एआई का फायदा उठाएं छोटे कारोबारी, उत्पादकता बढ़ाने में मिलेगी मदद: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि छोटे कारोबारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का फायदा उठाना चाहिए और उत्पादकता बढ़ाने के लिए दैनिक कार्य में एआई का इस्तेमाल करना चाहिए।
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में खासकर युवाओं को एआई की बेसिक समझ होनी चाहिए और पता होना चाहिए यह कैसे काम करता है, कहां इसका इस्तेमाल हो सकता है और पूरी जिम्मेदारी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
आईटी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हुए कहा, इसी मकसद से नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि यह प्रोग्राम अगले एक साल में 10 लाख स्टूडेंट्स को जोड़ेगा।
सरकार ने नए लॉन्च किए गए नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम और इसके फ्लैगशिप युवा एआई फॉर ऑल कोर्स पर जोर देकर युवा सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया है, जो स्वामी विवेकानंद के युवाओं को आगे बढ़ाने के विजन को एआई-संचालित भविष्य के लिए जरूरी टूल्स से जोड़ता है।
इस इवेंट में, युवा एआई फॉर ऑल फाउंडेशन कोर्स पर जोर दिया गया, ताकि एआई साक्षरता को एक जरूरी लाइफ स्किल बनाया जा सके, जो नेशनल यूथ डे के युवा शक्ति पर फोकस के साथ मेल खाता है।
यह कोर्स चार घंटे से थोड़ा अधिक समय का है, युवा एआई फॉर ऑल को एआई सीखने के लिए एक आसान एंट्री पॉइंट के तौर पर डिजाइन किया गया है, जिसके लिए किसी पिछले टेक्निकल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है।
यह युवा एआई फॉर ऑल कोर्स 11 भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) में उपलब्ध होगा। यह कोर्स बिल्कुल मुफ्त है और फ्यूचरस्किल्स प्राइम, आईजीओटीकर्मयोगी, दीक्षा और दूसरे पॉपुलर एड-टेक पोर्टल्स जैसे लीडिंग लर्निंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
कोर्स पूरा होने पर, हर सीखने वाले को भारत सरकार की तरफ से एक ऑफिशियल सर्टिफिकेट मिलेगा।
आईटी मंत्रालय ने कहा, युवा एआई फॉर ऑल,नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम एआई तक पहुंच को आसान बनाने और भारत के नागरिकों, खासकर युवाओं को एआई-आधारित भविष्य के अवसरों और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मध्य प्रदेश : पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान से मजबूत हो रही मातृ-शिशु सुरक्षा, 40 गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच
बुरहानपुर, 13 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला चिकित्सालय की एएनसी ओपीडी में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और मातृ-शिशु सुरक्षा को मजबूत करना रहा।
इस शिविर में कुल 40 गर्भवती महिलाओं की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें से 10 महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था की श्रेणी में चिन्हित किया गया। इन सभी महिलाओं को तत्काल आवश्यक उपचार, नियमित निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श उपलब्ध कराया गया, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके।
स्थानीय महिला मंगला भगत ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सही समय पर टीकाकरण, पोषाहार और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान किस अवस्था में आराम जरूरी है, क्या खाना चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, यह सब शिविर में विस्तार से समझाया गया, जिससे महिलाओं को काफी लाभ मिल रहा है।
मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रतिभा बागर ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत नियमित रूप से इस तरह के शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गर्भवती महिलाओं को बुलाकर सोनोग्राफी समेत सभी आवश्यक जांचें निशुल्क की जाती हैं। जिन महिलाओं को पहले से प्रसव में जटिलता की आशंका होती है, उन्हें पहले ही चिन्हित कर लिया जाता है, ताकि समय रहते उचित इलाज और समाधान उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. बागर के अनुसार इस योजना को काफी अच्छा फीडबैक मिल रहा है और इसके चलते मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब समय पर इलाज और परामर्श की सुविधा मिलने लगी है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की फील्ड ऑफिसर वंदना मिस्सी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि यह कार्यक्रम पूरी योजना और तैयारी के साथ आयोजित किया जाता है, जिससे इसकी सफलता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भाग लेती हैं और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाती हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान से न केवल गर्भवती महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है, बल्कि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में भी यह एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।
शिविर के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को प्रसव पूर्व चार अनिवार्य जांचों की अहमियत, गर्भावस्था के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका, उसकी पहचान और सुरक्षित मातृत्व के लिए संस्थागत प्रसव की अनिवार्यता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इसके साथ ही सीसीपी, एफसीसी और पीएमएच कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्ध 24 घंटे निशुल्क सहायता सेवाओं, टोल-फ्री नंबर और टेली मानस जैसी सुविधाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान हर महीने नियमित रूप से संचालित किया जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उपचार और निगरानी संभव हो सके और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाई जा सके।
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
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