Responsive Scrollable Menu

Hazari Prasad Dwivedi के साहित्य में मनुष्य और लोक चेतना ही मुख्य लक्ष्य: डॉ. अरविंदाक्षन

हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार, आलोचक एवं निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने साहित्य को केवल राजनीति या अर्थशास्त्र के नजरिये से नहीं देखा, बल्कि उसे भारतीय समाज की दीर्घकालीन सांस्कृतिक निरंतरता और लोक चेतना से जोड़कर परखा। हिंदी और मलयालम साहित्य के विद्वान एवं लेखक डॉ. ए. अरविंदाक्षन ने एक संगोष्ठी में यह बात कही। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट’ की ओर से शनिवार को जारी एक बयान के अनुसार,अरविंदाक्षन ने कहा कि द्विवेदी का साहित्य लोक मानस के लिए रचा गया था और उनके संपूर्ण लेखन में मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य रहा।

ट्रस्ट और ‘क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की ओर से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुये अरविंदाक्षन ने कहा कि द्विवेदी ने साहित्य को केवल राजनीति या अर्थशास्त्र के चश्मे से नहीं देखा, बल्कि उसे भारतीय समाज की दीर्घकालीन सांस्कृतिक निरंतरता और लोक चेतना से जोड़कर परखा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सम कुलपति रह चुके अरविंदाक्षन ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने संत साहित्य की जो व्याख्या की, उसका मुख्य लक्ष्य उसमें निहित सार्वभौमिक मानवीय भावना को उजागर करना था। ‘क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की रजिस्ट्रार डॉ. ज्योति कुमार ने कहा, ‘‘मैं पहली बार देख रही हूं कि किसी लेखक के गद्य पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हो रही है, अन्यथा काव्य पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।’’ उन्होंने कहा कि आचार्य द्विवेदी की साहित्यिक विरासत उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही और दक्षिण भारत भी उसका साक्षी बन रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह की संगोष्ठियों और सम्मेलनों के आयोजन का प्रयास करेगा। रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वी. एन. पांडेय ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्वयं बेंगलुरु आए थे या नहीं, यह ज्ञात नहीं है, लेकिन उन्होंने अपने निबंध ‘शिरीष के फूल’ में कर्नाटक का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, ‘‘द्विवेदी के साहित्य पर बात करना ‘ओर से छोर’ यानी पुरातन से अधुनातन तक की बात करने के समान है।’’ ‘ग्लोबल हिंदी फाउंडेशन’ की चित्रा गुप्ता ने सिंगापुर से अपने ऑनलाइन संदेश में कहा कि आचार्य द्विवेदी के निबंधों में बार-बार यह संदेश मिलता है कि ज्ञान का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि एक बेहतर, संवेदनशील और विवेकशील मनुष्य बनना है।

उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशों में जहां-जहां हिंदी पढ़ाई जाती है, वहां आचार्य द्विवेदी के निबंधों को 12वीं कक्षा, स्नातक और परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट’ की अध्यक्ष डॉ. अपर्णा द्विवेदी ने आचार्य द्विवेदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला तथा हिंदी और साहित्य के क्षेत्र में ट्रस्ट की गतिविधियों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। बयान के अनुसार, संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र भी प्रस्तुत किए।

Continue reading on the app

BRICS की सफलता और Mecca Pact की विफलता देख Bangladesh ने बदला रुख, नवंबर में India आने को आतुर हैं PM Tarique Rahman

बांग्लादेश को आखिरकार भारत की जरूरत का एहसास होने लगा है! जिस समय नई दिल्ली ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित कर पड़ोसी संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर दिया, उस समय ढाका ने दूरी बनाए रखना पसंद किया। शायद उसे लगा कि दिल्ली जाने से अच्छा है इस्लामाबाद या मक्का जाया जाये और मक्का पैक्ट में शामिल हुआ जाये। लेकिन मक्का में हूतियों का हमला और मक्का पैक्ट की हवा निकलते देख बांग्लादेश को शायद अपनी गलती का अहसास होने लगा है। अब बांग्लादेश के सामने दो तस्वीरें हैं। एक ओर भारत में आयोजित ब्रिक्स की शानदार सफलता की पूरी दुनिया में गूंज उसे सुनाई दे रही है और दूसरी तरफ 'एक पर हमला सब पर हमला' की घोषित नीति के बावजूद सऊदी अरब की मदद के लिए नहीं उतरने की पाकिस्तान और तुर्की की वादाखिलाफी दिखाई दे रही है। इसके चलते तस्वीर अब तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। ब्रिक्स सम्मेलन संपन्न होने के ठीक बाद भारत तथा बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय बातचीत फिर शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि दोनों देश नवंबर में तारिक रहमान की भारत यात्रा की संभावित तारीखों पर विचार कर रहे हैं। यह पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण चल रहे भारत-बांग्लादेश संबंधों को फिर पटरी पर लाने की कोशिश है।

हम आपको याद दिला दें कि तारिक रहमान के फरवरी में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद भारत ने उन्हें अलग से द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया था। अगस्त में भी यात्रा की संभावना बनी थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत से की गई सार्वजनिक टिप्पणी के बाद ढाका में पैदा हुए आक्रोश ने पूरा घटनाक्रम उलट दिया। अब दोनों पक्ष नवंबर की किसी उपयुक्त तारीख पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका में कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। भारतीय पक्ष की कोशिश यह है कि यात्रा ऐसी तारीख पर हो जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के अनुकूल भी हो।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत-बांग्लादेश संबंध वर्ष 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गंभीर तनाव से गुजरे हैं। हसीना के भारत में रहने और उनके प्रत्यर्पण की मांग को लेकर ढाका लगातार दबाव बनाता रहा है। अगस्त में शेख हसीना की ओर से मीडिया कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद यह तनाव और बढ़ गया। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार चाहती है कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण हो और उनकी सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगे। इस पर भारत की ओर से फिलहाल यही कहा गया है कि प्रत्यर्पण अनुरोध की जांच की जा रही है। साथ ही नई दिल्ली व्यापक संबंधों को पारस्परिक हितों और पारस्परिकता के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

इसे भी पढ़ें: बांग्लादेश को दुश्मन खेमे में जाने से रोकने के लिए भारत ने चला बड़ा दांव! India-Banladesh के बीच फिर से शुरू हो सकती है रेल सेवाएं

दोनों पक्ष इस टकराव के बीच ऐसा रास्ता खोज रहे हैं जिसमें किसी एक मुद्दे के कारण दोनों देशों के व्यापक हित प्रभावित न हों। यही कारण है कि नवंबर में प्रस्तावित तारिक रहमान यात्रा को दोनों राजधानियां बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं। रणनीतिक स्तर पर देखें तो भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत संबंध केवल दो सरकारों का मामला नहीं है। बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, नदी जल, व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग, इन सभी मोर्चों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं।

आर्थिक मोर्चे पर भी बातचीत का एजेंडा महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार को नियमित करने के उपायों पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही गंगा जल संधि के नवीनीकरण का प्रश्न भी एजेंडे में शामिल है। जल संसाधन से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के लिए अत्यंत संवेदनशील हैं और इनके समाधान का सीधा प्रभाव सीमावर्ती क्षेत्रों तथा करोड़ों लोगों के हितों पर पड़ता है।

इसके अलावा, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में तारिक रहमान को आमंत्रण मिलना भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बांग्लादेश को यह निमंत्रण इसलिए दिया गया था क्योंकि वह बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल यानि बिम्सटेक का वर्तमान अध्यक्ष है। इसके बावजूद बांग्लादेश ने सम्मेलन में अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा। उसके विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री ने तब कहा था कि ढाका भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहता है और इसके लिए उपयुक्त समय पर द्विपक्षीय यात्रा को प्राथमिकता देगा। अब वही द्विपक्षीय रास्ता सक्रिय होता दिखाई दे रहा है।

इस पूरी कहानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू तारिक रहमान और भारत के बीच पुराने संपर्क हैं। बताया जा रहा है कि तारिक रहमान ने लंदन में निर्वासन के वर्षों के दौरान भी भारत से संपर्क बनाए रखा था। फरवरी 2024 में उनके एक दूत ने नई दिल्ली आकर भारत का रुख समझने की कोशिश की थी। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा संपर्क अचानक शुरू नहीं हुए, बल्कि इनके पीछे लंबे समय से चल रही राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत की एक पृष्ठभूमि मौजूद है।

हम आपको याद दिला दें कि 2018 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आया था। उस यात्रा का उद्देश्य भारत के प्रति पार्टी की नीति में सुधार करना था और पार्टी नेतृत्व ने यह स्वीकार किया था कि भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति गलत दिशा में थी। 2024 के चुनाव से पहले भी पार्टी के वरिष्ठ नेता नई दिल्ली पहुंचे थे और भारत से बांग्लादेश की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के समर्थन की अपील की थी।

इसलिए नवंबर में तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें ढाका और नई दिल्ली अपने संबंधों में आई खटास को पीछे छोड़कर व्यावहारिक हितों पर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। बांग्लादेश के लिए भारत के साथ स्थिर संबंध व्यापार, जल, सीमा, संपर्क और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, जबकि भारत के लिए बांग्लादेश पूर्वी सीमा और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी है।

हालांकि गंगा जल संधि पर अब भारत-बांग्लादेश संबंधों की अगली बड़ी परीक्षा होने वाली है। हम आपको बता दें कि 1996 में हुई तीस वर्ष की यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है और ढाका ने इसके नवीनीकरण के लिए बातचीत की मांग पहले ही रख दी है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने यहां तक कहा है कि नए समझौते में जल की उपलब्धता की गारंटी वाली धारा होनी चाहिए और अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख भी कर सकता है। दूसरी ओर भारत में सत्तारुढ़ गठबंधन एनडीए के महत्वपूर्ण घटक जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संधि को दोबारा लागू करने की बजाय दिसंबर में इसे समाप्त करने की मांग की है और बिहार के हिस्से के पानी को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। हालांकि केंद्र ने अभी संधि के भविष्य पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जनता दल यूनाइटेड को आश्वासन दिया है कि बिहार की पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखकर उचित निर्णय किया जाएगा। ऐसे में तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा के दौरान गंगा जल संधि सबसे कठिन मुद्दों में से एक बन सकती है। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश तत्काल बातचीत और जल की गारंटी चाहता है, जबकि भारत के भीतर ही बिहार के हितों को लेकर संधि की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि 1996 के बाद नदी की जलविज्ञान संबंधी परिस्थितियां, वर्षा का स्वरूप, जलवायु परिवर्तन और ऊपरी हिस्सों में पानी की बढ़ती मांग काफी बदल चुकी है; इसलिए अगला समझौता हुआ तो वह पुराने प्रावधानों की पुनरावृत्ति न होकर नई परिस्थितियों के अनुरूप हो सकता है।

बहरहाल, तारिक रहमान की नवंबर में होने वाली संभावित भारत यात्रा इसी परीक्षा का अगला बड़ा पड़ाव होगी। यदि दोनों पक्ष किसी मध्य मार्ग पर पहुंचते हैं, तो यह संबंधों में नई शुरुआत का आधार बन सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है कि जिस संवाद पर विराम लगा था, वह फिर शुरू हो चुका है और इस बार बातचीत का केंद्र टकराव नहीं, बल्कि संबंधों को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश है।

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

  Sports

Video: जापान में क्रिकेट खेलने पर क्या बोल गए भारत के ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर?

भारतीय क्रिकेट टीम जापान में ऐतिहासिक मैच और एशियाई खेलों की तैयारी कर रही है। खिलाड़ी जापान की सुंदरता, तकनीक और खाने से प्रभावित हैं। वे ओलंपिक में स्वर्ण पदक और जापान प्रीमियर लीग के खिलाड़ियों को आईपीएल में देखने की उम्मीद रखते हैं। Mon, 21 Sep 2026 18:13:41 +0530

  Videos
See all

Sugar Price Crash: चीनी के दाम अचानक इतने गिरे? | Sugar New Rates | Top News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-21T13:10:13+00:00

मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया का मजाक क्यों उड़ाया जाता हैं [Memes on Mecklenburg Vorpommern] #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-21T13:07:02+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers