Golmaal Release date: 'गोलमाल 5' की रिलीज डेट का ऐलान, इस बार अजय देवगन की गैंग के साथ अक्षय कुमार लाएंगे बड़ा ट्विस्ट!
Golmaal Release date: कॉमेडी फिल्मों के शौकीनों के लिए बड़ी खबर है। लंबे इंतजार के बाद रोहित शेट्टी ने अपनी हिट फ्रेंचाइजी 'गोलमाल' की पांचवीं फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। करीब 10 साल बाद एक बार फिर 'गोलमाल' की गैंग बड़े पर्दे पर दर्शकों को हंसाने के लिए लौट रही है।
फिल्म में अजय देवगन, अरशद वारसी, कुणाल खेमू, शरमन जोशी, श्रेयस तलपड़े और तुषार कपूर जैसे पुराने कलाकार नजर आएंगे। वहीं, इस बार अक्षय कुमार भी 'गोलमाल' की दुनिया का हिस्सा बने हैं।
इस दिन सिनेमाघरों में आएगी 'गोलमाल 5'
रोहित शेट्टी ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा की। 'गोलमाल 5' अगले साल 8 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
रिलीज डेट के साथ फिल्म का एक टीजर भी जारी किया गया है, जिसमें एक बार फिर हंसी, मस्ती और गोलमाल की वही पुरानी झलक देखने को मिल रही है। निर्देशक ने फिल्म की घोषणा करते हुए इसे हंसी, मस्ती, खुशी और परिवार से जुड़ी फिल्म बताया है।
फिर साथ नजर आएगी गोलमाल की पुरानी गैंग
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका पुराना कलाकारों का समूह है। अजय देवगन एक बार फिर गोपाल के किरदार में दिखाई देंगे। उनके साथ अरशद वारसी माधव, तुषार कपूर लकी, कुणाल खेमू लक्ष्मण और श्रेयस तलपड़े अपनी पुरानी भूमिका में वापसी कर रहे हैं। इसके अलावा शरमन जोशी भी करीब 20 साल बाद इस फ्रेंचाइजी में लौट रहे हैं।
पहली बार गोलमाल की दुनिया में अक्षय कुमार
गोलमाल 5 में इस बार एक बड़ा नाम और जुड़ा है। अक्षय कुमार पहली बार इस लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बने हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अक्षय फिल्म में निगेटिव भूमिका निभा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पहली बार गोलमाल गैंग के सामने एक नया किरदार और नया टकराव देखने को मिल सकता है। हालांकि, उनके किरदार की आधिकारिक जानकारी का अभी इंतजार है।
2006 में शुरू हुआ था गोलमाल का सफर
गोलमाल फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2006 में गोलमाल: फन अनलिमिटेड से हुई थी। फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और इसके बाद इसके कई सीक्वल आए।
रोहित शेट्टी की फिल्मों की पहचान रही तेज-तर्रार कॉमेडी, गलतफहमियों और कलाकारों की बड़ी टोली। अब पांचवीं फिल्म के साथ फ्रेंचाइजी एक बार फिर उसी अंदाज को बड़े पर्दे पर लेकर आने की तैयारी में है।
फिल्म 8 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
पूजा में तांबे के बर्तन का इस्तेमाल क्यों माना जाता है शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक कारण
Tambe ke bartan puja mahatva: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान तांबे से बने लोटे, कलश और अन्य बर्तनों का इस्तेमाल करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि तांबे की धातु को अन्य धातुओं की तुलना में अधिक पवित्र और शुद्ध माना जाता है, इसी वजह से भगवान को जल अर्पित करने से लेकर आचमन तक, हर पूजा कार्य में तांबे के बर्तनों को प्राथमिकता दी जाती है।
तांबे को क्यों माना जाता है पवित्र धातु?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तांबे को सूर्य देव से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि इसका रंग और चमक सूर्य की ऊर्जा से मिलती-जुलती मानी जाती है। मान्यता है कि तांबे के बर्तन में जल भरकर सूर्य को अर्पित करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि तांबे को शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संवाहक माना जाता है, इसी वजह से इसे पूजा में इस्तेमाल होने वाली सबसे उत्तम धातुओं में गिना जाता है।
किन पूजा कार्यों में होता है तांबे का इस्तेमाल?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सूर्य को जल अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा कलश स्थापना, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी तांबे के बर्तनों को प्राथमिकता दी जाती है। मान्यता है कि तांबे के बर्तन में रखा गया जल स्वाभाविक रूप से अधिक पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है।
तांबे के बर्तन के वैज्ञानिक फायदे भी हैं खास
धार्मिक महत्व के साथ-साथ तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि तांबे के बर्तन में रखा गया जल कुछ समय बाद प्राकृतिक रूप से शुद्ध हो जाता है, क्योंकि तांबे में मौजूद तत्व पानी में मौजूद कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में सहायक माने जाते हैं। इसी वजह से प्राचीन काल से ही तांबे के बर्तन में जल पीने की भी परंपरा प्रचलित रही है।
तांबे के बर्तन के इस्तेमाल से जुड़े नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तांबे के बर्तन को हमेशा स्वच्छ रखना चाहिए, और समय-समय पर इसे नींबू या इमली से साफ करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि तांबे के बर्तन का इस्तेमाल केवल पूजा-पाठ या जल रखने के लिए ही करना चाहिए, कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के साथ इसका इस्तेमाल वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे रासायनिक प्रतिक्रिया होने की आशंका रहती है।
आज भी हर पूजा में प्राथमिकता पाते हैं तांबे के बर्तन
समय के साथ भले ही स्टील और अन्य धातुओं के बर्तनों का चलन बढ़ गया हो, लेकिन पूजा-पाठ में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करने की यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी हर हिंदू घर की पूजा थाली में तांबे का लोटा और कलश एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए कृपया चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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