Strait of Hormuz: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन, 40 जहाजों को निकाला; 1.8 करोड़ बैरल तेल की हुई आवाजाही
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को यहां एक बड़े एस्कॉर्ट ऑपरेशन को अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, करीब 40 वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजारा गया।
इन जहाजों के जरिए लगभग 18 मिलियन बैरल यानी करीब 1.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई। युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था।
जहाजों की सुरक्षा के लिए कई स्तर पर तैनाती
इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने सिर्फ नौसैनिक ताकत पर निर्भर नहीं किया। जहाजों की सुरक्षा के लिए हवाई, समुद्री और अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना का उद्देश्य एक तरफ कॉमर्शियल जहाजों को ड्रोन हमलों से बचाना था, वहीं दूसरी ओर ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना भी था, जिससे वह समुद्री यातायात को निशाना बना सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान ईरान की ओर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निष्क्रिय किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है इतनी नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।
इसी वजह से अमेरिका ने अपनी मौजूदा युद्ध रणनीति में इस समुद्री मार्ग को खास महत्व दिया है। अमेरिकी रणनीति में जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव शामिल है।
अमेरिका ने करीब 60 सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार केंद्र शामिल थे।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए अमेरिकी सेना आने वाले समय में भी इस इलाके में सैन्य कार्रवाई जारी रख सकती है।
ट्रंप बोले- अब जहाजों को नहीं देख सकता ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ताजा हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सिर्फ ईरानी रडार सिस्टम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने की ईरान की क्षमता को कम करना भी था। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के पास जहाजों को ट्रैक करने के लिए पहले जैसी रडार क्षमता नहीं बची है।
तेल बाजार पर बढ़ रहा दबाव
होर्मुज में लगातार बने सैन्य तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव है।
ऊर्जा कंपनियां सैन्य सुरक्षा मिलने के बावजूद इस रास्ते से जहाज भेजने को जोखिम भरा मान रही हैं। तेल की कीमतों में तेजी और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का नया रुख
इस बीच ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सामग्री को जमीन के अंदर ही छोड़कर सैटेलाइट के जरिए उसकी निगरानी की जा सकती है।
यह रुख उनके पहले के बयानों से कुछ अलग माना जा रहा है, जब उन्होंने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करना संघर्ष की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया था।
आगे भी जारी रह सकता है सैन्य दबाव
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से विकसित करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहा तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है।
USD vs Rupee: आरबीआई की डॉलर आमदनी से रुपया मजबूत, 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा
भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.4850 पर बंद हुआ। यह करीब 10 हफ्ते का सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर है। रुपये में एक दिन में 0.5% की तेजी आई और यह 27 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त रही।
RBI की स्कीम से उम्मीद से ज्यादा डॉलर आया
रुपये की मजबूती की सबसे बड़ी वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विशेष योजना के तहत उम्मीद से ज्यादा डॉलर का भारत आना रहा। बाजार को इससे संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक के पास अब रुपये को संभालने के लिए पर्याप्त डॉलर उपलब्ध हैं और वह जरूरत पड़ने पर ज्यादा सक्रिय तरीके से बाजार में दखल दे सकता है।
शिनहन बैंक के ट्रेजरी हेड कुणाल सोढ़ानी के मुताबिक, उम्मीद से ज्यादा डॉलर की आमद भारतीय रिजर्व बैंक की स्थिति को काफी मजबूत करती। उनके अनुसार, केंद्रीय बैंक की रणनीति अब सिर्फ रुपये को गिरने से रोकने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह दोनों दिशाओं में रुपये को मैनेज कर सकता है।
सुबह 94.30 पर खुला रुपया, फिर मुनाफा घटा
भारतीय रुपया गुरुवार को 94.30 प्रति डॉलर पर खुला था। शुरुआती तेजी के बाद आयातकों की डॉलर मांग बढ़ी और रुपये की बढ़त कुछ कम हो गई। कारोबार के दौरान यह 94.49 तक कमजोर हुआ, लेकिन अंत में 94.4850 पर बंद हुआ।
RBI की फॉरवर्ड डॉलर पोजीशन पहले ही करीब 137 अरब डॉलर है। ऐसे में ज्यादा डॉलर सप्लाई मिलने से केंद्रीय बैंक के पास तेज उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश बनती है।
महंगा कच्चा तेल बन सकता है बड़ी चिंता
फिलहाल रुपये को राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव से क्रूड की कीमतों में तेजी आई है।
अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे व्यापार घाटे पर दबाव आएगा। ऐसे माहौल में आयातक पहले से डॉलर खरीदकर अपनी जरूरत सुरक्षित करने की कोशिश कर सकते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
यूएस में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से भी दबाव
कच्चे तेल की तेजी से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इसका असर दुनियाभर के बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस महीने ब्याज दर बढ़ाने की संभावना भी मजबूत हुई है।
10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 4.78% रही, जो लगभग तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर के आसपास है। सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना करीब 63% आंकी जा रही है।
यानी फिलहाल RBI की डॉलर आमद से रुपये को मजबूती मिली है, लेकिन महंगा तेल और अमेरिकी ब्याज दरों की तस्वीर आने वाले दिनों में इसकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
(प्रियंका कुमारी)
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