Ballia Double Murder: पत्नी और दिव्यांग बेटी की हत्या मामले में पति समेत तीन गिरफ्तार
बलिया जिले के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के मुस्तफाबाद (सराय भारती) गांव में एक वृद्ध महिला और उसकी दिव्यांग व दृष्टिबाधित बेटी की हत्या के आरोप में पुलिस ने शनिवार को महिला के पति सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने यह जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि स्वाट, सर्विलांस और रसड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने इस मामले में परिवार के मुखिया रामचीज गुप्ता (70) और दो अन्य आरोपियों चंदन यादव (32) और दिनेश गुप्ता (35) को गिरफ्तार करके विधिक प्रक्रिया पूरी करके उन्हें जेल भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार चौकीदार की सूचना पर पुलिस मुस्तफाबाद गांव पहुंची थी, जहां मानती गुप्ता (65) का शव घर में और बेटी गौरी (22) का शव घर के पीछे धान के खेत में मिला था। पुलिस के अनुसार रामचीज गुप्ता की तहरीर पर 17 सितंबर को अज्ञात के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार रामचीज ने तहरीर में बताया था कि 16 सितंबर की रात घर लौटने पर पत्नी की हत्या और बेटी को लापता पाया, बाद में बेटी का शव खेत में मिला।
पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया कि रामचीज की पत्नी मानती देवी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी और वह कभी-कभी अर्धनग्न अवस्था में गांव में घूमती थी, जबकि बेटी गौरी दृष्टिबाधित और दिव्यांग थी। पुलिस के अनुसार इससे रामचीज को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचने का भय था। पुलिस के अनुसार रामचीज ने पहले भी कथित तौर पर चट्टी पर कहा था कि वह पत्नी-बेटी को मार देगा या खुद मर जाएगा।
पुलिस के अनुसार रामचीज ने गांव के ही चंदन और दिनेश के साथ मिलकर 16 सितंबर की रात करीब सात बजे पत्नी और बेटी की हत्या की साजिश रची और हत्या के बाद बेटी का शव खेत में रख दिया तथा घर में फैले खून को साफ करके गांव में हत्या की अफवाह फैला दी। पुलिस के अनुसार शनिवार को मुखबिर की सूचना पर तीनों आरोपियों को सिधागरघाट से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दाव, रामचीज का कुर्ता और चंदन की टी-शर्ट बरामद की गई है।
DUSU VP Race में निर्दलीय का दबदबा: जानें ABVP और NSUI को भारी अंतर से हराने वाले Deepanshu Shokeen की कहानी
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने ABVP के इशू मौर्य और NSUI के वीर छत्रथ को बड़े अंतर से हराकर दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के उपाध्यक्ष का चुनाव जीत लिया है। शौकीन की जीत इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दो बड़े छात्र संगठनों के समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ़ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। वोटों की गिनती के दौरान, वे मौर्य और छत्रथ, दोनों से काफी आगे रहे। बाद के नतीजों में शौकीन को 19,973 वोट मिले, जबकि ABVP के इशू मौर्य को 10,127 वोट मिले; वहीं NSUI के वीर छत्रथ काफी पीछे रहे।
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यह मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने शुरुआत में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) से टिकट मांगा था। टिकट को लेकर मतभेद होने के बाद, उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनकी उम्मीदवारी ने DUSU के उस मुकाबले में एक नया पहलू जोड़ा है, जिस पर पारंपरिक रूप से ABVP और NSUI का दबदबा रहा है। दीपांशु शोकीन दिल्ली यूनिवर्सिटी के बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं। उन्होंने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया है और वे छात्र राजनीति से जुड़े हुए हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान रिपोर्ट्स में शोकीन के पारिवारिक बैकग्राउंड पर भी चर्चा हुई है। उनके पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी माँ आंगनवाड़ी वर्कर हैं। शोकीन ने DUSU चुनाव के दौरान अपने पिता के साथ मिलकर भी प्रचार किया है। उनके परिवार की पृष्ठभूमि उनके स्वतंत्र चुनाव अभियान से जुड़ी चर्चा का हिस्सा बन गई है, खासकर इसलिए क्योंकि वे बड़े छात्र संगठनों के समर्थन वाले उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
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दीपांशु शोकीन ने कहा कि यह बहुत अच्छा लगता है कि स्टूडेंट्स ने मुझ पर जो भरोसा किया, उस पर मैं खरा उतरा। स्टूडेंट्स ने मेरा पूरा इलेक्शन कैंपेन खुद चलाया और मुझे बहुत सपोर्ट किया। मुझे लगा कि जिस मकसद से मैं यह लड़ाई लड़ने आया था—खुद को स्टूडेंट्स का सच्चा प्रतिनिधि साबित करना और उस भूमिका को सही ठहराना—उसे मैंने यहाँ सफलतापूर्वक पूरा किया। नंगे पैर चलने से होने वाली शारीरिक तकलीफ मुझे लगातार याद दिलाती रही। इसने मुझे याद दिलाया कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डेढ़ लाख स्टूडेंट्स को भी अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मैंने तय किया कि अगर मौका मिला, तो मैं उन मुद्दों को हल करने की कोशिश करूँगा—एक ऐसा वादा जिसे मैंने तब से निभाया है... स्टूडेंट्स से किए गए वादों और उनके सामने आने वाले मुद्दों के बारे में, मेरा इरादा स्टूडेंट्स को अपनी बात रखने का मंच देना है। इस बार, एक जवाबदेह DUSU होगी।
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