TMC चुनाव चिह्न विवाद पर BJP का हमला, Rahul Gandhi को याद दिलाया सरकारों को गिराने का इतिहास
तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न विवाद को लेकर सत्तारूढ़ दल पर ‘‘सरकार चोरी’’ और ‘‘पार्टी चोरी’’ का आरोप लगाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस नेता को पहले अपनी पार्टी का इतिहास देखना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए उसने किस तरह विपक्षी दलों को ‘‘खत्म’’ किया और उनकी सरकारों को ‘‘गिराया’’। गांधी के आरोप को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और समर्पण के कारण दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है, न कि कांग्रेस की तरह ‘‘गंदे खेल’’ खेलकर।
रीजीजू ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है। यह किसी एक परिवार विशेष के व्यक्ति की पार्टी नहीं है। यहां जो नेता सबसे बड़ी सफलता हासिल करते हैं, वे अपनी दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ते हैं और नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं।
पार्टी का अध्यक्ष भी सामान्य कार्यकर्ताओं में से ही उभरकर आता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी के आरोप उन पर और उनकी पार्टी पर ही लागू होते हैं। कांग्रेस को हमारे राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) पर उंगली उठाने की कोई जरूरत नहीं है।’’ भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अचानक समर्थन वापस लेकर एच डी देवेगौड़ा, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर और आई. के. गुजराल के नेतृत्व वाली सरकारों को गिरा दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा पर आरोप लगाने से पहले राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी का इतिहास देखना चाहिए।
अगर राहुल गांधी अपनी पार्टी का इतिहास नहीं जानते हैं तो वह अपनी पार्टी का नेता बने रहने के भी योग्य नहीं हैं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहने की बात तो दूर है।’’ त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा देश की एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसमें कभी भी ‘‘बड़ा विभाजन’’ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला किया, तब भाजपा और भारतीय जनसंघ भी उनकी रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहे। कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने को शुक्रवार को ‘‘पार्टी चोरी’’ करार दिया और कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले हर राजनीतिक दल और मतदाता की है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक दलों को तोड़ने तथा उनके चुनाव चिह्न छीनने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने गांधी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को बदनाम करने और सत्तारूढ़ दल पर हमला करने का एक और प्रयास करके उन्होंने ‘‘कांग्रेस के कलंकित इतिहास’’ को उजागर कर दिया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने एक वीडियो संदेश में पूछा, ‘‘राहुल गांधी निर्वाचन आयोग पर हमला करने पर क्यों अड़े रहते हैं, जबकि दुनिया भर में इस आयोग की तारीफ लोकतंत्र के वाहक के तौर पर की जाती है। इसे एक ऐसे आयोग के रूप में भी सराहा जाता है, जिसने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके यह सुनिश्चित किया है कि हर वोट की गिनती हो।’’ ईरानी ने सवाल किया, ‘‘निर्वाचन आयोग पर लगातार हमला जारी रखकर वह किसके एजेंडे को पूरा कर रहे हैं?’’ गांधी पर निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने कहा, ‘‘1997 तक अपने शासन के दौरान कांग्रेस ने किसी अन्य दल की निर्वाचित सरकार को अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया, जब उसके पास ऐसा करने की शक्ति थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने केरल में ई. एम. एस. नंबूदरीपाद सरकार को (1959 में) बर्खास्त कर दिया। उसने 1963 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को खत्म कर दिया।
1984 में कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में विभाजन कराया, जिससे पार्टी में दरार पैदा हुई। जब तेलुगु देशम पार्टी के नेता एन. टी. रामा राव इलाज के लिए बाहर गए थे, तब कांग्रेस ने उनकी सरकार को गिरा दिया। कांग्रेस ने बिहार में कर्पूरी ठाकुर की लोक दल पार्टी में भी विभाजन कराया।’’ राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 1989 में कर्नाटक की एस. आर. बोम्मई सरकार को बर्खास्त कर दिया था, जबकि उनकी पार्टी जनता दल के पास राज्य विधानसभा में स्पष्ट बहुमत था।
उन्होंने आरोप लगाया कि 1980 में कांग्रेस के केंद्र की सत्ता में आने के बाद उसने नौ राज्यों में विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली सरकारों को यह कहते हुए बर्खास्त कर दिया था कि इन दलों ने लोकसभा चुनाव में हार के बाद सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। त्रिवेदी ने कहा, ‘‘गांधी का आज आया बयान भारतीय राजनीति और अपनी ही पार्टी के बारे में उनकी अज्ञानता, साथ ही भाजपा के प्रति उनकी दुर्भावना का एक और उदाहरण है।’’ गांधी की टिप्पणियों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और तृणमूल कांग्रेस का जिक्र किए जाने पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि वह यह याद करने में विफल रहे कि दोनों दलों के शीर्ष नेता कभी कांग्रेस के साथ थे। भाजपा नेता ने कहा कि शरद पवार ने ‘‘विदेशी मूल’’ के नेतृत्व के मुद्दे पर 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, उसी विदेशी मूल के वारिस राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी की जड़ों के बारे में पता नहीं है।’’ भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो उसने न सिर्फ़ विपक्षी पार्टियों को तोड़ा और उनकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारों को गिराया, बल्कि अपने ही नेताओं को भी ‘राजनीतिक रूप से कमजोर’ कर दिया। उन्होंने गुलाम नबी आजाद (जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री), अमरिंदर सिंह (पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री), विजय बहुगुणा (उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री) और एस. एम. कृष्णा (कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री) का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर राहुल गांधी को पुरानी बातें याद नहीं हैं, तो वे अपने ही कार्यकाल पर नज़र डाल सकते हैं और देख सकते हैं कि उनकी अपनी पार्टी के कितने मुख्यमंत्री (राजनीतिक रूप से) खत्म हो गए।’’ भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता संबित पात्रा ने गांधी पर ‘‘दिमागी नक्सल’’ टिप्पणी को लेकर निशाना साधा और उनसे अपनी टिप्पणियों के लिए लोगों से माफी मांगने की मांग की।
ईरान- सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे:6 लाख लोगों ने हथियार ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया
ईरान में शुक्रवार को सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। राजधानी तेहरान में हुई यह रैली युद्ध शुरू होने के बाद सरकार की सबसे बड़ी रैलियों में से एक थी। लोगों ने देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने और सैन्य ट्रेनिंग लेने की तैयारी जताई। सरकार ने इस अभियान का नाम ‘जांफदाए ईरान’ रखा है। इसका मतलब है- ईरान के लिए जान तक देने को तैयार लोग। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 6 लाख से ज्यादा लोग अब तक सैन्य ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख ने दावा किया कि ट्रेनिंग लेने वालों की संख्या 10 लाख से ज्यादा हो सकती है। तेहरान में 3 लाख से ज्यादा लोग जुटे सरकारी प्रसारक के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तेहरान की सड़कों पर 3 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे। कई लोग सैन्य वर्दी में थे और हाथों में ईरान के झंडे लिए हुए थे। सरकार की योजना इन लोगों को असॉल्ट राइफल चलाने समेत सीमित सैन्य ट्रेनिंग देने की है। इसके बाद इन्हें देश की सुरक्षा में मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन लोगों को देश की सुरक्षा में मदद करने के लिए तैयार किया जा रहा है। ये रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसीज मिलिशिया ईरान की एक सरकार समर्थक अर्धसैनिक संगठन है। इसका इस्तेमाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने में इस्तेमाल होता रहा है। रैली में अमेरिका-इजराइल की मौत के नारे लगे रैली में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, सैन्य कमांडर और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुछ लोगों ने अमेरिका और इजराइल के झंडों को पैरों से रौंदा। यहां 'अमेरिका की मौत' और 'इजराइल की मौत' जैसे नारे भी लगाए गए। रैली में शामिल 24 साल की मरजिएह अफागी अपने छोटे बच्चे और पति के साथ पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बताना चाहती हैं कि ईरान के लोगों को अपने देश को लेकर उनकी धमकियों से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा कि इतिहास में कोई भी देश ईरान पर हमला करके यहां लंबे समय तक कब्जा नहीं कर सका। रैली में हथियार और ड्रोन भी दिखाए ईरान ने रैली के दौरान सिर्फ भीड़ ही नहीं दिखाई, बल्कि अपनी सैन्य ताकत का भी प्रदर्शन किया। वहां एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, मशीनगन और ड्रोन दिखाए गए। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ऐसे ड्रोन भी प्रदर्शित किए, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के खिलाफ किए जाने का दावा किया गया है। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी का बेहद अहम समुद्री रास्ता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही काफी घट गई है।
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