Houthi Attack Saudi Arabia: यमन में हाहाकार, ताइज में कई जगहों पर हूतियों के खिलाफ अभियान
Houthi Attack Saudi Arabia: यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है. इस समय सबसे ज्यादा तनाव ताइज प्रांत में देखने को मिल रहा है, जहां कई इलाकों में दोनों पक्षों के बीच लगातार झड़प हो रही हैं. सरकारी सेना का दावा है कि उसने हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर कई हथियारों और सैन्य वाहनों को नष्ट कर दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी ताइज के अलवाजिया फ्रंट और बंदरगाह शहर मोखा के आसपास भी सैन्य कार्रवाई हुई. सरकारी बलों ने हूती लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है. वहीं, हूती विद्रोही भी अलबरह की दिशा में बख्तरबंद वाहनों और भारी हथियारों के साथ अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. ताइज के पहाड़ी इलाकों का भूगोल हूती लड़ाकों को रणनीतिक बढ़त देता है. इसके अलावा, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन उनकी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बने हुए हैं. दूसरी ओर, सऊदी समर्थित यमनी सेना लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है.
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करियर के शुरुआती दिनों में जाने वाली थी अजित डोभाल की नौकरी, खुद NSA ने सुनाई अपनी कहानी
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की नौकरी शुरुआती दिनों में खतरे में पड़ गई थी. नौबत ऐसी आ गई थी कि उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता था. इस घटना के बारे में खुद डोभाल ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में आईपीएस अधिकारी के रूप में वे सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इस दौरान, एक खुफिया मिशन में उनकी टीम को चीनी सेना ने हिरासत में ले लिया था. यही वह वक्त था, जब उनको लगा कि उनकी नौकरी जाने वाली है.
दरअसल, शनिवार को डोभाल मुख्य अतिथि के रूप में IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे. इस दौरान, 2,700 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं. कार्यक्रम में उन्होंने अपनी इस कहानी को छात्रों के साथ साझा किया. आखिर उनकी नौकरी फिर कैसे बची, आइये जानते हैं…
डोभाल ने बताया कि सिक्किम में उनकी जिम्मेदारी सीमा क्षेत्र में खुफिया गतिविधियों पर नजर रखने और चीनी सेना की गतिविधियों की रेकी करने की थी. अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपनी एक खुफिया टीम को एक मिशन के लिए बॉर्डर एरिया पर भेजा था. कुछ दिनों के बाद टीम को वापस आना था लेकिन तय समय बीतने के बाद भी उनकी टीम वापस नहीं लौटी तो कुछ दिन तो उन्होंने इंतजार किया लेकिन कुछ दिन और बीतने के बाद उन्हें चिंता होने लगी कि उन्हें क्या हुआ होगा?
चीनी हिरासत में होने की मिली जानकारी
डोभाल ने जब मामले में जब इंटरफेयर किया तो पता चला कि उनकी टीम चीनी सेना की हिरासत में है, जिस वजह से उनकी चिंता और बढ़ गई थी. उन्हें लगा कि मिशन की जिम्मेदारी उनकी थी तो अब इसका असर उनके करियर पर पड़ सकता है और उनको नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है, हालांकि, जब केस की जांच हुई तो डोभाल को क्लीन चिट मिल गई. जांच में सामने आया कि मिशन में इस्तेमाल किए गए नक्शों और स्केच में खामियां थी, जिस वजह से टीम रास्ता भटक गई थी.
नक्शे से मिली जिंदगी की बड़ी सीख
डोभाल ने यह कहानी सिर्फ एक कहानी के तौर पर नहीं बल्कि एक सबक के रूप में उनको बताई. उन्होंने समझाया कि किसी भी काम में आगे बढ़न के लिए यह जरूरी है कि वह व्यक्ति इस वक्त कहां है और उसको कहां पहुंचना है और वहां तक पहुंचने का रास्ता क्या है. उन्होंने समझाया कि जिंदगी में लक्ष्य तय करने के साथ अपनी मौजूदा स्थिति और उस लक्ष्य तक पहुंचने की रणनीति को समझना जरूरी है. ये बात उन्होंने नक्शे और रास्ते के उदाहरण से समझाई.
छात्रों को बताया ‘भाग्यशाली पीढ़ी’
IIT रुड़की से डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को डोभाल ने संबोधित करते हुए कहा कि वे पिछले करीब एक हजार वर्षों में सबसे अधिक अवसर पाने वाली पीढ़ियों में से एक हैं. उन्होंने तकनीकी बदलाव और बदलती दुनिया को युवाओं के लिए अवसरों बताया. डोभाल ने छात्रों के माता-पिता को भी बधाई दी और कहा कि उनकी मेहनत और सहयोग से छात्र इस मुकाम तक पहुंचे हैं. बता दें, दीक्षांत समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे समेत कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे.
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