असम चुनाव में EVM की विश्वसनीयता पर PIL की स्वीकार्यता पर Gauhati HC में सुनवाई
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम में इस साल हुए विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम की विश्वसनीयता और मशीन में इस्तेमाल सेमीकंडक्टर पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा दायर जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर शुक्रवार को सुनवाई शुरू की। याचिकाकर्ताओं-असम जातीय परिषद और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनाव में अकेले दम पर बहुमत हासिल करने में मदद मिली। असम जातीय परिषद (एजेपी) के नेता और याचिकाकर्ताओं में से एक जियाउर रहमान ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की अदालत ने याचिका की स्वीकार्यता पर संबंधित पक्षों को अपनी दलीलें रखने के लिए अगली तारीख चार नवंबर तय की है।
उन्होंने कहा कि इस जनहित याचिका में 2026 के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम की ‘‘विश्वसनीयता और कानूनी स्वीकार्यता’’ को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं-रहमान और कांग्रेस नेताओं गुप्तमणि शर्मा तथा रिपुन बोरा ने मशीन में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई सेमीकंडक्टर तकनीक, माइक्रोचिप के सोर्स कोड का ‘‘खुलासा नहीं किए जाने’’ और एक प्रमुख जापानी सेमीकंडक्टर कंपनी के असम की सेमीकंडक्टर पहल से ‘‘जुड़ाव’’ पर सवाल उठाए हैं। रहमान ने दावा किया कि ईवीएम में इस्तेमाल माइक्रोचिप या सेमीकंडक्टर उपकरणों का निर्माण उसी जापानी कंपनी ने किया था, जिसके अधिकारियों ने जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की जापान यात्रा के दौरान तोक्यो में उनसे मुलाकात की थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदान के दिन एक निश्चित समयावधि के दौरान बड़ी संख्या में निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के एक जैसे रुझान देखने को मिले, जो कोई स्वाभाविक घटना नहीं लगती। याचिकाकर्ताओं के वकील और निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। अगली सुनवाई में राज्य सरकार अपना पक्ष रख सकती है।
वहीं, जापानी कंपनी भी इस मामले में एक पक्षकार है।
रूसी तेल खरीदना भारत को पड़ सकता है भारी! ट्रंप ने 100% टैरिफ वाले कानून पर किए साइन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत समेत कई देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं. ट्रंप ने रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए 'लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध कानून 2026' पर दस्तखत कर दिए हैं. इस नए कानून के तहत अब उन देशों पर भी भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकेगा, जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और गैस खरीद रहे हैं. खास बात यह है कि इस दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े देश भी सीधे तौर पर आ गए हैं.
रूसी ऊर्जा के खरीदार देशों के सामान पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस विधेयक को पहले अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिली और उसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर अपनी मुहर लगा दी. कानून के जरिए अमेरिका को यह अधिकार मिल गया है कि वह रूसी ऊर्जा के खरीदार देशों के सामान पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगा सके. हालांकि, किस देश पर कितना टैरिफ लगेगा, इसका अंतिम फैसला खुद राष्ट्रपति ट्रंप ही करेंगे.
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रूस की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है अमेरिका
इस कड़े कानून का मकसद रूस की आर्थिक कमर तोड़ना है. इसके तहत रूस के बड़े अधिकारियों, प्रमुख बैंकों और उनके 'शैडो फ्लीट' यानी गुप्त तेल टैंकरों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. साथ ही, ईरान पर पहले से चले आ रहे प्रतिबंधों को और ज्यादा सख्त कर दिया गया है. साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस प्रस्ताव को तैयार करने में साल भर से ज्यादा का समय लगाया था, जिसके बाद इसे अब अंतिम रूप दिया गया है.
जानें टैरिफ का क्या पड़ेगा भारत पर असर
अगर राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का कदम उठाते हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग घट सकती है. इससे भारतीय निर्यातकों पर बड़ा संकट आ सकता है और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
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