आगर मालवा में माँ बगलामुखी मंदिर दर्शन करने गए श्रद्धालुओं की कार उफनते बरसाती नाले में बही, 8 की मौत
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पास उस समय चीख पुकार मच गई जब लोगों ने मंदिर के पास से बहने वाले बरसाती नाले में श्रद्धालुओं से भरी कार को बहते देखा। देखते ही देखते कार पानी में धंस गई और उसमें बैठे श्रद्धालुओं को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला, इस हादसे में कार में बैठे 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मृतकों में 3 बच्चे, 2 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार का ड्राइवर मध्यप्रदेश का था। शुरूआती जानकारी के अनुसार श्रद्धालुओं ने यह कार उज्जैन से किराए पर ली थी और सभी माताजी के दर्शनों के लिए आये थे, हादसे में ड्राइवर की भी मौत हो गई।
बरसाती नाला पार करते समय बही कार
स्थानीय लोगों ने बताया श्रद्धालु मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे। बरसाती नाले को पार करते समय उनकी कार तेज बहाव की चपेट में आकर पानी में बह गई। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू शुरू किया गया। फिलहाल मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिआफ की नारेबाजी
रेस्क्यू टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से एक एक कर कार में फंसे सभी 8 शव बाहर निकाले और उन्हें चार पहिये के ठेलों से अस्पताल पहुंचाया घटना के बाद स्थानीय लोगों में जमकर आक्रोश दिखाई दिया। लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। मौके पर कलेक्टर शेर सिंह मीणा और एसपी दिलीप कुमार सोनी समेत प्रशासनिक अमला भी पहुँचा जिसने लोगों को शांत किया।
देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं दर्शन करने
उल्लेखनीय है कि माँ बगलामुखी मंदिर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि भीड़ की जानकारी होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन आवश्यक सुरक्षा के इंतजाम नहीं करता जिसे श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ता है ।
गौरव सरवारिया की रिपोर्ट
पवन एक्सप्रेस से 8 फीट नीचे गिट्टियों पर गिरी डेढ़ साल की मासूम, मोबाइल में व्यस्त थी मां, यात्रियों की सूझबूझ से बची जान
कटनी और जबलपुर के बीच पवन एक्सप्रेस में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। मुजफ्फरपुर से मुंबई जा रही ट्रेन जब करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से दौड़ रही थी, तभी लोअर बर्थ पर बैठी एक डेढ़ साल की बच्ची अचानक इमरजेंसी खिड़की से नीचे ट्रैक पर जा गिरी। गनीमत यह रही कि समय रहते यात्रियों की नजर पड़ गई और तुरंत चेन पुलिंग कर बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया।
मां देख रही थी मोबाइल
मुजफ्फरपुर की रहने वाली 26 वर्षीय संजीदा खातून अपनी मासूम बेटी के साथ लोकमान्य तिलक टर्मिनल (मुंबई) जा रही थीं। ट्रेन कटनी स्टेशन से आगे निकल चुकी थी। संजीदा अपनी लोअर बर्थ पर बच्ची को पास में लिटाकर मोबाइल देखने में व्यस्त थीं। इसी दौरान बच्ची चुपके से उठी और खिड़की के पास चली गई। जब मां का ध्यान मोबाइल से हटा और बेटी पास नहीं दिखी, तो वे घबराकर बदहवास हो गईं।
इमरजेंसी खिड़की में कम थीं रॉड
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कोच की इमरजेंसी खिड़की में सामान्य खिड़कियों के मुकाबले लोहे की रॉड कम लगी हुई थीं। बच्ची ने खिड़की की रॉड पकड़कर खड़े होने का प्रयास किया, लेकिन तभी ट्रेन में एक जोरदार झटका लगा। संतुलन बिगड़ने के कारण मासूम करीब 8 फीट की ऊंचाई से सीधे ट्रैक के किनारे पड़ी नुकीली गिट्टियों पर जा गिरी।
यात्रियों ने दिखाई सूझबूझ
बच्ची के बाहर गिरते ही बोगी में हड़कंप मच गया। सह-यात्रियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत अलार्म चेन खींचकर ट्रेन रोकी। ट्रेन रुकते ही यात्री ट्रैक पर पीछे की तरफ दौड़े। मासूम बच्ची गिट्टियों पर पड़ी तड़प रही थी, उसके सिर, पीठ और हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और खून निकल रहा था। इतनी ऊंचाई और तेज रफ्तार ट्रेन से गिरने के बावजूद बच्ची को जीवित देख लोगों ने राहत की सांस ली और इसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना।
जबलपुर में आरपीएफ ने पहुंचाया अस्पताल
ट्रेन के जबलपुर स्टेशन पहुंचते ही आरपीएफ और रेलवे के कमर्शियल विभाग की टीम ने तुरंत बच्ची को संभाला और जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मां संजीदा ने रेलवे अधिकारियों को बताया कि जबलपुर में उनका कोई रिश्तेदार नहीं है इसलिए वे बेटी का इलाज मुंबई में कराना चाहती हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए रेल प्रबंधन ने उचित व्यवस्था कर उन्हें दूसरी ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना कर दिया।
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