Mohammed Shami: उम्र 36 पार... विकेट की भूख पुरानी जैसी, 100 फर्स्ट क्लास मैच के बाद शमी बोले- बैज के लिए खेलता हूं
Mohammed Shami first class career: मोहम्मद शमी ने अपने 100वें फर्स्ट क्लास मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी का चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया। चेन्नई के चेपॉक में खेले गए फाइनल में शमी ने गेंद से कमाल दिखाया और इस खास मुकाम को यादगार बना दिया। मैच के बाद उन्होंने साफ कहा कि क्रिकेट को लेकर उनकी भूख अभी भी पहले जैसी ही है।
36 साल के हो चुके शमी ने कहा कि मोटिवेट रहने के लिए हमेशा कोई न कोई वजह मिल सकती है। उनके मुताबिक, इस स्तर पर अगर खिलाड़ी खुद को मोटिवेट नहीं कर पा रहा है तो उसका नजरिया ही गलत है। शमी का मंत्र भी बिल्कुल साफ है- जिस स्तर पर खेलने का मौका मिले, उसे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से भुनाना है।
1 वर्ष से अधिक समय से टीम से बाहर शमी
मोहम्मद शमी चोट से ऊबरकर लगातार घरेलू क्रिकेट में परफार्म कर रहे हैं। वह राष्ट्रीय टीम में खेलना चाहते हैं, लेकिन चयनकर्ता उनकी फिटनेस को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते। हालांकि शमी ने हर बार इसे गलत साबित किया है। वह लगातार विकेट लेकर और लय के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं। शमी ने आखिरी बार 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इस मैच में उन्होंने 7 ओवर की गेंदबाजी करते हुए 1 विकेट लिया था। इस मैच में वह ज्यादा प्रभावी नहीं थे। हालांकि इससे पहले टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था।
शमी ने कहा कि वह हमेशा ‘बैज के लिए खेलने’ की बात करते हैं। जब सीने पर टीम का बैज होता है तो क्रिकेट का स्तर मायने नहीं रखता। उस बैज के लिए खेलने का गर्व ही खिलाड़ी के अंदर लड़ने की भूख पैदा करता है। यही सोच शमी को अब भी मैदान पर पूरी ताकत लगाने के लिए प्रेरित करती है।
चेपॉक की पिच बल्लेबाजों के लिए अच्छी थी और गेंदबाजों के लिए ज्यादा मदद नहीं थी। इसके बावजूद शमी ने नई गेंद से पारंपरिक स्विंग हासिल की और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का शानदार इस्तेमाल किया। उन्होंने साउथ जोन के बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और मुकेश कुमार के साथ मिलकर 5 विकेट साझा किए। दोनों की गेंदबाजी के दम पर ईस्ट जोन ने साउथ को 336 रन पर समेट दिया और पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल की, जो अंत में खिताबी जीत की वजह बनी।
शमी ने बताया कि ऐसी गर्मी में रिवर्स स्विंग गेंदबाज का बड़ा हथियार होती है। उन्होंने शेख रशीद के विकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लगातार गेंद को बाहर निकालकर बल्लेबाज के दिमाग में इसकी आदत बनानी थी और फिर अचानक गेंद को अंदर लाकर उन्हें फंसाना था।
मैच के दौरान 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने भी शमी के साथ खूब मस्ती की। रशीद का विकेट गिरने पर वैभव खुशी में शमी के ऊपर चढ़ गए और उनकी पीठ पर बैठकर जश्न मनाया। शमी ने मजाक में कहा कि वह अक्सर उन्हें छेड़ते हैं और कहते हैं कि उनकी क्रिकेट करियर की उम्र भी वैभव की उम्र से ज्यादा है।
शमी ने कहा कि युवा खिलाड़ियों में आज काफी परिपक्वता है। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने से वे जल्दी सीख रहे हैं। ऐसे में उन्हें ज्यादा कोचिंग देने की जरूरत नहीं, लेकिन मुश्किल समय में सही रणनीतिक सलाह देकर लड़ते रहने की याद दिलाना जरूरी है।
Mohammed Siraj: दो महीने के ब्रेक ने बिगाड़ी सिराज की रफ्तार, दलीप ट्रॉफी में लौट आया ‘पुराना सिराज’
Mohammed Siraj: मोहम्मद सिराज को अपनी गेंदबाजी में रफ्तार से ज्यादा रिदम यानी लय पर भरोसा है। लेकिन दो महीने के ब्रेक ने उनकी यही लय बिगाड़ दी। सिराज ने बताया कि लंबे ब्रेक के बाद श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनका रन-अप बिखरा हुआ महसूस हुआ, जिसका सीधा असर उनकी रफ्तार पर पड़ा।
सिराज के मुताबिक, उनके कुछ कदम छोटे और कुछ ज्यादा लंबे हो रहे थे। इससे उनका पूरा फ्लो टूट गया और गेंदबाजी में वह विस्फोटक अंदाज नहीं आ पाया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। श्रीलंका में गॉल और कोलंबो टेस्ट के दौरान उनकी रफ्तार में साफ गिरावट देखने को मिली और वह 125-130 किमी/घंटे के आसपास गेंदबाजी करते नजर आए।
दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी पहली पारी में सिराज की यही परेशानी जारी रही। ईस्ट जोन के खिलाफ उन्होंने शुरुआती गेंद पर अभिमन्यु ईश्वरन को परेशान किया, लेकिन पिच के सपाट होने के बाद वह अपनी रफ्तार और लय बरकरार नहीं रख सके। 25 ओवर में उन्होंने 140 रन दिए।
हालांकि दूसरी पारी में कहानी पूरी तरह बदल गई। सिराज ने खुद को नतीजे से दूर रखते हुए सिर्फ अपनी प्राकृतिक लय पर ध्यान दिया। इसका असर उनकी गेंदबाजी में साफ दिखा। उन्होंने करीब 135 किमी/घंटे की रफ्तार हासिल की और चेन्नई की सपाट पिच पर भी गेंद को हवा में और पिच से मूव कराया। उन्होंने अभिमन्यु ईश्वरन को शानदार गेंद पर आउट किया, जबकि इशान किशन के खिलाफ भी उनकी गेंदबाजी काफी असरदार रही। दूसरी पारी में सिराज के आंकड़े 16 ओवर, 2 मेडन, 47 रन और 1 विकेट रहे।
सिराज ने कहा- उनका शरीर लंबे ब्रेक को आसानी से नहीं संभाल पाता। उनके 10 साल के करियर में यह पहली बार था जब उन्होंने लगातार दो महीने क्रिकेट से दूरी बनाई। जिम में वर्कआउट और कभी-कभार गेंदबाजी करने के बावजूद शरीर में वैसा रिस्पॉन्स और इंटेंसिटी नहीं दिखी।
उन्होंने श्रीलंका और चेन्नई की गर्मी में लगातार खेलने को भी चुनौतीपूर्ण बताया। श्रीलंका में दूसरे टेस्ट के दौरान करीब साढ़े तीन दिन फील्डिंग करने के बाद वह एक हफ्ते के अंदर चेन्नई में दलीप ट्रॉफी खेलने पहुंच गए। इसके बावजूद सिराज ने कहा कि देश के लिए खेलते समय बहाने नहीं चल सकते।
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