हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, AI और डिजिटल दौर की चुनौतियों पर हुई चर्चा
भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली में ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: विरासत से नवाचार तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को संपन्न हो गई. 17 और 18 सितंबर को आयोजित इस संगोष्ठी का आयोजन भारतीय जन संचार संस्थान ने किया, जबकि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) की ओर से इसे प्रायोजित किया गया. संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम में इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा, IIMC की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़, कुलसचिव एल. मधुनाग, कार्यक्रम संयोजक डॉ. रचना शर्मा और संचालक प्रोफेसर संगीता प्राणवेंद्र सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई.
पत्रकारिता के मूल मूल्य हमेशा प्रासंगिक रहेंगे
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रजत शर्मा ने तकनीक के जरिए तेजी से बदलती पत्रकारिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में क्रिएटिविटी के महत्व पर प्रकाश डाला. वहीं IIMC की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि माध्यम और तकनीक बदल सकते हैं, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य हमेशा प्रासंगिक रहेंगे. उन्होंने बताया कि IIMC ने पारंपरिक पत्रकारिता, रेडियो-टेलीविजन, विज्ञापन और जनसंपर्क के साथ न्यू मीडिया, रणनीतिक संचार, स्वास्थ्य संचार, मीडिया एवं संचार शासन और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी पाठ्यक्रम शुरू किए हैं.
डिजिटल वातावरण में पत्रकारिता
संगोष्ठी के दूसरे दिन MDU के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) राजबीर सिंह ने इन्फ्लुएंसर, पॉडकास्ट, न्यू मीडिया और सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा की. उन्होंने डिजिटल वातावरण में पत्रकारिता के सामने सूचना और मिसइन्फॉर्मेशन की बढ़ती चुनौती को रेखांकित किया. AI के दौर में पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए मल्टीटास्किंग और नए तकनीकी कौशल विकसित करने को जरूरी बताया.
भाषा के बदलते स्वरूप पर चर्चा
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) राकेश मोहन जोशी ने ‘उदंत मार्तंड’ से हिंदी पत्रकारिता की यात्रा और भाषा के बदलते स्वरूप पर चर्चा की. उन्होंने मोबाइल कंटेंट पर बढ़ती निर्भरता और मिसइन्फॉर्मेशन की चुनौती का भी उल्लेख किया. संगोष्ठी में छह तकनीकी सत्रों और पत्रकारिता शिक्षा पर एक विशेष सत्र में देशभर के विद्वानों एवं शोधार्थियों ने कुल 32 शोध-पत्र प्रस्तुत किए. इनमें हिंदी पत्रकारिता का इतिहास, डिजिटल मीडिया, AI, आर्थिक मॉडल, मीडिया नैतिकता, फेक न्यूज, डीपफेक, महिला एवं सामुदायिक पत्रकारिता और पत्रकारिता शिक्षा जैसे विषय शामिल रहे.
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