UPSSSC PET 2026: पीईटी फॉर्म भरने का आज आखिरी मौका, 10वीं पास युवा तुरंत करें अप्लाई; देखें पूरी डिटेल
UP PET 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज अहम दिन है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 के लिए आवेदन करने की आज यानी 7 सितंबर आखिरी तारीख है। जिन अभ्यर्थियों ने अब तक आवेदन नहीं किया है, वे समय रहते ऑनलाइन फॉर्म पूरा कर लें। आवेदन विंडो बंद होने के बाद नए आवेदन का मौका नहीं मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए UPSSSC PET 2026 का आवेदन करने का आज आखिरी मौका है। आयोग ने PET 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 7 सितंबर 2026 कर दी थी। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है, उन्हें आज ही आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।
PET परीक्षा उत्तर प्रदेश में होने वाली कई ग्रुप 'C' स्तर की भर्तियों के लिए महत्वपूर्ण है। लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (VDO), फॉरेस्ट गार्ड समेत विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रिया में PET स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए यूपी में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस परीक्षा में शामिल होना अहम माना जाता है।
कौन कर सकता है आवेदन?
UP PET 2026 के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा या समकक्ष परीक्षा पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। अंतिम तारीख तक 10वीं या इसके समकक्ष योग्यता हासिल करने वाले अभ्यर्थी भी पात्र हैं।
आयु सीमा की बात करें तो 1 जुलाई 2026 को उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 वर्ष और 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी।
कितनी है आवेदन फीस?
आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी कैटेगरी के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।
सामान्य/OBC: 185 रुपये
SC/ST: 95 रुपये
दिव्यांग (PH): 25 रुपये
फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।
पहले OTR करना जरूरी
UPSSSC PET 2026 के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। OTR पूरा होने के बाद PET के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
आवेदन करते समय उम्मीदवार अपनी जरूरी जानकारी भरें, कैटेगरी के अनुसार शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी सुरक्षित रख लें।
अभी घोषित नहीं हुई परीक्षा तारीख
UPSSSC की ओर से अभी तक PET 2026 की परीक्षा तारीख घोषित नहीं की गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग परीक्षा कार्यक्रम जारी कर सकता है। परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड और अन्य अपडेट के लिए अभ्यर्थियों को UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
यूपी में सरकारी नौकरी के लिए क्यों जरूरी है PET?
UPSSSC की कई ग्रुप 'C' भर्तियों में उम्मीदवारों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए PET स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में PET में शामिल हुए बिना आयोग की कई प्रमुख भर्तियों के अगले चरण में पहुंचने का रास्ता नहीं खुलता। यही वजह है कि यूपी में लेखपाल, VDO, फॉरेस्ट गार्ड और अन्य पदों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए PET महत्वपूर्ण परीक्षा है।
Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर क्यों की जाती है औजारों-मशीनों की पूजा? जानें उन्हें विश्राम देने की वजह
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में शिल्प, वास्तु और निर्माण का देवता माना जाता है। हर साल 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाने की परंपरा है। इस दिन खासतौर पर कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और दूसरे कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।
विश्वकर्मा पूजा की सबसे खास परंपराओं में औजारों, मशीनों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का पूजन शामिल है। कई जगह इस दिन मशीनों को बंद रखकर उन्हें आराम भी दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यंत्रों की पूजा क्यों की जाती है और उन्हें एक दिन विश्राम देने के पीछे क्या मान्यता है?
भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है पहला शिल्पकार
धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला शिल्पकार और निर्माण का देवता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने सोने की लंका, द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी अद्भुत रचनाओं का निर्माण किया था।
इसी धार्मिक मान्यता के चलते शिल्प, निर्माण और तकनीकी काम से जुड़े लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों को भगवान विश्वकर्मा का प्रतीक मानते हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन इन यंत्रों की पूजा करके उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट किया जाता है।
मशीनों को क्यों दिया जाता है विश्राम?
विश्वकर्मा पूजा पर कई कारखानों, दुकानों और वर्कशॉप में काम बंद रखा जाता है। सुबह कार्यस्थल की सफाई करने के बाद मशीनों और औजारों को साफ किया जाता है और उनका पूजन किया जाता है।
पूरे साल काम में लगे रहने वाले उपकरणों को इस दिन इस्तेमाल न करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। धार्मिक दृष्टि से इसे यंत्रों के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। वहीं व्यावहारिक रूप से भी यह दिन मशीनों की सफाई, रखरखाव और उनकी स्थिति जांचने के लिए उपयोगी हो सकता है।
कैसे करें औजारों और मशीनों की पूजा?
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले कार्यस्थल, दुकान या कारखाने की अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है।
इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, फूल और माला से भगवान की पूजा की जाती है। काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों पर भी तिलक लगाया जाता है। कई स्थानों पर यंत्रों पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और भगवान को फल व मिठाई का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है।
क्या होती है औजारों की पूजा की मान्यता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, काम में इस्तेमाल होने वाले औजार और मशीनें भगवान विश्वकर्मा की कृपा का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए इनकी पूजा करने से कार्यक्षेत्र में शुभता और समृद्धि आने की मान्यता है।
विश्वास किया जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा से कारोबार में तरक्की, कार्य में सफलता और कार्यस्थल पर सुख-शांति बनी रहती है। मशीनों और वाहनों की नियमित देखभाल को भी इस परंपरा से जोड़ा जाता है।
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