंकर मीणा को हराकर शानदार जीत दर्ज की है. इस चुनाव में जहां यश डबास ने अपनी खेल भावना और मजबूत संगठनात्मक पकड़ से सबको प्रभावित किया, वहीं दूसरी तरफ उपाध्यक्ष पद पर एक निर्दलीय छात्र नेता ने बड़े राजनीतिक दलों के सारे समीकरण बिगाड़ दिए.

टेनिस कोर्ट से छात्र राजनीति के अखाड़े तक

डूसू के नए अध्यक्ष बने यश डबास की पहचान केवल एक छात्र नेता के रूप में ही नहीं है, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक मंझे हुए टेनिस खिलाड़ी भी रहे हैं. दिल्ली के बाहरी इलाके कंझावला के रहने वाले यश डबास ने खेल की दुनिया में देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और सर्बिया जैसे देशों में आयोजित प्रतिष्ठित इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन की प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. इसके अलावा उन्होंने खेलो इंडिया, सीबीएसई नेशनल्स, स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रतियोगिताओं और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. खेल के मैदान से सीखी गई अनुशासन और अंतिम समय तक डटे रहने की कला ने उन्हें डूसू के इस कड़े मुकाबले में जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई.

कानून की पढ़ाई और छात्र राजनीति का लंबा सफर

खेल के साथ ही यश डबास पढ़ाई के क्षेत्र में भी हमेशा आगे रहे हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद उन्होंने डीयू के कैंपस लॉ सेंटर से वकालत यानी एलएलबी की डिग्री पूरी की. वर्तमान में यश बौद्ध अध्ययन विभाग से एमए की पढ़ाई कर रहे हैं. वे पिछले छह वर्षों से एबीवीपी के साथ जुड़कर एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में कैंपस में सक्रिय रहे हैं और लगातार छात्रों की बुनियादी समस्याओं पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.

विवादों को पछाड़कर छात्रों का जीता भरोसा

चुनाव प्रचार के दौरान यश डबास को कई राजनीतिक हमलों का भी सामना करना पड़ा था. उनके नाम की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर एक मार्कशीट को लेकर अफवाह फैलाई गई और विरोधियों ने उन पर फर्जी मार्कशीट के गंभीर आरोप लगाए. हालांकि यश और उनके संगठन ने इसे चुनाव से पहले की गई साजिश बताया. डीयू के आम छात्र छात्राओं ने भी विरोधियों के इस अभियान को नकार दिया और यश के विजन पर भरोसा जताया. अपने चुनावी अभियान में यश ने छात्राओं की सुरक्षा के लिए पिंक बूथ, कैंपस में एक हजार सीसीटीवी कैमरे लगाने और वामिका सुरक्षा वैन तैनात करने जैसे वादे किए. इसके साथ ही उन्होंने हॉस्टल, परीक्षा सुधार और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर बड़ी जीत हासिल की.

बस कंडक्टर के बेटे दीपांशु ने भी मारी बाजी

डूसू चुनाव 2026 की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर उपाध्यक्ष पद से आई. यहां पीरागढ़ी गांव के रहने वाले दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरकर दोनों बड़े संगठनों को मात दे दी. दीपांशु के पिता बस कंडक्टर हैं और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. भगत सिंह कॉलेज से पढ़े और वर्तमान में बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र दीपांशु ने पहले एनएसयूआई से टिकट मांगा था. जब संगठन ने उनका नाम वापस लेने को कहा, तो उन्होंने बगावत कर दी और बिना किसी पार्टी के समर्थन के मैदान में उतर गए. सत्य निकेतन हादसे के बाद जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिला, उन्होंने जूते न पहनने का संकल्प लिया था. उनके इसी जुझारू तेवर ने उन्हें निर्दलीय ही उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचा दिया.

रिया छाबड़ी को मिली सचिव पद पर जीत

इस बार के चुनावी मुकाबले में एबीवीपी ने अन्य पदों पर भी मजबूत चेहरे उतारे थे. सचिव पद पर पार्टी ने बदरपुर के मोड़बंद गांव की रहने वाली रिया छाबड़ी को मौका दिया, जो किसान परिवार से आती हैं और इंटर कॉलेज स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं. वे श्री अरबिंदो कॉलेज की छात्रा हैं.

लक्ष्यराज सिंह ने संयुक्त सचिव पर हासिल की जीत

वहीं संयुक्त सचिव पद के लिए राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले लक्ष्यराज सिंह को मैदान में उतारा गया. लक्ष्यराज अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी हैं और एशियन गेम्स तथा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वे कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं. कुल मिलाकर इस बार के डूसू चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि खेलों का अनुशासन, सच्ची लगन और छात्रों के बीच जमीनी जुड़ाव ही कैंपस की राजनीति में असली जीत तय करता है.

यह भी पढ़ें: DUSU Election Result: ABVP का फिर दबदबा, 4 में 3 पद जीते; उपाध्यक्ष की कुर्सी निर्दलीय के खाते में

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