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UP Election 2027: हाथरस की तीन सीटों का क्या है चुनावी इतिहास? जानिए किस पार्टी का रहा दबदबा

UP Election 2027: यूपी में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, जिसको लेकर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. यूपी के इस प्रमुख जिलों में हाथरस भी शामिल है. इस विधानसभा में हाथरस, सादाबाद और सिकंदरा राऊ तीन सीटें हैं. आपको बता दें कि हाथरस दुनिया भर में अपनी उच्च गुणवत्ता वाली हींग के प्रसंस्करण और व्यापार के लिए मशहूर है. इनमें से हाथरस सीट अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है. ऐसे में आइए जानते हैं यूपी की हाथरस सीट का इतिहास. 

जानें क्या है हाथरास सीट का इतिहास

हाथरस जिले की विधानसभा सीटों का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है. जिले की अलग-अलग सीटों पर कई ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने लगातार तीन चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बनाई.  हाथरस की सियासत में रामवीर उपाध्याय, अशरफ अली खान और सुरेश प्रताप गांधी जैसे नेताओं के नाम लगातार तीन जीत दर्ज करने वालों में शामिल रहे हैं. आजादी के बाद हुए शुरुआती विधानसभा चुनावों में हाथरस शहर सीट पर कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा. कांग्रेस के नंदकिशोर देव वशिष्ठ ने 1951 से 1962 तक लगातार तीन चुनाव जीते. 1951 के चुनाव में उन्होंने 3,565 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. उस चुनाव में करीब 49.3 प्रतिशत मतदान हुआ था. इसके बाद 1957 में उन्होंने लगभग 6 हजार वोटों से जीत हासिल की.1962 के चुनाव में भी नंदकिशोर देव वशिष्ठ ने अपना प्रदर्शन जारी रखा और 4,269 वोटों से चुनाव जीता. इस चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 50.16 रहा था. साल 1977 का विधानसभा चुनाव हाथरस के राजनीतिक इतिहास में खास रहा. उस समय जिले में चार विधानसभा सीटें थीं और चारों पर जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी. हाथरस से रामसरन सिंह, सादाबाद से हुकुम चंद तिवारी और सिकंदराराऊ से नेम सिंह चौहान विजयी रहे. वहीं सासनी विधानसभा सीट से डॉ. बंगाली सिंह ने चुनाव जीता था. सिकंदराराऊ विधानसभा सीट पर सुरेश प्रताप गांधी ने लगातार तीन चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया। 1985 में उन्होंने एलकेडी के टिकट पर निर्दलीय उम्मीदवार नेकराम शर्मा को हराया.  1989 में सुरेश प्रताप गांधी जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और एक बार फिर नेकराम शर्मा को मात दी.इसके बाद 1991 में भी उन्होंने जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता. इस बार उनकी जीत का अंतर 3,382 वोट रहा.

साल 1996 से 2012 तक इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का लगातार दबदबा रहा. परिसीमन से पहले हाथरस विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए थी. इसी दौरान बसपा के प्रमुख नेता रामवीर उपाध्याय ने लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बनाई. साल 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन में हाथरस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. सीट के आरक्षित होने के बाद रामवीर उपाध्याय को यहां से चुनाव नहीं लड़ना पड़ा. बसपा ने उनकी जगह गेंदालाल चौधरी को मैदान में उतारा.गेंदालाल पहले परिसीमन के बाद खत्म हो चुकी सासनी विधानसभा सीट से विधायक रह चुके थे. 2012 के चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की.  2012 के विधानसभा चुनाव में गेंदालाल चौधरी ने बीजेपी के उम्मीदवार राजेश दिवाकर को 9,128 वोटों के अंतर से हराया था. इस जीत के साथ बसपा ने हाथरस सुरक्षित सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में हाथरस सीट पर मुकाबले का परिणाम पूरी तरह बदल गया. बीजेपी ने परिसीमन के बाद खत्म हुई सासनी सीट से तीन बार विधायक रह चुके हरीशंकर माहौर को हाथरस सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया. हरीशंकर माहौर ने चुनाव में बसपा के प्रत्याशी बृजमोहन राही को बड़े अंतर से हराया. उन्हें 70,661 वोटों के अंतर से जीत मिली. वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश राज जीवन को 27,301 वोट मिले. वहीं, 2022  में एक बार फिर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की. भाजपा प्रत्याशी अंजुला सिंह माहौर ने BSP प्रत्याशी संजीव कुमार को हराकर एक बार फिर भाजपा का झंडा लहराया.

सादाबाद सीट का इतिहास

हाथरस की सादाबाद सीट का इतिहास बहुत पुराना रहा है. इस सीट पर पहली बार विधानसभा का चुनाव 1952 में हुआ था. उस दौरान कांग्रेस नेता कुंवर मोहम्मद अशरफ अली खान ने जीत हासिल की थी. इस सीट पर विधानसभा में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा पांच बार चुनाव जीते है. वही, भाजपा अब तक सिर्फ 2 बार ही चुनाव जीत सकीं.

इस सीट पर कांग्रेस ने 5 बार

1952 (सादाबाद ईस्ट): कुंवर मोहम्मद अशरफ अली खान
1962: कुंवर मोहम्मद अशरफ अली खान
1967: ए.ए. खान
1969: अशरफ अली खान
1980: कुंवर जावेद अली

राष्ट्रीय लोक दल (RLD): 3 बार (जनरल चुनाव; 2001 उपचुनाव मिलाकर 4)
2002: प्रताप
2007: डॉ. अनिल चौधरी
2022: प्रदीप कुमार सिंह

भाजपा (BJP): 2 बार (1991, 1996)

जनता दल (JD): 2 बार (1989, 1993)

बाकी एक-एक बार: निर्दलीय (1957), भारतीय क्रांति दल (BKD, 1974), जनता पार्टी (1977), लोक दल (LKD, 1985), समाजवादी पार्टी (SP, 2012), बसपा (BSP, 2017) में जीत दर्ज की.

सिकंदरा राऊ सीट का इतिहास

सिकंदरा राऊविधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित है. यह हाथरस लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और वर्तमान में विधानसभा सीट नंबर 80 है. यह सीट 1952 से अस्तित्व में है. यहां का चुनावी इतिहास काफी विविधतापूर्ण रहा हैय कोई भी पार्टी लंबे समय तक लगातार प्रभुत्व नहीं जमा पाई, हालांकि हाल के वर्षों में भाजपा मजबूत हुई है. फिलहाल वर्तमान में भाजपा के बीरेंद्र सिंह राणा इस क्षेत्र से विधायक है. वहीं इस सीट पर भाजपा ने 4 बार (1996, 2007, 2017, 2022) चुनाव जीतें हैं. वहीं, कांग्रेस ने 3 बार (1952, 1957, 1980), जनता दल ने 2 बार (1989, 1991) और बाकी पार्टियों ने (BKD, JNP, LKD, SP, BSP) एक-एक बार चुनाव जीता है. इसके साथ ही निर्दलीय उम्मीदवारों ने 4 बार (1962, 1967, 1969, 2002) चुनाव जीते हैं.  

वर्ष विजेता पार्टी
1952 नेक राम शर्मा कांग्रेस (INC)
1957 मल्खन सिंह कांग्रेस (INC)
1962 नेक राम शर्मा निर्दलीय (IND)
1967 एन.आर. शर्मा निर्दलीय (IND)
1969 जगदीश गांधी निर्दलीय (IND)
1974 फरजंद अली भारतीय क्रांति दल (BKD)
1977 नेम सिंह चौहान जनता पार्टी (JNP)
1980 पुष्पा चौहान कांग्रेस (I)
1985 सुरेश प्रताप सिंह लोक दल (LKD)
1989 सुरेश प्रताप गांधी जनता दल (JD)
1991 सुरेश प्रताप गांधी जनता दल (JD)
1993 अमर सिंह समाजवादी पार्टी (SP)
1996 यशपाल सिंह चौहान भाजपा (BJP)
2002 अमर सिंह यादव निर्दलीय (IND)
2007 यशपाल सिंह चौहान भाजपा (BJP)
2012 रामवीर उपाध्याय बसपा (BSP)
2017 बीरेंद्र सिंह राणा भाजपा (BJP)
2022 बीरेंद्र सिंह राणा भाजपा (BJP)

 

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